Friday, June 10, 2022

लोकतान्त्रिक महापर्वमे बड़बड़ लीला !



–मनोज झा मुक्ति 

लोकतान्त्रिक महापर्व मानल जायबला ‘निर्वाचन’  वैशाख ३० गते सम्पन्न भेल । लोकतन्त्रमे सबसँ पैघ शक्ति मतपत्रमादे व्यक्त होबऽबला जनमतके मानल जाइत अछि । स्वाभाविको अछि, कियाकी पाँचसालमे एकवेर होबऽवला चुनावमे जनता अपन मतपत्रक मादे पाँचसाललेल अपन प्रतिनिधि चुनैत अछि आ वएह प्रतिनिधिद्वारा गाम,टोल,नगरक विकासके नक्सा खिचल जाइत अछि । 

निर्वाचन आयोग निर्वाचन सम्पन्न करवाकलेल अनेक प्रकारक नीति नियम बनाविकऽ चुनावक प्रक्रिया पुरा कऽ जनताद्वारा अपन प्रतिनिधि चुनवाक काज करवैत अछि । मुदा दूर्भाग्य जे जाहि देशमे निर्वाचन आयोगे अपनेआपमे स्पष्ट नईं अछि, ताहि देशमे निर्वाचन कोना निष्पक्ष आ आचारसंहिताक परिधिमे भऽसकैत अछि ? उम्मेदवारसबहक चुनावी खर्चक सीमा निर्धारण कयलाकवादो अँखिदेखार रुपमे जे पाइयक नदी बहाओल जाइत अछि तकर अनुगमन कोना कयल जाऽरहल अछि से ककरोसँ नुकायल नईं अछि ।

विशेष कऽ एहि स्थानीय चुनावमे सहभागी सब अवयवसबहक खेल देखिकऽ लोकतन्त्रमे होइत चुनावी प्रक्रियापर दुःख लागव स्वाभाविक अछि । निर्वाचन आयोग, राजनैतिक दल, उम्मेदवार, मतदाता, कर्मचारी, प्रशासन लगायत कोनो पक्षक कर्तुत एहन नई देखलगेल जाहिसँ मोनमे सन्तुष्टी भऽसकय । सबपक्षक लीलाके कोनोरुपसँ लोकतान्त्रिक पद्धतिके मजबुत करऽवला नईं देखलगेल ।

निर्वाचन आयोगक टालमटोल मानसिकता

लोकतन्त्रमे निर्वाचन आयोगके स्वतन्त्र आ निष्पक्ष होएवाक चाही । आयोगक नीति स्पष्ट होएवाक चाही आ दूरदर्शी होएवाक चाही । मुदा, आयोग राजनैतिक प्रभावसँ मुक्त रहल ?

देशमे बहुदलीय प्रजातन्त्र होइतो स्वतन्त्र उम्मेदवारकलेल सेहो स्थान देलगेल अछि, मुदा जाहि रुपसँ मतपत्रमे राजनैतिक दलजकाँ स्वतन्त्र उम्मेदवारके सेहो प्यानलबला चुनाव चिन्ह छपाओल गेल से कतेक उचित ? जँ स्वतन्त्र उम्मेदवारके सेहो राजनैतिके दलजकाँ प्यानल चुनाव चिन्ह देलगेल त दलक उम्मेदवार आ स्वतन्त्रमे कि अन्तर रहिगेल ? एहन पैघ त्रुटिपर सेहो सभ निकायके चुप्पीसँ की बुझल जाय ?

निर्वाचन सम्पन्न करयवाकलेल गठित समितिक आँखिक आगा निर्वाचन आचारसंहिताके धज्जी उडैत रहल आ निर्वाचन आयोग मौन भऽ देखैत रहल । खर्चक सीमा निर्धारण होइतो दिनराति भोजेभोज मचल रहल, एकटा उम्मेदवार बीसोसँ बेसी गाडी दौडबैत रहल आ निर्वाचन आयोग चुपचाप देखैत रहल । की लोकतन्त्रमे एहन चुनावसँ नीक प्रतिनिधि चुना सकैय ? मतगणना स्थलमे देशक चारिम अंग मानल जायवला संचारकर्मीके बहुतोठाम प्रवेश नईं देलगेल ओतऽ कोनरुपसँ निर्वाचनके पारदर्शी कहल जाऽसकैय ?

राजनैतिक दलक आचरण

लोकतन्त्रमे राजनैतिक दल जतेक निष्ठापूर्णरुपसँ अपन गतिविधि करैत अछि, लोकतन्त्र ओतवे समृद्ध होइत जाइत अछि । मुदा दूर्भाग्य जे नेपालक कोनो दलक आचरण नीक नई देखलगेल । अपन आ अपना लोकके जितयवाकलेल कोनो कुकर्म करऽ परय ताइमे पाछु नई रहैत अछि । जातिपातिक राजनीति नई होयवाक चाही कहनिहार पार्टीक नेता जहन टिकट बँटवारामे उम्मेदवारक जातिक संख्या आ खर्च करवाक सामथ्र्यके देखिकऽ टिकट बँटैत अछि त हमसब सहजहिं अनुमान लगावि सकैतछी जे राजनैतिक दल आ ओकर नेता कतेक नैतिकवान अछि । कोनो राजनैतिक दलसँ कोन तरहक समाजवाद या लोकतन्त्रके समृद्धिके अनुमान लगाओल जाऽसकैत अछि । अपन पार्टीक उम्मेदवारके जितयवाकलेल केहनो घटिया आचरण कोनो पार्टीक नेता कऽसकैत अछि से एहि स्थानीय चुनावमे देखलगेल । अपना पार्टीक कार्यकर्ताके कोनो दुष्कर्म करवाक छुट देने राजनैतिक दल विरोधीके छोटोछिन गल्तिके भाषण आ प्रेस विज्ञप्ति मार्फत विरोध करवाक जे संस्कार देखाओल जारहल अछि तकरा कोन लीलाके संज्ञा देल जाय ?

उम्मेदवारक लीला

कोनो हिंसावे पार्टीक टिकट भेटल आ उम्मेदवारी देने सबहक पर्चा,पम्पलेटमे जाहि प्रकारक विशेषण जोडल जाऽरहल अछि ओ लोकतान्त्रिक निर्वाचनके व्याख्या करवाकलेल पर्याप्त अछि ।

चुनावी पर्चा,पम्पलेटमे इमान्दार, नैतिकवान, सुयोग्य, युवा, कर्मठ, लगनशील, राजनैतिक,जुझारु लगायतक विषेशणसबजे उम्मेदवार अपनालेल प्रयोग कयने रहैत अछि, ओ देखिकऽ हँसी लागव सामान्य अछि । जे सबदिन बेइमानीए करैत आएल अछि, भ्रष्टाचारमे लिप्त अछि, अनैतिक काजमे संलग्न रहैत अछि, ओहो अपनाआपके जे मोन होइत अछि विशेषण जोडवैत अछि । एकरा कोन लोकतान्त्रिक आचरणक रुपमे ग्रहण कयल जाय ?

लोकतन्त्रमे उम्मेदवार बनवाकलेल सबके स्वतन्त्रता देलगेल अछि । उम्मेदवारके अपन आचरण,विचार,व्यवहारक आधारपर मत मँगवाक विधिविधान होइतो, जातिपातिक नामपर किरिया खुएवाक परम्परा रहल समाजमे एकटा वाक्य नीकजकाँ बाजऽ नईं ऐनिहारसब जतऽ निर्वाचीत होइत हो, ओतुक्का लोकतन्त्रके की कहवैक ? दारु आ मासुके बले जनताक मतके अपनादिस आकर्षित करवाक काज कतऽ नईं कयलगेल ?

कतौ कतौ त उम्मेदवारक लीला एहनो देखलगेल जे एकटा उम्मेदवार घरेघरे रहु माछ बँटलक त दोसर बोआरी माछ घरेघर पठौलक आ तेसर चारिम केओ मुर्गाके मासु त कियो खसीक मासु बाँटऽमे पाछा नईं रहल । पाई आ दारु बिनु चुनाव नई होइत अछि से सबहक अनुभवसँ हमर अनुभव फराक नहिं अछि । कमसँकम नास्तामे चुरा–घुघनी, मुरही–तरकारी आ भोजनमे भात,दालि,तरकारी त सबसँ कमजोरहो उम्मेदवार टेन्ट गारिकऽ खुऐवे कैलक । आन आन कोनकोन कर्म उम्मेदवारसब भोट लेवाकलेल कयलक से हमरासँ बेसिए अपनेसबके बुझले अछि ।

गुरु घण्टाल लोकतान्त्रिक मतदाताक लीला

लोकतन्त्रमे सबसँ उपर मानल जायबला मतपत्र जकरा हाथमे अछि, जकरा सार्वभौम सत्ता सम्पन्न जनता÷नागरिक कहल जाइत अछि, ताहि मतपत्रधारी जनताके लीला त अपरम्पारे देखलगेल ।

कोनो उम्मेदवारके आशिर्वाद देवऽसँ नईं पाछा रहल मतदाता मालिक जहन ककरो चाकडी, लोभ, व्यक्तिगत स्वार्थ सिद्धिके हथियारकेरुपमे अपन मताधिकारके प्रयोग करैत हो, ओतुक्का लोकतान्त्रिक आचरणके कोन नाम देलजाय ? सामूहिक स्वार्थक कोनो बात सुनवाक तैयार नईं रहल मतदाता अपन जाति,कुटुम्ब,सम्बन्धितके देखि मतदान करवाक आचरणसँ ओतप्रोत देखलगेल । 

अपने कोनो पार्टीक जिम्मेवार पदमे रहितो कोनो ने कोनो प्रभावमे पडिकऽ अन्तरघात कयनिहार कार्यकर्ताके कोन प्रकारक आस्थावान कही ?

जतऽ अपन व्यक्तिगत स्वार्थ आ सहानुभूतिक नामपर जे सर्वशक्तिमान मतदाता मतदान करैत होय, ओतऽ केहन प्रतिनिधि चुनयतै ? ककरो कफन देवाक नामपर, ककरो राजनीतिमे बिल्टौआ भऽगेलै ताहि नामपर, कतौ लडैत लडैत थाकिगेलै अईवेर अन्तिमे छै ताहि नामपर,कतौ नई जिततै त फाँसी लागि जयतै ताहिनामपर भावनामे बहिकऽ मतदान करयनिहार मतदाता होई, ओतऽ केहनो विचारवान, चरित्रवान,लडाकु, दूरदृष्टि रखनिहार उम्मेदवारके जमानत जप्त नईं होयतै त की होयतै ? नटवरलाल मतदाताक बीचसँ नीक नेता कोना निर्वाचीत भऽसकैय ?

समग्रतामे ई कहवामे कनिको हिचकिचाहट नई होयवाक चाही जे जाहि प्रकारसँ लोकतान्त्रि देशमे निर्वाचन करयवाक जिम्मा लेनिहार, निर्वाचनमे अपना दलक उम्मेदवार चुननिहार, विभिन्न दलसँ या स्वतन्त्रे भऽ चुनाव लडनिहार आ केहनो उम्मेदवारके कोनो बहन्ने मतदेनिहार मतदाता नैतिकवान नईं होयत ताधरि समृद्ध आ सुसंस्कृत लोकतन्त्रके कल्पना करव मूर्खता अछि ।

लोकतन्त्रकँे मजबुत करवाकलेल होवऽबला निर्वाचनमे सहभागि होवऽबला हरेक निकाय आ व्यक्ति अपन दायित्वके निर्वाह केनाई प्रारम्भ नईं करत, देश आ समाजमे परिवर्तन होयव असम्भव अछि । जानकी हमरासबके सदबुद्धि देथु ।


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