Sunday, July 5, 2009

कि अछि ई चारि वर्ण आ छत्तिस जातिक फूलवारी ?


ध्रुव महतो

नेपालमे शाहवंशीय राजतन्त्रक आरम्भ पृथ्वीनारायण शाहसँ भेल अछि । वएह नेपालके एकिकरण कएने रहथि, ताहिसँ हूनका राष्ट« निर्माता सेहो कहल जाइत छन्हि । राष्ट« कहलासँ जनतेके बुझल जाइत छैक । ताहिसँ नेपालीजनताके एकिकरण केनाइए नेपालक एकिकरण केनाइ अछि । प्रश्न स्वभाविक अछि कि कोन आधारमे, केना ओनेपालक एकिकरण केलथि ?

वास्तवमे पृथ्वीनारायण शाह बाहुवली रहथि जे अपन बाहुवलक आधारमे नेपाली जनताके एकिकरण कऽ नेपालराष्ट«केँ एकिकरण कएने रहथि । एकिकरणकबाद अपनाके ताई राज्यक राजा घोषित कएलथि आ अपनाद्वाराकहलगेल हरेक बातके कानून जकाँ मानवाक आ मनेवाकलेल सऽभके बाध्य कएलथि, विवशता वस सबके मानहिंपड़लनि । आखिरमे एकटा विवश मनुष्य कइये कि सकैय ? आब शासन करबाकलेल एकटा शासन प्रणलीकआवश्यकता होएब स्वभाविके छल । एहि सन्दर्भमें ओ विचार केलनि कि जौं मनुष्य विभेद रहित भऽजाएत तबाहुवलक आधारमें शासन करब कठीन होबऽसकैय, किया त अखन बन्दुकक डरसँ सबकियो हमर आदेश मानत, मुदा आगामी दिनमें प्रजासब अपन वास्तविक अस्तित्वकेँ बुझलाकबाद एकजुट भऽजाएत तखन बन्दूकक बलपरशासन चलाएब कठीन भऽ सकैय ।

अन्तोगत्वा ओ निर्णय केलथि कि जनताके विभेद रहित बनेनाई मूर्खता अछि, वरु छिन्न—भिन्न कऽरखलाकबादे हमर बाहुवलक शासनक समय किछुए दिनकलेल ‘पशुपतिनाथ’क कृपासँ टिकाऊ रहत । एहि भयककारणसँ हमसब नेपालीक एकताक प्रतीक ओहि शाहवंशी राजसब कहल करैत छल जे ‘पशुपतिनाथले हामीसबैको कल्याण गरुन्’ । ताहिसँ ‘डिभाइड एण्ड रुल’ अर्थात ‘फूटाउ आ राज करु’ के राजनीतिक प्रणली नेपालीजनताक उपर थोपव स्वभाविके छल आ ताही मनसायसँ प्रजाके सम्बोधन करैत कहलनि कि ‘हाम्रो नेपाल चारवर्ण र छत्तीस जातको फुलवारी हो’ मुदा ताहि समयक नागरिकसब एहि वाक्यक रहस्य बुझऽनईसकलाक बादोसुनिकऽ सब प्रसन्न भऽगेलथि । अखन सेहो प्रायः नेपालीसब एकर अर्थ बिनु बुझने प्रसन्न भेल करैत छथि ।

‘भुजवल विश्व वस करि राखेसि कोउ न स्वतन्त्र ।

मण्डलीक मनि रावण राज करइ निज मन्त्र ।।

रावण त्रmोध अनल निज स्वांश समिर प्रचण्ड ।

जरत विभिषण राखेउ दिन्हेउ राज अखण्ड ।।’


पृथ्विीनारायण शाहसँ पूर्व, प्राचीन कालमे महाराजा मनु व्यवस्था केलनि— किछु लोकके पढाइ—लिखाइ आनियम बनेबाक काजमे नियुक्त केलथि, जकरा ब्राम्हण कहलगेल, किछुके हात—हथियार संचालन आ सुरक्षाकरबाक जिम्मेवारी देलनि जकरा क्षत्रिय कहलगेल । किछुके धन—सम्पति संग्रह आ खाद्य पदार्थक आपुर्तिकरवाक काजमे लगाओलगेल जकरा वैश्य कहलगेल आ एहि सबहक सेवामे नियुक्त काएलगेल लोकसबके शुद्रकसंज्ञा देलगेल ।

अतः मनुष्य—मनुष्यक बीचमे भयंकर घृणाक भावना फैलयबाक काज पृथ्वीनारायण शाहसँ सेहो पूर्वहिं कालसँस्मृतिसब करैत आएल छल एवं पृथ्वीनारायण शाहक कार्यकालमे जाति प्रथाक जड़ि नीकजकाँ पसरिगेल छल ।वास्तवमे जन्ममे आधारित जातिप्रथा स्मृतिएसबहक देन होइतहुँ ‘चारि वर्ण आ छत्तीस जातिक फुलवारी नेपाल’ कहिकऽ पृथ्वीनारायण शाह आ हूनक वंशजसब एकरा अनुशरण करैत जाति प्रथाके मजबुती दैत आएल अछि ।

सऽभ स्मृतिसब महाभारत कालकबादे लिखलगेलाक कारणें जन्ममें आधारित जातिप्रथाक उत्थान सेहो महाभारतकालक बादे भेल मानल जाऽसकैय । ताई स्मृतिसबमें मनुस्मृति, याज्ञवल्क्य स्मृति आ पराशर स्मृति समाजमेबेसी प्रचलीत अछि । इतिहासक विद्वानसब कहैत अछि कि महाभारत कालसँ अखनधरि ने कोनो मनु नामक राजाभेल, न गौतमबुद्धक वाद याज्ञवल्क्य नामक रिषी ।

मौर्यवंशक अन्तिम सम्राट वृहद्रथक मृत्युवाद हूनक ब्राम्हण सेनापति पुष्यमित्र शूंगक शासन कालक उदय भेल ।पुष्यमित्र शुंग, भगवान बुद्धक सिद्धान्त सबकेँ खण्डन करैत जन्मेसँ निर्धारित ब्राम्हणसबहक पूज्यतामे आधारितचार्तुवण्र्य व्यवस्थाके स्थापित कएलथि । धर्मशास्त्रक नामसँ स्मृतिसब ताहि समयमे प्रतिष्ठित भेल धर्मक दायित्वआचार्य गुरुसबके ताहि समयसँ देलगेल ।

पृथ्वीनारायण शाहक कार्यकालमें हूनक चारुकात फैलल घृणस्पद वंशावलीक सूचक लाखो—करोड़ो नामक, व्यवसायसबहक परिचायक छल । धर्मक परिचायक नहिं छल । ताइ लोकसबके अस्पृश्य घोषित करबाक धर्मकदायित्वलेने ओ धर्माधिकारीसब, न्यायाध्यक्षसब आ हूनकासबद्वारा प्रदत्त स्मृतिजन्य व्यवस्थासब जाहि अनुसाररहन—सहन एवं जीवन यापन करबाक काजकेँ धर्म कहल जाइत छल । जकरा ‘चारि वर्ण आ छत्तिस जातिकनेपाल’ कहि पृथ्वीनारायण शाहसँ अखनधरि हूनक वंशजसब सिञ्चित कएलनि । ओ राजतन्त्र आब नई अछि, समाप्त भऽगेल । अतः हीन भावनाके सूचीत करऽवला आदिवासी, जनजाति, दलीत, चमार, डोम, कोल—भील, केवट, कहार इत्यादि....जकर कोनो आधारे नहि अछि, ई आधारे नई रहल उपाधीसबसँ आइयो सटल रहबाकऔचित्य कि ? ई बहुत पैघ गल्ती अछि, अभिशाप अछि । कियाकि यहि प्रकारसँ सटल रहब त राजतन्त्र परिवर्तनभेलाक बादो जातीय पहिचानसबहक आधारमे नेपालीक फेर शोषण होएबाक संभावना अछि । अतः हमरासब उपरथोपलगेल एहि जातीय उपाधिसबके त्याग कऽ अपन वास्तविकतासँ जूड़ी, इतिहासक मुख्यधारासँ जुटी ।

अखन अपना नेपालमे एकटा प्रश्न एकदम ओझराएल अवस्थामें अछि, जाहिसँ सबकियो डेरायल अछि आ ओअछि—‘जातिप्रथा’ । चारि जाति आ छत्तीस वर्णक फूलवारी नेपाल अखन चारि जाति आ छत्तिस चूर्णमें परिणतभऽगेल अछि । जातियताक बात लऽकऽ देश विखण्डन होएबाक खतरा बढि रहल अछि । विविध जात—जातिसबजातीय राज्यक माँग जोड़दाररुपसँ उठाऽरहल अछि त जातीय आरक्षणक माँगसँ नेपाली आकाश गुञ्जयमानभऽरहल अछि । प्रमुखरुपमें नेकपा माओवादी जातीवादके उठवैत देखापड़ि रहल अछि त आन—आन पार्टीसब सेहोअपनाके एहिसँ अछुत नई रखने अछि । जातीवादक बात लऽकऽ दँगा सेहो होइत रहल अछि, एकटा मनुष्य दोसरमनुष्यकेँ खुन पिपासु बनल अछि, किया ? किया त, प्रकृति सदैव अपनाके सर्वश्रेष्ठ रहल प्रमाणित करैत आएलअछि, एकटा भाई दोसर भाइसँ लड़ैत आएल अछि । एहि तरहक जाती—गुटबन्दी अज्ञान आ अविवेकसँ उत्पन्नहोइत अछि ।

एकरे परिणाम अछि कि सम्पूर्ण नेपाल लाल—कारी, उज्जर—पियर रंगमें बाँटल अछि । एक दोसरके दमनकरबाकलेल हात—हथियार जम्मा करबाक होड़बाजीमें लागल अछि । शीतयुद्धक वातावरण बनल अछि । ई युद्धकहियो जाति आ जमीनकलेल होइत अछि त कहियो व्यवसाय आ आकृतिक लेल, मुदा युद्ध निश्चित रुपसँ होएबेटाकरैत अछि, होइते रहत । एहि युद्धक कारण जाति—पाति, उँच—नीच, छुवा—छुत इत्यादि मनुष्यकेँ अन्तःकरणमेरहल राग आ द्वेष आदि प्रकृतिजन्य विकार सबहक देन अछि । मुदा यहि युद्धके धर्मक सँग कोनो सम्बन्ध नहिअछि ।

आई चारि वर्ण आ छत्तीस जातिक चूर्ण नेपालमे जातिवादक नहि अछि ? सब जातीवादी बनिगेल अछि । कियात— जाति, सम्प्रदाय, भाषा आ क्षेत्रिय संकिर्णतासबकेँ आधार बनाकऽ चुनावमें टिकट देल जाइत हछि , ताहिजातिक लोकसबके चुनाक प्रचारमे पठाओल जाइत अछि आ हुनकेसबसँ प्रभावित भऽ हमसब अपन भोट सेहो दैतछी । कर्मचारीसबहक नियुत्तिmमें सेहो कि हमसब जातिवादसँ अपरिचित छी ? मुदा ई मात्र कहलाधरिसँ होबऽवलानहि अछि, अपितु व्यवहारमे लागु करबाक बात अछि ।

हमसब कहैत त छी, मुदा अपना व्यवहारमें लागु नई करैत छी । तहन दोष ककरा देवै ? एकरालेल दोषीहमही—आँहाँ छी, जेकरा हम—आँहाँ कहियो सरकारक आरक्षण नीतिमे तकैत छी, कहियो जातीय राज्यकनिर्माणमें तकैत छी त कहियो एकरालेल धर्मके दोषी कहैत छी । ओना त धर्म शास्त्रसबमे कोनो एकौटा एहन श्लोकनहिं अछि जे भगवानद्वारा मनुष्यकेँ विभाजन काएलगेल हुए, उँच—नीच, छुत या अछुत बनाओलगेल होए ।जातीवादकलेल दोष ओ व्यवस्थाकारसब सेहो नहि अछि जे अपना समयक समाजक संचालनकलेल जातीवादसँसम्बन्धित कानूनसबके संरचना कएलनि । वास्तवमे कहल जाए त हमरे—आँहाँक दोष अछि जे अखनोजातीवादके मानैत छी ।

सत्य कि अछि से बेगर जननहीं डिंगँ हँकैत रहैत छी । सम्भवतः याह हमरा आँहाँके फोकटिया डिंगँ देखिकऽपृथ्वीनारायण शाह सोंचलथि जे नेपाल त चारि वर्ण आ छत्तिस जातिक फूलवारी अछि, जकरा नामपर शासनकरब उपयुक्त रहत । ताएँहेतु अपना समयक ओहि समाजिक व्यवस्थाकारसबकेँ गारि देबऽसँ नीक अपनामे सुधारकरब सबहकलेल उपयोगी भऽ सकैय ।

कि मधेशक अपेक्षाके पुरा करत ई सरकार ?





मनोज झा मुक्ति

देशमें एकिकृत माओवादीक सरकार हटलाकबाद लोकतान्त्रिक सरकाररुपमें माधव नेपालक अगुवाईमें सरकार निर्माणक प्रकृया शनै : शनै : आगा बढि रहल अछि । ओना सरकार निर्माणक प्रकृया शुरु भेला सेहो महिनासँ उपरे भऽगेल अछि आ दूइयो महिनाक बाद पुरा होएत से कठीने बुझाऽरहल अछि ।
सरकार निर्माणक त्रmममें बहुतो सहयोगी पार्टीसबमें मन्त्री बनवाकलेल अपनेमें दरार पड़िगेल अछि । किछु पार्टी त फुटिएगेल आ किछु फुटक किछेर पर पहुँचगेल अछि । एक्कहिटा पार्टीमें नहिं प्रायः सब पार्टीमें असन्तुष्टि उत्पन्न भऽगेल अछि । आओर जे जेना हुए, जाहि रुपे ‘सीताक श्रापल’ देशकेरुपमें नेपालके लेल जाइत छैक ताहि अनुरुप कोनो आश्चर्यक गप्प नहिं, जाइ तरहक एतुक्का परिवेश छैक, नेतासबहक विवेक छैक, ताहि अवस्थामे ई स्वाभाविके ।

नेपालमें सबसँ बेसी उपेक्षाक शिकार रहल मधेशक आकाँक्षा फेर एकवेर एहि लोकतान्त्रिक सरकारसँ तेजोबद्ध होवऽलागल अछि । आ ई स्वभाविके अछि, कियक त एहि सरकारमें अपनाके ‘मधेशीक पहिचान, सम्मान आ स्वाभिमान’क लेल लड़ऽवला पार्टी कहनिहार ‘तराई मधेश लोकतान्त्रिक पार्टी’ सेहो सहभागि अछि । ओना मधेशे मुद्दासँ अस्तित्वमे आएल मधेशी जनाधिकार फोरम आ मधेशीक बात कऽ कऽ एखनधरि टिकल सद्भावना पार्टी एहीस पहिलुका सरकारमें संलग्न छल । आ हूनकर सबहक मधेशप्रतिक बोली आ काजक मधेशी जनता समीक्षा कऽ चुकल अछि ।
ताइकेबाद अखन पहिलुका सरकारमें सहभागि नईभेल ‘सत्ता नहीं, प्रभुसत्ता चाहिए’के नारा दैत आविरहल तमलोपा, सरकारमें गेल अछि ते मधेशी जनतासब सरकार दिस होइ नई होइ, तमलोपा दिस टकटक्की लगौने अछि जे मधेशके ‘प्रभुसत्ता’क लेल पार्टी कि करत ? मधेशीवादी दलसबहक काज एवं रवैया देखिकऽ एक तरहें मधेशी जनता पहिनहिंसँ निराश भऽ कऽ बैसल अछि, तइयो क्षणिक काललेल मधेशक आशाक दृष्टि सरकारमें सहभागि तमलोपा दिस लागल अछि । मधेशक क्षणिक आशाक दृष्टिकेँ तमलोपा आ ओकर मन्त्रीसब कतेकधरि तृप्ति प्रदान कऽसकत से तमलोपाकलेल बहुत पैघ चुनौती रहल अछि आ याह एखुनका काज तमलोपाक भविष्य निर्धारण करत ।

तमलोपाक अँशमें तीनटा मन्त्रालयसब भेटल अछि, शिक्षा, उद्योग आ यूवा तथा खेलकुद । आन आन पार्टीक नजरिमें एहि मन्त्रालय सबकेँ महत्व भलेहिँ कम हुए, मुदा तमलोपाक लेल ई बहुत पैघ अवसर भऽ सकैय । ‘नीक अभिनेताक पुरस्कार पएवाकलेल नाटकमें नायकके भूमिका भेटय से कोनो जरुरी नई छैक, नाटकक एक सिनमें मात्र भूमिका रहल पात्र सेहो अपना अभिनयक बलपर उत्कृष्ट अभिनेताक रुपमे पुरस्कृत भऽ सकैय’, एहि बातके तमलोपाके मूलमन्त्रके रुममें लेब पड़तैक । एहि तरहक संस्कारी नेता रहल देशक जम्बो सरकारमें कतेक काज भऽ सकैय, ताइसँ मधेशी जनता अज्ञान नहिं अछि । तमलोपाके कि करब उचीत भऽ सकैय त ?

तमलोपाक भेटल शिक्षा मन्त्रालय मार्फतसँ मधेशमें विश्वविद्यालय, व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रतिष्ठान, विश्वविद्यालय सबहक प्रत्येक तहमे समावेशीकरणक बातके लागु केनाई, शिक्षा नीतिमे सुधार कऽ असल शिक्षा प्रणाली लागु करबाक चुनौती रहल अछि । मधेशकलेल शिक्षा मन्त्रालय अन्तर्गत रहल सिटीभिटी, अनौपचारिक शिक्षा केन्द्र सबसँ नीकजकाँ काज काएल जाऽसकैय । तहिना उद्योग मन्त्रालयक मादे सिमेन्ट फैक्ट«ी सबकेँ गुणस्तर बढेबाक, मधेशमे नयाँ नयाँ उद्योगक स्थापना आ देशमें बन्द रहल उद्योगके पुनः संचालन करब मुख्य चुनौती पूर्ण काज रहल अछि ।

एहि तरहें सब पार्टी आ सरकारक उपेक्षाक सिकार बनल रहल यूवा तथा खेलकूद मन्त्रालयक मादे तमलोपा अपन आ मधेशक काया पलट करऽ सकैय । मधेशक यूवाके परिचालन कऽ देशमें खेलकूदक माहौलके श्रृजना करबाक बहुत पैघ अवसर तमलोपाक हाथमें आएल अछि । मधेश लगाएत देशक विभिन्न ठाममें ग्राउण्डक निर्माण, खेलाडी आ प्रशिक्षकके प्रोत्साहन करैत खेलक माध्यमसँ देशके आगा बढेबाक काज तमलोपा कऽ सकैय । ताइके लेल सबसँ पहिने सब मन्त्रालयमें रहल राजनीति नियुक्तिबला सीटके जते जल्दी हुए खाली कराबिकऽ अपन आ ठोस आदमीके राखबाक पहिल काज करऽ पड़तैनि । फेर अपन आदमी रखबाक नामपर जकरे मोनभेल तकरे राखऽ (कार्यकर्ता भर्ती केन्द्र बनाबऽ)सँ परहेज करैत सम्बन्धित क्षेत्रक विज्ञतापर सेहो ध्यान देवऽ पड़तैनि ।

सरुवा, बढुवा आ नियुक्ति देवऽसँ बेसी महत्व मधेशक सार्वजनिक काजके देबाक नीतिके आगु लाबऽ पड़तनि । जौं अपन आ नीकलोकके नई राखि मात्र डाक बढाबढ करैत पाइएक बले जथाभावी नियुक्त करैत गेल त तकर परिणाम सेहो भोगवाकलेल तमलोपाके तैयार रहऽ पड़तैनि ।

एहि सरकारमें सहभागिताक तुरत्त बादसँ तमलोपा मधेशक जनताक गिन्तीक मीटरपर चढिगेल अछि । आब देखबाक मात्र ई अछि कि अपन नाम अनुसार जतबे कऽसकी से काज करैत अपन सकारात्मक काजसँ तमलोपा अपन स्थान बनवऽमे सफल रहत या अखनधरिके मधेशकलेल देलगेल भाषण मात्र भाषणे छल से सिद्ध करत ? मधेशक आश बनल रहत या विकल्पक खोजिमें मधेशक आँखि फेरसँ पसरत !

Thursday, June 4, 2009

मल्ल काल आ मैथिली साहित्य



काठमाण्डू उपत्यकामे मल्लकालिन समयमें भेल मैथिली साहित्यिक विकासकें स्वर्णकाल मानल जाइत अछि । मल्लकालिन समयमें मैथिली काठमाण्डू उपत्याक राजकाजक भषाके दर्जा पओने छल । प्रायः सऽभ मल्ल राजा लोकनि मैथिली भषामें साहित्यक रचना कयने छलाह । मैथिली साहित्यमे अपन योगदान देनिहार किछु कवि मल्लराजा आ हूनक कृतिके सन्दर्भमें किछु जानकारी प्रस्तुत अछि ।

१. सिद्धिनरसिंह मल्ल(१६२०—१६५७) ः— हरिहरसिंहक पश्चात ई ललितपुर—पाटनशाखाक सुप्रसिद्ध साहित्यानुरागी राजा भेलाह । ओ शासक रहितहुँ सन्यासी जकाँ धर्मकर्ममें लीन रहैत छलाह । कृष्ण मन्दिरक शिलालेखमे हूनका युधिष्ठिरक समान धर्मात्मा, अर्जुनक समान परात्रmमी आ कर्णक समान दानी कहल गेल अछि । वस्तुतः ओ कोटाहुति यज्ञ कऽ अपन भक्ति—भावकेँ साकार कए देल तँ कृष्णविनायक पदावलीक रचना तथा कार्तिक नाचक प्रवर्तन कए साहित्य आ नृत्यक प्रति अपन सर्जनात्मक प्रतिभा सेहो अभिव्यक्त कएलनि ।ओना सिंहभूपतिक नामसँ प्रख्यात भेल एहि कविकेँ अनुमानहिसँ सिद्धिनरसिंह मल्ल कहलगेल छन्हि । एहिसँ पहिने नरेन्द्रनाथ गुप्त सिंहभूपतिके शिवसिंह अथवा विद्यापतिक उपाधि मानिलेने छलाह, मूदा ओ भ्रामक सिद्ध भेल । सिंहभूपतिक ‘रागतरंगिणी’ आ ‘नानारागगीतम्’ में दू÷दू गोट पद संग्रहित काएलगेल अछि । हिनक एकगोट पद ‘भाषा—गीत संग्रह’ में सेहो भेटैत अछि । हिनक किछु पंत्तिm एहि तरहक अछि ः—

सबहुँ सखि परबोधि कामिनि अनि देल पिय पास ।

जनि बाँधि व्याधञे विपिन सञो मृग तेजय दीघ निसास ।।

बैसलि शयन समीप सुवदनि जतने समुखि न होए ।

भेल मानस बुलय दहो दिस देल मनमथ फोए ।।

२. भूपतीन्द्र मल्ल(१६९५—१७२२) ः— जितामित्र मल्लकबाद भक्तपुरक राज भेल भूपतीन्द्र मल्लक स्थान नेपालक उत्कृष्ट कविगणमें उच्चतम अछि । ई विषेशतः भक्ति विषयक पदक रचना कएलन्हि । शिव, गौरी, हरि ओ शक्तिक अर्चना विषयक हिनक पदसऽभ छन्हि । हिनक पद एक पदावलीमे संकलित अछि, जकर अन्वेषण डा. बागची कएलन्हि । श्रीझबाली अपन ‘नेपाल उपत्यकाको मध्यकालीन इतिहास’ मे १०० मैथिली गीतक हिनक एकटा संग्रहक उल्लेख कएने छथि । हिनक बहुतो पद शिलोत्कीर्ण सेहो उपलब्ध अछि । हिनक किछु पंत्तिm एहि तरहक अछि ः—

पीत वसन कुमित विराज, खगपति आसन विराज

शंख चत्रm गदा पद्म वाहु सहास......

भूपतीन्द्र हरि गुण गाव ।

पदयुग सुन्दर हृदय विहाव ।।

३. जगज्ज्योतिर्मल्ल(शासन १६१३—१६३७) ः— संगीतशास्त्रक बड़का संरक्षकके सँगहि सुकवि रहल जगज्ज्योतिर्मल्लक दरबारमें अनेक मैथिल विद्वानसऽभ आश्रय पवैत छलाह । ‘मुदितकुवलयाशव(१६२८)’,‘हरगौरीविवाह(१६२९)’,‘कुंजविहारनाटक’ आदि हिनक रचना कहल जाइत अछि । तहिना विविध भाव—विषयक पदसंग्रह ‘गीतपंचाशिका’ सेहो उपलब्ध भेल अछि, जाहिमें भक्ति ओ श्रृँगारक अतिरिक्त बृद्धावस्थाक वर्णन, नवरसक वर्णन, विरहावस्थाक वर्णन संगृहीत अछि । हिनक किछु पंत्तिm एहि तरहक अछि ः—

कुसुम साजल सेज परिहर दूर, तोहे बिनु हृदयहोअए तसु झूर

जतन करए तुअ दरसन लाई, अविरल नयन नीर बहि जाई ।

अनुखन तोहर धरए धेयान, लए कुंकुम लिह तनु अनुमान ।

पए परि पुन पुन कर अनुताप, खन हँस खन रुस करए विलाप ।

नृप जगजोतिमल इहो सर गाय, दूति उकुति बुझ आठओ भाव ।

४. जगतप्रकाश मल्ल(शासन १६३७—१६७२) ः— हिनक अनेक मैथिली पद,‘पदसमुच्चय’, नानासंग गीतसंग्रह, ‘गीतपंचक’ अदिमें उपलब्ध अछि, विषयानुत्रmमें जे एहि प्रकारक अछि ः— १. भगवानक दशावतारक पद, २. विष्णुपद एवं ३. सदाशिवक पद । दरबार पुस्तकालयमे हिनक सात गोट नाटक सुरक्षित अछि, जाहि मध्य ओ मैथिली गद्यक बड़ सुललित प्रयोग कएने छथि । ओ नाटक सऽभ अछिः— ‘उषाहरण’, ‘नलीय नाटक(१६७०)’, ‘पारिजातहरण’, ‘प्रभावतीहरण(१६५६)’, ‘मलयगन्धिनी’, ‘मूलशशिदेवोपाख्यान’ एवं ‘मदनचरित’ । वस्तुतः जगतप्रकाश मल्लक समय मैथिली साहित्य—संगीतक उत्कर्ष नेपाल मध्य चरम सीमापर पहुँचि गेल छल आ एहि उत्कर्षमें हुनक महत्वपूर्ण योगदानक एहिसँ अनुमान कएल जाऽसकैया जे मध्ययुगीन इतिहासमे ओ ‘गन्धर्वविद्या—गुरु’ एवं ‘कविन्द्र’ नामे. प्रख्यात भेलाह । हिनक किछु पंत्तिm एहि तरहक अछि ः—

मोह ईसर कयल पितृ वनवास, तुअ पद पंकज मोरा आस ।

तिलक राख रताह तालक यति, बाम दिस नलय धरु मधुर जति

कान कुंडल अहि हाल मुण्डमाल ।

५. प्रताप मल्ल(१६४१—१६७४) ः— नरसिंह मल्लकबाद कान्तिपुरक राजा भेल, कवीन्द्र उपाधिसँ प्रख्यात प्रताप मल्ल पैघ विलासी छलाह । कूचबिहारक राजा वीरनारायणक पुत्री रुपमतिसँ, कर्णटकन्या राजमतीसँ, महुत्तरी राज्याधिपति कीर्तिनारायणक पुत्री लालमती आ अनन्तप्रिया, प्रभावती प्रभृतिसँ काएलगेल हूनक विवाह एकरा प्रमाणित करैत अछि । ओ संस्कृतज्ञ आ भाषाकविक संग—संग संगीत—नृत्य एवं तन्त्रादिक मर्मज्ञ सेहो रहथि । प्रताप मल्लक पदावली राष्ट«ीय अभिलेखालयमे सुरक्षित ‘गीतप्रतापमल्लीयम्’, ‘गीतागोविन्दम् प्रतापमल्लस्य’ आ ‘प्रतापमल्ल विरचित गीतम्’ प्रभृति गीतसंग्रहसबमे उपलब्ध होइत अछि । कान्तिपुरक तुलजाभवानीक मन्दिरमे उत्कीर्ण एकटा शिलालेखमे हिनक देवीवन्दना विषयक नौटा पद उपलब्ध होइत अछि जे उत्तम कवित्व आ प्रांजल भाषा—शैलीक दृष्टिएँ वस्तुतः हिनक ‘कविन्द्र’ उपाधिकेँ सार्थक बनबैत अछि । हिनक किछु पंत्तिm एहि तरहक अछि ः—

हेरह हरषि दूष हरह भवानि । तुअ पद सरण कएल मने जानि ।

मोय अति दीन हीन मति देष । नर करुणा देवि सकल उपेषि ।

कतनय करय सहस अपराध । तैअओ जननि कर वेदन बाध ।

परतापमल्ल कहए कर जोरि । आपद दूर कर करनाट किशोरि ।

६. श्रीनिवास मल्ल(१६५७—१६८५) ः— ललितपुर पाटन शाखाक कवि सिद्धिनरसिंहक बालक निवास मल्ल सेहो सुकवि छलाह आ मिथिलामे हिनक सुप्रसिद्ध प्रमाण ई अछि जे लोचनपर्यन्त अपन ‘रागतरंगिणी’ सन ग्रन्थमे हूनक पद उद्घृत कएलगेल । जगज्ज्योर्ति मल्लक पौत्र जगतप्रकाश मल्लक संग हिनक मैत्री छल से ‘मलय—गन्धिनी’क ‘ शिरिनिवास भूपतिशरण लेल जगतप्रकाश अति ताह सुख देला ।’सँ स्पष्ट होइत अछि । हिनक किछु पंत्तिm एहि तरहक अछि ः—

उपमिअ आनन नीज पंकज ससधर दिवस भलीने ।

भौहँ अनूपम अधर सोहाञोंन, नवपल्लव रुचि जीने ।।

सुन पेअसि की मोर, परल गरुअ अपराधे ।

वह मलयानिल जार कलेवर, न कर मनोरथ बाधे ।।

७. नृपमल्लदेव ः— ई निश्चित रुपमें कहल जाऽसकैय जे नृपमल्लदेव एक गोट प्रतिभाशाली सुकवि रहथि । जकर प्रमाण रुपमें हिनक एकटा विलक्षण पद ‘भाषगीत संग्रह’ आ एकटा ‘नेपाल—तालपत्र विद्यापति—गीत संग्रह’में सेहो उपलब्ध होइत अछि । रातिक चारिम पहरमे नायिकाकेँ विदा करबाक दूतीक वचन सुनि कविक निम्नलिखित उक्ति कतेक सरस आ अर्थ गर्भित अछि जे विशुद्ध मिथिलाभाषाक स्वभाविक शब्द —विन्यासमे श्रुँगारिक सहृदयताक मधुर अभिव्यक्ति कविक काव्यकुशलताक सूचना दैत अछि ः—

मल्लदेव नृप कैतय वचन सुनि तोहेँ दुति दुरमति जाती ।

ऐसनि प्रीति कैसे विघटाबह दुहु दिसँ दोगुन माती ।

८. रणजीत मल्ल(१७२२—१७७१) ः— भूपतीन्द्र मल्लक पश्चात् भक्तपुरक अन्तिम नरपति भेल रणजीत मल्लक समयमे सर्वाधिक संख्यामे नाटकक रचना भेल आ हिनकहि आश्रित भऽ काशीनाथ, धनपति, गणेश प्रभृति कवि —नाटककार साहित्य साधना कएलनि । हिनके पराजित कऽ पृथ्वीनारायण गोर्खा राज्यक विस्तार भक्तपुरधरि केलक ।

नेपालक अधिकाँश पदावली—साहित्य एखनहुँ धरि अप्रकाशिते अछि तेँ सर्वजन सुलभ नहि अछि । तथापि जएह किछु सामग्री अपलब्ध अछि ताही आधारपर एतऽ मल्ल राजा लोकनिक राज्याश्रयमे विकसित प्राचीन काव्य—धाराक रुपरेखा मात्र एतऽ प्रस्तुत अछि आ ताहूसँ मैथिली काव्य—साहित्यक हेतु नेपालमें उपस्थित ओहि स्वर्ण—युगक नीक जकाँ परिचय भेटि जाइत अछि । मुदा ई रुप—रेखा पूर्ण नहि कहल जाऽसकैत अछि ।


स्रोत मैथिली साहित्यक इतिहास

Monday, May 25, 2009

सांस्कृतिक संगम


सांस्कृतिक संगम
सभसं पहिल फ़ोटो देखियौ । वामकात बैसलि व्रती महिला काठमाण्डू रहनिहारि छैथ । हुनक नाम छन्हि ज्योति महर्जन(आब झा) । ओ बरसाइत पूजि रहल छैथ अपन जेठ ननैद अर्चना झा संग ।

मैथिली भाषा, संस्कृति, संस्कारसं दूर काठमाण्डुमे पलल बढल ज्योतिके बरसाइतक बियनि आ बरक पातके महत्व आब निक जका बुझल छन्हि । भलेहि ओ कहियो एहन ककरो करैत नई देखने रहैथ । तें आब घोघ तानिक'हुनका बरसाइत पुजैत देखि ककरो छुबुद्धि लगनाई अस्वभाविक नहि । अन्तरजातीय विवाह कएलाक बाद ज्योती आब मैथिली संस्कृतिसं पुरा तरहसं परिचित भ' गेल छैथ । मिथिलाक संस्कृति एहन अछि जे सभके अपनामे समेटिक' आगु बढैत अछि रहैया ।

पतिक दीर्घायुक कामना
पतिक दीर्घायुक कामना करैत रविदिन मिथिलान्चलक महिला बरसाइत (बट सावित्री) पाबनि पुजलनि। जनकपुरमे भोरेसं राममन्दिरक आगुके बड गाछलग स्त्रीगणक भीड लागल छल । ब्रातालु महिला भोरेसं नदी , पोखरिमे जा क' स्नान क' बरक गाछतर परम्परागत रुपसं पुजा पाठ कएलनि । मिथिलान्चलमे महिला बडड श्रद्धाक संग ई पावनि मनबैत अछि । सावित्री आ सत्यवानक जीवनगाथासं ई व्रत जोडल हएबाक कारणे अहिवातक लेल महत्वपूर्ण मानल गेल अछि । वरको गाछमे जल चढाओल जाइत अछि त नवका बांस आ तारक पंखासं वरके गाछके होंकल जाइत छै । व्रतालु स्त्रीगण एहि दिन प्रात: काल नित्यकर्म क' सासुर आनल कपडा लगा साथी संगीसभ संगे मंगलगीत गबैत वडक गाछके पूजैत अछि । व्रती महिला निष्ठापुर्वक गौरी आ विषहरके पूजा क' अन्त्यमे सत्यसावित्री तथा सत्यवानक कथा सुनैत अछि । एहि व्रतक एàतिहासिक महत्व रहलाक कारणे मिथिलांचलमे ई बहुत महत्व र विशेषता रखैत अछि । मैथिल स्त्रीगण अपन गाम ठामसं कोशो दुर रहितो परम्परागत रुपसं पुजैत छैथ ।

Thursday, May 7, 2009

हमसब कतऽ छी ?

मनोज झा मुक्ति
देश संघीयतामें जाएब प्रायः निश्चित अछि । सब भाषा—भाषी, जातजाति लोकनि अपन—अपन भषा—सँस्कृतिके जागरण करबामें जुटिगेल अछि । ताही अनुरुप मैथिली भाषीसब सेहो जागृत भेल छथि । मुदा ई एहि तरहक जागृति मात्र देखवामें अवैत अछि जे देखावाधरि बुझाऽरहल होए । मिथिला आ मैथिलीक नामपर किछु भेट जाए या राजनीति करैत रही ताइ तरहक काज मात्र भऽरहल अछि ।

ठीक छई, राजनीति केनाई कोनो खराब गप्प नई मुदा जाहि नामपर राजनीति करैत छी तकरा पूर्णरुपेण बिसरि जेनाई कतेक नीक बात । दोसर केलक तकरा मानब नई आ अपनेसँ करब नई, एहि तरहक सोंच सँ बाँचिरहल, अपनाके मात्र मैथिलीक ठिकदारी लेने जँका बात कएनिहारसबके अपन सँस्कार, अपन सँस्कृतिके याद कोना बिसरा जाइत छन्हि ? æहम नई करब त केओ नई करय, हमही मात्र मैथिलीक अभियानी आ दोसर केओ मैथिलीक काज करय त ढोंगी”, ताई तरहक दरिद्र मानसिकताक लोकसबके देखिकऽ एकटा मैथिलीक पुतके दुःख भेनाई स्वभाविक होइत अछि । प्रसँग अछि २०६६ सालक मैथिली दिवस अर्थात जानकी नवमीके ।

कोनहुँ मञ्चपर या कतौ मैथिली आ मिथिलाक काजप्रति अप्पन एकाधिकार मात्र रहल सन—सन मूर्खतापूर्ण सोंच रखनिहारके कि मैथिल आ मिथिलाके आदर्श, सीता बिसरा गेलनि ? जानकी नवमी अर्थात मैथिली दिवसके अवसरपर खास कऽ काठमाण्डूमें देखलगेल उदासीनता कि ई नई प्रष्ट करैत अछि जे ओ भाषण कयनिहारसब कतेक मिथिला आ मैथिलीप्रति सजग छथि ? ओऽत धन्यवाद देवाक चाही काठमाण्डूक शान्तिनगरमें स्थित मैथिल यूवा क्लवबलाकेँ जे अपन स्थापना कालहिँसँ प्र्रत्येक वर्ष जानकी नवमी अर्थात मैथिली दिवस मनवैत आएल अछि ।

ककरो गारि पढनाई या खोदवेद केनाइ सामान्य एवं सरलबात छई, मूदा केनाई ओतवे कठीन । जौं अपने नई कऽ सकैत छी आ कमसकम करऽवलाके सराहना नई करऽ सकैछी तहन आलोचनो त नई करियौ । हँ, कोनो काजक समीक्षा अवस्य होएबाक चाही जाईसँ आगादिनमे परिपक्वता अवैक, किया त कियो पेटेसँ सबकिछु सिखिकऽ नई आएल रहैत छैक ।
ओना हमरा सभमे एकटा अवगुण यहो अछि कि जे कियो भाषण करैत छथि हुनकरबात हमसब एक्कहीवेरमे स्विकार कऽलैत छी । हमसब कहियो ई बुझबाक कोशिश नई करैत छी जे ओ भाषण देनिहार अपना जीवनमे कतेक ताई बातके पालना करैत अछि ? संस्कार, सभ्यता आ सँस्कृतिके भाषण देबहीटा मात्रसँ ककरो नेता या अभियानी मानि ली ? या हुनकर काज एवं हुनकर जीवन पद्धतिके सेहो देखनाई जरुरी छई ? कि देशमें गणतन्त्र एहिलेल मात्र आएल छई जे जकरा जे मन लगै बजैत रहय, लिखैत रहय ? जौं वास्तविकरुपमे हमसब, खासकऽ मैथिल यूवासब ताहि तरहक प्रवृति रहल लोकके खुलेआम, सबहक बीचमें उदाङ्ग नई करबै त एहि तरहक ठग प्रवृति रहल लोकके मनोबल बढैत—बढैत समाज आ देशके मटियामेट होएव निश्चित अछि । æहम ई केने रही, हम ओ केने रही” ई माला मात्र जाप क कऽ अपन बराई अपने करबाक प्रवृतिके अन्त जाऽधरि नई होएत विशेष कऽ मिथिला आ मैथिलीक समृद्धि असम्भव अछि ।

एकर मतलव ई नहिं कि काज कयने लोकके सम्मान नई भेटवाक चाही से, जे कियो मिथिला आ मैथिलीकलेल कनियोटा काज केने छथि ओ सम्मानक पात्र छथि आ जे केओ कोनो छोट या पैघ काज मिथिलाकलेल करताह ओहो सम्मानक पात्र होएताह । æहम जौं कोनो तरहक नीक या खराब काज करब त ओकर सम्मान या दुत्कार हम अपने नई कि इतिहास करतै” ताईबातके मनन कऽ बुझनाइ जरुरी भऽ गेल अछि ।

जानकी या मैथिलीके अपन जननी, अपन प्रेरणाक श्रोत कहैत हमसब नई थकैत छी, मूदा सीता जयन्तिमे जानकीके हमसब बिसरि जाइत छी । जौ वास्तविकरुपमे आहाँ मिथिला आ मैथिलीक हितैषी छी त नयाँ मैथिल पुस्ता जिनका अपन सँस्कृतिके सम्बन्धमे नईं बुझल छन्हि हुनका बुझेवाकलेल, आन—आन समुदायक लोकमे अपन सँस्कृतिक महानता देखयवालेल हमरासबके पहिने अपना सभ्य आ सुसँस्कृत भेनाइ अति आवश्यक अछि । मिथिलाके प्र्रत्येक पावनि—तिहार, दिवस—समरोहके खुलारुपसँ मनावहिटा परत, जौं अपनाके अभियानी या मिथिलाक ठिकदारके दावी करैत छी तहन ।

एकटा सर्वसाधारण मैथिलके अपना राजीएरोटीसँ फुरसति नई छई आ ओसब अपना आपके ठिकदारो रहल दावी नईं करैत छथि । बातेसँ नईं अपन जीवनशैली आ अपन काजसँ देखावऽ परत जे कोन—कोन कारणे मिथिलाके अनदेखी कऽ कोनो सरकार या समुदाय नई जाऽसकैया ।

Monday, April 20, 2009

नेपाल रल्वेक दुरावस्था आ सरकारक कानमे तेल



महेन्द्र कुमार मिश्र

हमरा सब जकाँ भूपरिवेष्ठित मुलुकमे यातायातक चारि प्रणली मध्ये जल मार्गक विकाशकेँ कल्पना तत्काल केनाई सम्भव नहि । वायुमार्ग अति महग यातायातक साधन भेलाक कारणे आम नेपाली जनता, सर्वसाधारणकलेल सम्भव नहि अछि । सडक मार्ग आशा अनुरुप्नहियो होइत बहुतहद धरि निर्माणक पूर्वाधार तैयार करबाक चेष्टा अवश्य कऽलेलगेल अछि । अूदा विडम्वना केहन, विश्वक सबसँ सस्त, आरामदामयी, सुरक्षित एवं लोकप्रिय यातायात रेल्वेसेवा प्रणाली नेपालसँ विस्थापित होयबाक अवस्थामे अछि ।
इन्टरनेट एवं कम्प्युटरक युगमे जनसँख्याक वृद्धि भऽरहल अवस्थामे एकठामसँ दोसर ठाम शीघ्रातिशिघ्र पहँुचवाक आतुरता, ताहिक लेल रेलसेवा सनक आरामदायी आ सुरक्षित आधुनिक प्राविधिक सुसम्पन्न रेल मार्ग उपेक्षित एवं लावारीश अवस्थामे अछि ।

अखनो सँसारक दूर्लभ ईन्जन मार्टिनवर्नद्धारा निर्मित न्यारेगेज रेल्वे ईन्जन नेपालमे उपलब्ध अछि, मूदा संचालनमे नहि अछि । बेलायती शासनकालक रेल्वे ईन्जनसन १९३७, वित्रmम संवत१९९४ साल सँ संचालित सेवा आई पूर्णरुपेण उपेक्षित बनल अछि । बहुतो नेपाली जनताकेँ जानकारी नहि हैतनि जे नेपालोमे रेल संचालनमे छैक ।१९९०मे सर्वप्रथम सर्भे कऽ १९९२ सँ निर्माण काज प्रारम्भभेल विदेशकलेल काठ ढुवानीमे प्रयोग कायलगेल, जखन नेपालक हरियोवन समाप्त होबऽलागल तत्पश्चात ई रेल सेवा मानव सेवामे प्रयोग होवऽलागल ।

आजुक परिवर्तित अवस्थामे आवागमनक साधनकेँ रुपमे स्थापित भेल आजुक परिवर्तित अवस्थामे आवागमनक साधनकेँरुपमे स्थापित भेल । वैज्ञानिक युगमे अन्य विकशित देश अचम्भित सवकाश कएलक, भारतमे आजुक दिन सबसँ पैघ रेले मन्त्रालय छैक । भारतक आर्थिक् रीढक रुपमे रेल्वे स्थापित अछि । जापान, प्रmान्स आदि देशक रेल सेवामें आश्चर्यजनक प्रगति कएलक अछि ।
एक घण्टामे ४०० किलो मिटरक दूरी तय करैत अछि । भारतमे वेलायति साम्राज्यद्धारा रेलसेवा प्ररम्भ आ विस्तार भेल । प्रय ओही समय वि.सं. १९९४मे युद्ध शम्शेरक शासनकालमे नेपाल सरकार रेल्वे( एन.जे.जे.आर.) नेपाल जनकपुर जयनगर रेलसेवा आ (एन.जी. आर.) भारतक रक्सौल होइत वीरगँज अमलेखगँज तक साचालित रहै, मूदा बहुत पहिने सँ सेवा बन्द अछि । आब मात्र ५१ कि.मि. मार्ग जयनगर विजलपुरा सँचालित सेवा जनकपुर सा विजलपुरा, २०५९ साल अषाढ २३ गते आएल भिषण बाढिक प्रकोप सँ बिग्धी नदी पुल क्षतिग्रस्त भेने यहो रेल सेवा पूर्णरुपेण बन्द भऽ २९ कि.मि.मे मात्र सिमीत अछि ई सेवा । सरकारक अकर्मन्यता, लापरवाही तथा उपेक्षाक कारणे लोहाक लीक माटि सँ भरल अछि, घासपात जनमिगेल अछि, ठाम ठाम निर्मित यात्री प्रतिक्षालय सेहो ध्वस्त भऽरहल अवस्था छैक ।
रेलक जमीन सब सेहो अतित्रmमण मात्र नहि लिकेपर तरकारी बजार छानल गेल अछि, मूदा सरकार आ सम्बन्धित निकाय रेल प्रशासनक ध्यान एम्हर नहि देखल जा रहल अछि । वेर वेर जानकारी आ तथादा कएलाक बादो कोनो सुनवाइ नहि भऽरहल जनताक सिकायत रहल अछि ।

देशक ऐतिहासिक धरोहर एवं तराई मात्र नहि नेपालक गौरव रेलसेवा जीर्ण अवस्थामे अछि । बुमmना जाइत अछि जे यहि सेवाकलेल कोनो मायबाप नहि रहल । अखन धनुषा महोत्तरी धरि ई रेलसेवा सँचालित भेल अवस्थामे एहि मार्ग सँ जतेक यात्री आवत जावत करैत छल ताही अनुपातमे आन कोनो यातायात एवं सवारी साधन सा आवत जावत नहि होइत अछि जकर सत्य तथ्य यात्रीक सँख्या सँ पुष्टी होइत अछि । पर्यटनक युगमे रेलसेवा एनो उपेक्षित रहल ताहिसँ तराईवासीके जनमानसमे केहन भावना उत्पन्न हायत ?

असमान भेदवाभ सँ ग्रसीत मानल जाए की नहि ? आई जौं एहन छोट समस्या पहाड मे रहितै तहन की एहीना उपेक्षित रहैत रेल सेवा ? जनकपुरधाम धार्मिक् स्थल तथा पर्यटनकलेल आवऽबला यात्री मध्ये सर्वाधिक भारतिीय नागरिक रहैत अछि, एकदिनमे कमसँ कम पाँच छौ हजारक सँख्यामे यात्री आवत जावत करैत अछि । दूर्भाग्यवस महोत्तरी जिल्लाक मध्य क्षेत्रमे एकमात्र यातायातक साधन रेले अछि, ओहो अखन बन्द अछि । अन्य यातायातक सुविधा नइ रहल क्षेत्रक ई सेवा वन्द भेने जनजीवन कतेक प्रभावित हेतै तकर अनुमान सहजहिँ कायल जा सकैया ।

अशत्तm विमारी, उद्योगव्यापार, दैनिकजीवनक उपभोग सामग्रीक आभाव तथा त्रmय वित्रmयक समस्या सा एम्हरके जनमानस बहुत प्रभावित भेल अछि । प्राय प्रत्येकदिनक ई समस्याकेँ कारण रेलसेवा अभिषाप सिद्ध भऽरहल अछि । नयाँ नेपालक निर्मा०ँम्ै ज्ू६ल् द्यल् त्थ्ँ ज्न् प््रतिनिधि सबहक पूर्ण दायित्व होइत छन्हि, की त रेलसेवा फेर सा सञ्चालन कएल जाय या रेलसेवा बन्द कऽ वैकल्पिक मार्ग निर्माणमे ध्यान देथि । गणतन्त्रस्थापनाक महा अभियानमे एहि क्षेत्रक कम योगदान नहि रहल । राजनीति योगदान करऽबला बीर शहीदक पुण्यभूमि आई उपेक्षित अछि । आर्थिक योगदानमे सेहो रेलसेवा उल्लेखनिय काज बरबामे सहायक रहल अछि ।

दाता मित्र राष्ट््रक सरकार तथा जनप्रतिनिधिद्धारा रेलसेवा विस्तार आ सुव्यवस्थित करबामे उत्साहजनक आश्वासन सेहो भेटल,मूदा अखन धरि ई काज कियाक नहि सफल भऽरहल अछि ? भारतीय जनता, राजनीीत्क् द्यल्? स्म्ँीज्क् क्ँईकर्ता वेरवेर ई सवाल सदन सँ लकऽ सडक धरि उठा रहल अछि, भाषण एवं सार्वजनिक अभिव्यक्ति सेहो सँचार माध्यमसँ जानकारी भेट रहल अछि । तात्कालिन रेल मन्त्रि रामविलास पासवान, वर्तमान रेल मन्त्रि लालू प्रसाद यादवजेक अभिव्यक्ति सेहो सार्वजनिक भेल अछि कि जयनगर, जनकपुर, विजलपुरा होइत वर्दिबास धरि ब्रोडगेज रेलसेवा विस्तार कायल जाएत ।

भारतीय राजदूतावास सँ सेहो प्रस्ताव आएल कि जनकपुर विजलपुरा रेल्वेसेवा विस्तार कऽ काठमाण्डौ धरि महँुचाएल जाय तकरालेल नेपाल सरकारद्धारा प्रस्ताप पेश करओ आ ताहिमे भारत सरकार पूर्ण सहयोग करत । किछु साल पूर्व नेपाल भारत बीच रेलसेवा विस्तारक सन्दर्भमे बिना विष्कर्ष वार्ता भाग भेल एहि वार्ता सा पूर्वो एकटा वार्ता दिल्लीमे भेल छल । पहिल आ दोसर चरणक वार्तामे सहभागी सरकारक प्रधिनिधिक कथन अनुसार ई वैसार उपलब्धी मूलक रहल कुटनीतिक माध्यम सँ निष्कर्षमे पहँुचवाक मे दुनु पक्ष सहमत भेल ,मूदा आश्चर्यक बात जे एतेक वर्ष बित रहल अछि अखनधरिक ब्रोडगेजक बात छारिदी, सँचालित नेरो गेज लिंक आ ३ कडोर लागतक पूल निर्माण क कियाक नहि भऽरहल अछि ।

पंचायतकालमे सेहो जापान सरकार नेपाल रेलसेवाक विस्तार निर्माण प्रस्ताव रखने छलाह, हुनकर शर्त रहनि जे जापाने सरकारक रेखदेखमे ई काज हायत, मुदा कमिशनक कारणे ओ म्रस्ताव पतन भेल । एमाले सरकारक सभय तत्कालिन निर्माण तथा यातायात मन्त्रि भरत मोहन अधिकारी जनकपुर रेल्वे आ नेपालक विकाश विषयक गोष्ठीमे हुनकर अभिव्यक्ति छलन्हि, जे जनकपुरधाम सनक पवित्र स्थलक पर्यटकिय विकाशक लेल राष्ट््िरय सहमतिक आवश्यकता अछि । निकट भविष्यमे निर्माण तथा यातायात मन्त्रालयद्धारा जापान, भारत तथा प्रmान्स सरकार सपक्ष रेल्वेसेवाक आधुनिकीकरण एवं विस्तारकलेल लिखित प्रस्ताव पठायब जे प्रतिवद्धता जनौने छलाह ।

नेपाली काँग्रेसक मन्त्रिगणद्धारा वेरवेर निरीक्षण भेल ओ आशाजनक आश्वासन भेटैत रहल,मूदा समस्या अखनो यथावते अछि । अवस्था दयनिय अछि, पुरान भौतिक सँरचना, रेल्वे ट््रयाक,स्लीपर, इन्जनकोच तथा पूलसब जीर्ण अवस्थामे अछि । कर्मचारी व्यवस्थापन कमजोर रहलाक कारण रेल कम्पनीक आर्थिक अवस्था सेहो बहुत कमजोर अछि ।

हालहिमे नेपाल आ भारत सरकार बीच भेल सहमति अनुसार जयनगर सँ वर्दीबास धरि ७० किलोमिटर रेल्वेसेवा विस्तार करबालेल भारतक राइट्स नामक कम्पनि सन २००७ जुलाईमे सर्भे काज सम्पन्न कयलक अछि । तत्पश्चात भारतीय रेल सरकारक चीफ इन्जिनियर आ सहायक इज्निियर सबहक टोली पुन सर्वे काज सम्पन्न कयलक जे काजक पूर्णता देवऽमे कम सँ कम पाँच वर्ष लागत, मूदा प्रश्न अछि जे पाँच वर्षक अवधि धरि एहि क्षेत्रक अवस्था कि हायत ? यहि अवस्थाके ध्यानमे रखैत नेपाल सरकार तत्काल सँचालित लीक आ पूल निर्माण क रेल सँचालन मे आवओ ।

बहुत प्रयासकबाद अर्थमन्त्रि ११ कडोर रुपैया देवाक निर्णय कयलथि । यहि प्रयासमे यातायात मन्त्रिक पूर्ण सहयोग रहलन्हि, मूदा ११ कडोर रुपैया भऽ की रहल छैक ? ११ कडोर मध्ये ५ कडोर जनकपुरसँ पूर्व आ ६ कडोर जनकपुर सँ पश्चिम बिजलपुरा धरिक मर्मत निर्माणकलेल छुटियाओल गेल छल तथापि अखन धरि काज प्ररम्भक गँधधरि नहि आबिरहल अछि ।

यातायतक प्रणलीमे रेलसेवा एकटा एहन प्रणली प्रमाणित भेल अछि । जे जतेक लम्बा खूरी धरि विस्तार करय ततवे वेसी आरामदायी हायत आ सँगहि ओतवे आमदानी होयवाक निश्चित अछि । सामान ढुवानी, यात्री आवत जावतमे राजश्ववृद्धिक सँगहि रोजगारीक अवसर सेहो प्राप्तक साथसाथ आहि क्षेत्रक सर्वाङ्गीन विकासक पूर्वाधार सुनिश्चित रहत । रेल्वेसेवा त्रmमश रुपान्तरीत होइत संस्थानसँ कम्पनिमे परिणत भेल ई स्वायत्तता प्रप्त कम्पनिमे सात मन्त्रालयक शेयर अछि, मनोमानी ढँगसँ बिना मूल्याङ्कन कयल जायत त कैयक असबके सम्पति छैक । कम्पनि चाहे त अपने बलबूत्तापर रेलसेवा सँचालन कऽ सकैत अछि ।

एकटा सक्षम व्यवस्थापन, पारदर्शिताक आवश्यकता छैक । आशा राखी लोकतान्त्रिक सरकार एहि शुभकाजमे सहयोग करय, नहि त वोहि क्षेत्रक जनता आब हाथ पर हाथ धऽ बैसल नहि रहत आ देसर विकल्पक खोजीमे जुटत, जकर परिणाम सरकारमे सहभागी दल एवं सरकारके भोगहिटा परतैक ।

अवैद्य नागरिकताः सिक्कमीकरणक प्रयास
मनोज झा मुक्ति

नेपालमे नागरीकता वितरण बहुतो वर्ष पहिने सँ चर्चित विषय बनल अछि । खास कऽ पहिल मधेशवादी दलक रुपमें जानल जाइत नेपाल सदभावना पार्टी अपन स्थापने कालसँ नागरीकताके अपन प्रमुख मुद्दाक रुपमे रखैत आएल छल । प्रजातन्त्रक आगमनकबाद २०४८ सालमे बनल सरकारक समयमे सेहो नागरीकताक प्रश्न सदन गर्मओने छल ।सदभावना पार्टीक अडान रहैक बहुतो मधेशी जनता नागरीकतासँ बञ्चित अछि, सबके नागरीकता देल जाए । सदभावना पार्टीक एहि अडानपर जनमोर्चा लगाएतक दलसब एकरा भारतक विस्तारवादी नीति कहैत विरोध करैत छल । हूनकर सबहक कहब रहैनि जे मधेशीसबके नागरीकता दऽदेलासँ नेपाल सिक्कमीकरण भऽ जायत ।

जनआन्दोलन २०६२÷०६३ सँ पहिने सेहो नागरीकता वितरणकलेल आयोग सब बनैत रहल, अपन प्रतिवेदन बुमmवैत रहल । कोनो बेर जौं नागरीकता देलोगेल त æसबै भारतीयहरुलाई नागरीकता दियो, देशमा अब विखण्डन हुन्छ” कहैत, रिट दायर कऽ मधेशमे देल जाचुकल नागरीकताके बदर सेहो कराओल गेल ।

एकटा विदेशी नागरीकके नेपालक नागरीकता देनाई वास्तवमे बहुत बडका षडयन्त्र होइत छैक, देशक हीत विपरीत काज होइत छैक । देश हीतक विपरीत काज कयनिहार ककरो नईं छाडल जएबाक चाही । ताहुमे नागरीकता सन सँवेदनशील विषयमें त सबहक नजरि रहब ओतबे जरुरी होइत छैक । मुदा जोर जोरसँ गरजनिहार सबहक मानसिकता एहिबेरक नागरीकता वितरणक समयमे देखागेल । नागरीकता वितरणक तथ्याँक अनुसार लगभग २४ लाख नागरीकता समुच्चा देशमे वितरण कायलगेल । जाहिमे लगभग ११ लाख तराई मधेशमे आ १३ लाख पहाड हिमालमें । कि वास्तवमें नागरीकता प्रप्त केने चौबिसो लाख व्यक्ति नागरीकता लेबाक हकदार रहथि ? ई एकटा पैघ प्रश्न अछि । हँ सदनमे बहुत हँगामा कायलगेल, अपनाके देशक ठिकदार कहनिहार देखावटी देशभक्त पार्टीसबद्धारा । अहु हँगामा सबहक एकहिटा कहब छल जे तराई मधेशमे सबटा भारतीय सबके नेपाली नागरीकता द कऽ देशके सिक्कमीकरण करबाक तैयारी कायल जाऽरहल अछि । मुदा कि नागरीकता वितरण कयनिहार अधिकारीमे कएटा व्यक्ति तराई या मधेशी मूलक रहथि ? आँगुरपर गनल जा सकैया । अवैद्य रुपसँ वितरण कायलगेल नागरीकता मधेशक विरोधमें बहुत पैघ षडयन्त्र अछि । मधेशमें जाऽक गैर मधेशी अधिकारीसबद्धारा जे किछु मात्रामे विदेशी सबके मोटगर पाई ल कऽ नागरीकता वितरण कायलगेल अछि से मधेशीसबके अपने धर्तीमे गुलाम बनयबाक चालि अछि । एकर दू टा पक्ष अछि, जौ नागरीकता लेने विदेशी भुख्खे मरत त उदारवादी मधेशी अपनो हिस्साक भोजन देबऽमे पाछा नई रहत, आ मानसिक एवं शारीरिक यातनाक पीडा मmेलैत रहत । जौ पाइके बलपर नागरीकता लेने कोनो धन्निक विदेशी गाममे रहत त गामक जिमदार बनिकऽ सबके फेरसँ कमैया बनालेत जेना पश्चिमी तराई मधेशमे थारु सबके पहाड सँ विस्थापित पहाडी सबद्धारा कमैया बनालेल गेल । ताएँ एहि बातपर मधेशीसब सचेत रहथि आ विदेशी सबके नागरीकता लेबऽसँ सकभर रोकलथि । मुदा तैयो पाइयक भुखल आ द्धेष भावनासँ कुटिकुटिकऽ भरल गैर मधेशी अधिकारीसबद्धारा मधेशोमे किछु नागरीकता अवैद्यरुपसँ वितरण कायलगेल ।

दोसर दिश पहाड आ हिमालमे जे जनसँख्यो सँ बेसी नागरिकता वितरण भेल ताइके विषयपर सदनमे ककरो बकार धरि नहि फुटल । कत चलिगेल ओई देशभक्त नेता सबहक देशभक्ति ? ई अहिने प्रष्ट कऽदैत अछि जे ओइ खोखला देशभक्तसबक नियति, ओसब कि चाहैत अछि, आ कत सँ सञ्चालित अछि ?

वास्तवमे अवैद्य नागरीकता वितरण क कऽ नेपालके सिक्कमीकरण करबाक प्रयाश सोंचल सममmलरुपमें शुरु भऽगेल अछि । नेपालमे लाखोके सँख्यामें तिब्बती, भुटानी आ भारतीय(दार्जिलिङ्ग) नागरीकके नागरीकता द कऽ वैद्य नागरीक बनयबाक खेल शुरु भऽगेल अछि, आ तकरा सब मधेश विरोधी मानसिकताक लोक भितरिया मोन सँ स्वागत करैत गदगद भऽ रहल अछि । एकर कारण एक्कहिटा अछि जे नागरीकता लेनिहार तिब्बती, भुटानी आ भारतीय(दार्जिलिङ्ग) लोकके मुँहकान आ प्रायःके भाषा नेपालक ओइ बेतुक्का देशभक्त नेता सबसँ मिलैत जुलैत अछि । ई सिक्कमीकरण नईं त कि अछि ? देशक सम्पूर्ण सचेत नागरीकके सोंचबाक चाही ।