Saturday, October 10, 2020

देशमे व्याप्त संस्थागत भ्रष्टाचार ः बाजत के ? (भाग–२)

   देशमे व्याप्त संस्थागत भ्रष्टाचार ः बाजत के ?

(भाग–२)

–मनोज झा मुक्ति

अपना देशमे भ्रष्टाचार कतेक अछि ? कोना होइत अछि ? ई प्रश्न जौं किनकोसँ कएलजाए त उत्तर की भेटत से कहवाक बात नहि । हँ भ्रष्टाचार कोना होइत अछि से सर्वसाधारण मेसँ बहुत कमेके बुझल हैतन्हि । आश्चर्यक बात त ई अछि जे भ्रष्टाचारक खेती कएनिहार भ्रष्टचार निर्मूल करवाक बात करैत अछि । भ्रष्टाचारे भ्रष्टाचारसँ भरल एहि देशमे उदाहरणक कमी नहि अछि । देशक अधिकांश लोक कोनो ने कोनो तरहें भ्रष्टाचारमे लिप्त अछि । फर्क एतवा अछि जे कियो कम त कियो बेसी ।

गामक एकटा पान दोकानपर पान खएवाकलेल पहु्ँचलहुँ । पान लगएवालेल दोकानदारके कहि ठाढ छलहुँ त हमरासँ पहिनेसँ दोकानपर ठाढ  दूगोटे अनचिन्हार लोक ओतऽ बातचीतमे लीन छलाह । पानक प्रतिक्षामे बैसल हमर ध्यान ओहि दूनुगोटेक बातपर गेल । दूनुगोटे भ्रष्टाचारक सम्बन्धमे बात करैत छलाह । बात होइत छल विद्युत कार्यालयक सन्दर्भमे । सम्भवतः ओहिमेसँ एकटा विद्युत कार्यालयमे नोकरी कएनिहार रहथि आ दोसर हुनक कोनो सरकुटुम्ब जकाँ बुझाइत छलाह । हुनका सबहक बातचितक आधारपर भ्रष्टाचारक एकगोट संस्थागत नमूना हम प्रस्तुत कऽ रहल छी ।

देशक जनताके सुविधाकलेल विद्युत कार्यालयके स्थापना भेल अछि । देशक प्रत्येक गामघरमे विजुली पहुँचै आ विजुली वापतके राजश्व सरकारके असुली होइ से विद्युत कार्यालयके मुख्य काज अछि । कोनो गाममे विद्युतके पोल पहु्ँचएवाक होइ या कोनो घरमे मिटर लगबावऽके एहिमे खुलेआम भ्रष्टाचार कएल जाइत अछि आ बाजऽबला केओ नई अछि । अपना घरमे मिटर लगएवाकलेल कतेकोबेर कार्यालयके चक्कर लगबऽ परैत छैक । कार्यालयक चक्कर लगौलाकबाद सम्वन्धित कर्मचारीके बिना किछु लेने देने काज होएव बहुत मुस्किल अछि । कोनो गाममे या व्यक्तिगतरुपसँ विद्युत पोल लेवाकलेल त आरो मोस्किल अछि आ ठाहाठाही भ्रष्टाचार । एक त बहुत सोर्सफोर्स आ अनुनय विनयसँ पोल भेटैत छैक । कार्यालयसँ सम्बन्धित स्थानपर लऽजएवाकलेल सरकारेदिससँ पोल ढोआनीक पाइ देवाक या सम्वन्धित स्थानपर कार्यालयद्वारा पहुँचयवाक नियम छै । मुदा, अधिकांश जनताके अपने पाई खर्चकऽ पोल लऽजाय परैत छैक । केओ पोल ढोआनीक पाईके चर्चाधरि नई करैत अछि आ कार्यालयक कर्मचारीके कहवाक कोनो प्रश्ने नहि । कोनो नेता टाइप जनता जौं एकर चर्चा कएलक त ओकरा पोले लेनाइ कठीन भऽ जाइत छैक । अर्थात अधिकांश जिल्लामे विद्य्ुत पोलक ढुवानीक रकम शतप्रतिशत कार्यालयक हाकिम आ कर्मचारीमे बँटाजाइत अछि । दोसर पोल जहन सम्वन्धित स्थानपर पहुँचि जाइत अछि त पोल गारवाक जिम्मेवारी विद्य्त कार्यालयके होइत छैक । मु्दा पोल गारवाक काजमे खटनिहार प्राविधिक सम्वन्धित स्थानक जनतासँ भोजनक जिम्मेवारी त निर्वाह करवितेटा छैक, उपरसँ दक्षिणाक अभिलासा सेहो रहैत छन्हि । दुनुगोटाक गप्प जारिए छल, मुदा हमरा हडवडी भेलाक कारणे हम पान खाइत ओतऽसँ चलैत बनलहुँ ।

जनताके काज सुलभ तरिकासँ भऽजाई, जनतासँगे कोनो प्रकारक धोखा नई होइ ताहिलेल कार्यालय सबके निगरानी करवाकलेल जिल्ला–जिल्लामे सि.डि.ओ. कार्यालयक स्थापना कएलगेल अछि, जकरा पुर्ण अधिकार सम्पन्न बनाओलगेल छै । मुदा जहन स्वयं जिम्मेवार व्यक्तिए जौं ओहिमेसँ कमिशन लैत हो त जनता कतऽ जाएत ? विद्युत कार्यालय त एकटा छोटछिन नमूना मात्र अछि, अपना देशक कोनो निकाय नहिं अछि जे भ्रष्टाचारसँ अछुत हुए । ओना जाहि कार्यालयके खोजबिन करऽलागु, वएह कार्यालय या कहु वएह पेशा भ्रष्टाचारक अग्रणी स्थानमे देखाइ देत ।

गमघरमे एकटा कहवी छैक जे,‘पञ्चैतीमे झूठ नईं बजवाक चाही आ अदालतमे साँच नई बजवाक चाही ।’ जहने कहवी छैक त आइएसँ नई होएतै । ई कहवी कतेक सत्य छै या कि झूठ से प्रायसबलोक नीकजका बुझैत छी । जहन जे न्याय देवाक अधिकारी छै या कहु जतऽ न्यायक वास्ते जनता जाइत अछि ओतहि पाइयक बलपर मुद्दा फैसला होइ, ओहि देशमे आन आन कार्यालय आ आन आन पेशाक लोकसँ कि अपेक्षा कएल जासकैय ? कि ई बात निचासँ उपर तकके लोकके जानकारी नईं छै, जौं छई तहन मौनता किया ? के बजतै ?

सब पेशा आ कार्यालयमे भ्रष्टाचारक बात निचासँ उपरधरिक लोकके नीक जकाँ बुझल छैक, मुदा सबकेसब मौन रहि भ्रष्टाचार संस्कृतिके बढावा द रहल अछि । कानून त भ्रष्टाचार विरोधी बनले अछि, किछु भ्रष्टाचारीपर कारवाहीक बात सेहो सुनाइ दैत अछि, कि एहिसँ भ्रष्टाचार रुकतैक ?

जाधरि प्रत्येक मनुष्य भ्रष्टाचारके स्वयम् अपने मनसँ नई नकारत ताधरि ई सम्भव नहि बुझि पडैत अछि । ताँए अपन निश्चित मृत्युके प्रत्येक दिन जौं याद कएल जाए त लोकके मनसँ भ्रष्टाचार समाप्त होएत की ?

 

देशमे व्याप्त संस्थागत भ्रष्टाचार ः बाजत के ?

  देशमे व्याप्त संस्थागत भ्रष्टाचार ः बाजत के ?

–मनोज झा मुक्ति

अपना देशमे भ्रष्टाचार कतेक अछि ? कोना होइत अछि ? ई प्रश्न जौं किनकोसँ कएलजाए त उत्तर की भेटत से कहवाक बात नहि । हँ भ्रष्टाचार कोना होइत अछि से सर्वसाधारण मेसँ बहुत कमेके बुझल हैतन्हि । आश्चर्यक बात त ई अछि जे भ्रष्टाचारक खेती कएनिहार भ्रष्टचार निर्मूल करवाक बात करैत अछि । भ्रष्टाचारे भ्रष्टाचारसँ भरल एहि देशमे उदाहरणक कमी नहि अछि । देशक अधिकांश लोक कोनो ने कोनो तरहें भ्रष्टाचारमे लिप्त अछि । फर्क एतवा अछि जे कियो कम त कियो बेसी ।

चाह दोकानपर चाहक चुस्की लैत छलहुँ कि दूगोटे अनचिन्हार लोक ओहि दोकानपर पहँुचलाह आ चाह देवाकलेल दोकानदारके कहलखिन्ह । चाह पिवैत हमर ध्यान ओहि दूनुगोटेक बातपर गेल । दूनुगोटे भ्रष्टाचारक सम्बन्धमे बात करैत छलाह । बात होइत छल प्रहरीक सन्दर्भमे । सम्भवतः ओहिमेसँ एकटा प्रहरीमे नोकरी कएनिहार रहथि । हुनका सबहक बातचितक आधारपर भ्रष्टाचारक एकगोट संस्थागत नमूना हम प्रस्तुत कऽ रहल छी ।

समाजमे सुरक्षाक जिम्मेवारी, शान्ति सुरक्षाक जिम्मेवारी प्रहरीके दायित्व होइत छैक आधिकारिक रुपसँ । ककरोप्रति अन्याय नईं होइ अर्थात सबके न्याय भेटैक ताहिलेल सरकारद्वारा न्यायालयके व्यवस्था कएलगेल अछि । प्रहरीके ठगी,चोरी,जालसाजी, गुण्डागर्दी लगायतक काज रोकवाक जिम्मा होइत छैक । जहन प्रहरी अपने एहिकाजसबमे संलग्न होइ, तहन जनताक एहि तरहक समस्याके समाधान के करत ? प्रायः प्रहरी चौकीक काज कहुनाकऽ पाई उठाबिकऽ एस.पी.के देवाक काज लगभग लगभग संस्थागत भऽ गेल छैक । जौं कोनो चौकीसँ समयपर सकारलगेल रकम प्राप्त नई होइत छैक त ओहि चौकीक प्रमुखके जगेडा अर्थात जिल्लामे तानि लेल जाइत छैक आ ओकरा स्थानपर नयाँ चौकी प्रमुखके पठाओल जाइत छैक जे निश्चित समयपर रकम उगाही कऽ कऽ एस.पी.कार्यालयमे बुझबै चाहे जतऽसँ बुझवौक । ई बात पूर्णरुपें संस्थागत भऽगेल छैक । एकटा प्रहरी जवानसँ लऽकऽ प्रहरी मुख्यालयधरि ई काज होइत अछि, जे स्वयम् एहिकाजमे लागल होई ओ केना एकरा हटएवाक बात करत ? प्रहरी कार्यालय त मात्र एकटा उदाहरण अछि । अपना देशक कोनो निकाय नहिं अछि जे भ्रष्टाचारसँ अछुत हुए । ओना जाहि कार्यालयके खोजबिन करऽलागु, वएह कार्यालय या कहु वएह पेशा भ्रष्टाचारक अग्रणी स्थानमे देखाइ देत ।

गमघरमे एकटा कहवी छैक जे,‘पञ्चैतीमे झूठ नईं बजवाक चाही आ अदालतमे साँच नई बजवाक चाही ।’ जहने कहवी छैक त आइएसँ नई होएतै । ई कहवी कतेक सत्य छै या कि झूठ से प्रायसबलोक नीकजका बुझैत छी । जहन जे न्याय देवाक अधिकारी छै या कहु जतऽ न्यायक वास्ते जनता जाइत अछि ओतहि पाइयक बलपर मुद्दा फैसला होइ, ओहि देशमे आन आन कार्यालय आ आन आन पेशाक लोकसँ कि अपेक्षा कएल जासकैय ? कि ई बात निचासँ उपर तकके लोकके जानकारी नईं छै, जौं छई तहन मौनता किया ? के बजतै ?

जिल्ला स्तरमे सिडियो कार्यालयमे आम जनताक काज सबसँ बेसी पडैत छैक । सि.डि.यो. जिल्लाक सबसँ पैघ, शक्तिशाली आ जिम्मेवार अधिकारीक रुपमे मानल जाइत छैक । कोनो काज जौं जल्दिए करेवाक अछि त अपनासँ प्रायः सम्भव नहि अछि । अधिकांश सिडियो कार्यालयक बाहर लेखनदास एजेन्टकरुपमे काज करैत अछि । पासपोर्टक सन्दर्भमे चाहक चुस्की लैत ओसब गप्प करैत छलाह जे सेवाग्राहीसँ लेखनदास एक हजार टका कर्मचारीके देवाक बात करैत अछि, लेखनदास सेवाग्राहीक सोझेमे रकम उठौनिहार कर्मचारीके दैत अछि आ सेवाग्राहीक काज तुरत्त भऽजाइत छैक । जहन कार्यालय समय समाप्त भऽजाइत छैक त कर्मचारीद्वारा एजेन्ट लेखनदासके दूसय टका कमिसन वापत फीर्ता देल जाइत छैक । जहन जिल्लाक सम्पूर्ण जिम्मेवारी लऽ कऽ आएल सिडियो स्वयम् एहि तरहे सशुल्क सेवामे संस्थागतरुपसँ लागल अछि त जनता अपन फरियाद लऽ कऽ कतऽ पहुँचत ? कि ई बात कोना गृह मन्त्रालयक हाकिमसबके नईं बुझल छैक ? जौं सबके ई बात बुझल छैक त एकरालेल बजतै के ?

हमर चाह त खतम भऽगेल छल, मुदा भ्रष्टाचार खिस्सा सुनवाकलेल पुनः एकटा चाहके अर्डर दऽ हम ओहि दूनुगोटेक गप्पदिस कान थपने रहलहुँ । देशक कर्णधार रहल नेताजी सबहक भ्रष्टाचारक बहुत खिस्सा त सुनने छलहुँ, मुदा ई खिस्सा हमरा लेल नितान्त नव छल ।

प्रायः जिल्लामे किछु नेताजीसब प्रहरीसँ ढिठ्ठे अपन हिस्सेदारी माँगल करैत छथि । जेना कोनो जनताके काज लऽ कऽ जहन कोनो नेताजी एस.पी. कार्यालय या सिडियो कार्यालयमे जाइत छथि त हूनकर कमिशन पाकि जाइत छैक । ओहि लफडामे प्रहरी जे लेनदेन करैत अछि ओहिमेसँ नेताजीके हिस्सा देबहि पडैत छन्हि । नेताजीसब अपन कमिशन वापतके रकम पएवाकलेल तगादा करवासँ सेहो पाछा नई रहैत छथि । एहि तरहे भ्रष्टाचार व्याप्त अछि सगरो । सब पेशा आ कार्यालयमे भ्रष्टाचारक बात निचासँ उपरधरिक लोकके नीक जकाँ बुझल छैक, मुदा सबकेसब मौन रहि भ्रष्टाचार संस्कृतिके बढावा द रहल अछि । कानून त भ्रष्टाचार विरोधी बनले अछि, किछु भ्रष्टाचारीपर कारवाहीक बात सेहो सुनाइ दैत अछि, कि एहिसँ भ्रष्टाचार रुकतैक ?

जाधरि प्रत्येक मनुष्य भ्रष्टाचारके स्वयम् अपने मनसँ नई नकारत ताधरि ई सम्भव नहि बुझि पडैत अछि । ताँए अपन निश्चित मृत्युके प्रत्येक दिन जौं याद कएल जाए त लोकके मनसँ भ्रष्टाचार समाप्त होएत की ?


अपन टेटर कहिया देखब ?


 अपन टेटर कहिया देखब ?

                     — मनोज झा मुक्ति

    अखुनक परिवेशमे ककरोसँ पुछियौक देशक अवस्था केहन अछि ? त, कहता कि कहू सभ ठाम भ्रष्टाचारे भ्रष्टाचार व्याप्त अछि । देशक नेता भ्रष्ट, कर्मचारी तन्त्र भ्रष्ट, पत्रकारिता जगत भ्रष्ट, व्यापारी भ्रष्ट...आर किदन किदन...सभचीज भ्रष्टे भ्रष्ट, तहन देशक स्थितिके कि कहबैक...।

    देशक स्थिति निश्चितरुपेण नीक त नहिंए अछि, मुदा एकर दोषी के ? सभ जौं भ्रष्टाचारिए अछि त नीक व्यक्ति केओ नहिं ? आ देशक जनता कि दूधक धोएल अछि ? सबकेँ एकवेर अपना छातीपर हाथ राखिकऽ सोंचहिटा पड़त । आखिर किया देशक हालति एहि तरहें दिनानुदिन खसकैत जाऽरहल अछि ?

     देशमें सब तरहक लोक हाएव कोनो आश्चर्यक गप्प नहिं । सबहक कहब ई छन्हि जे सभक्षेत्रमे भ्रष्टाचारीए लोकक चलाचल्ती छैक । अईसँ असहमत बहुत कम्मेगोटे हएता । मुदा यहो सत्ये छैक जे सत्यक बाटपर धिरे—धिरे आगा ससरैत लोक सेहो अई देशमे अछि । हँ, सत्यवादी धारमे लागल खाँटी राष्ट्रवादी सभक सँख्या बहुत कम अछि आ दिनानुदिन ओहि सँख्यामे ह्रास होइत जाऽरहल अछि । तकर कारण कि ?

     जौं स्पष्टरुपसँ कहल जाए त देशक एहि परिस्थितिक जिम्मेवार आन केओ नहिं, हमहि आँहाँ छी । हमही आँहाँ देशक नेताके, व्यापारी आ कर्मचारीकेँ भ्रष्टाचारी बनावि रहल छियैक ।

      हम आँहाँ एकटा नेताके भ्रष्टाचार करबालेल विवश कऽ दैत छियैक । जौं गाममे एकटा कोनो नेता साइकलपर चढिकऽ अवैत अछि या पैदल अवैत अछि त ओकरा देखबाकले कोना जनता नहिं जाइत छियैक । एतवे नहिं ओई नेताके अपना दरबज्जापर बैसऽदेवमें सेहो हमसब अपनाआपके हीन महशुस करैत छी । आ हमरे आँहाँक गाममे जौं एकटा नेता महँग गाड़ीमे चढिकऽ अवैत अछि त ओकरा पाछा या कहु स्वागत करबाकलेल माइए पुते दौड़ैत छियैक, ओकरा अपना दरबज्जापर बैसबऽमे हमसब अपनाके गर्वान्वित भेल अनुभूति करैत छी । चुनावक समयमे कतबो सकारात्मक साेंंचवला नेता किएक नहिं हुअए ओकरा भोंट देवाक बदलामें हमसब मतपत्रमे अपन जातिक उम्मेदवारके चिन्हमे मोहर लगवैत छी । ओतवे नहिं अपन मतक महत्वके बुझितो हमसब अपना मतके पाई लऽ कऽ बेचि दैत छियैक जकर कारणसँ जकरालग अपन जातिक जनसँख्या वेसी अछि आ वेसी पाई अछि वएह नेता चुनाव जितैत अछि । कि हमर आँहाँक एहि तरहक व्यवहार एकटा नेताकेँ भ्रष्ट बनवाकलेल विवश नहिं करैत छैक । जौं जातिक नामपर केओ जितैत अछि त ओ अपना जातिक वाहेक आन जनताके वारेमे किया सोंचत ? आ अपना जातिकलेल सेहो किछु नहिं कऽसकैया, कियाक त ओ ई नीक जकाँ बुझने रर्हैत अछि जे अपना जातिकलेल हम काज नहिंयो करब तखनो हमर जाति हमरा भोंट देबेटा करत । आ ओ जे पजेरोबला नेता आ पाईबला नेताक तुलनामें अपनाके निरीह बुझैत अछि, ओहो हमरा आँहाँक सामिप्यता पएवाकलेल आ चुनाव जीतवाकलेल पाईएके अपना जीवनक सभसँ पैघ लक्ष्य बुझि ‘एनि हाउ, पाई कमाऊ’ के नीति अवलम्वन कऽलैत अछि । आ जखन ओ पाइएक बलपर हमरआँहाँक भोट लेत त किया  हमरा आँहाँक विकासकलेल ओ सोंचत ? 

      तहिना देशक कर्मचारिके हमही आँहाँसब अपन काज जल्दीसँ जल्दी करेबाकलेल या कानूनन नहिंयो होबऽवला काज गैरकानूनन रुपसँ करेबाकलेल घुस देल करैत छियैक आ एहिं तरहें एकटा कर्मचारीकेँ जवरदस्ती हमसब भ्रष्टाचारी बना दैत छियैक । ओनो कर्मचारीयो खासकऽ एकटा पुलिसमे जेबाकलेल हाकिम एकलाख टका लेल करैत छैक, हाकिमके डाइरेक्टर बनेवाकलेल मन्त्रीद्वारा लाखो रुपैया घूस लेल जाइत छैक । जहन ओ कर्ज पैंच  लऽ कऽ बहाल भेल रहैत छैक त कोनो बहन्ने कमेबेटा करतैक ।

     एकटा व्यापारीकेँ काला बाजÞारी करबामे सेहो हमसब अपने बहुत बेसी दोषी छी । हमसब बुझितो रहैत छि तइयो ओकर विरोधमे बजबाक हिम्मत नई करैत छियैक ? हमरा आँहाँलेल के बाजि देत ? ककरो लग ओतेक फुरसति नहिं छैक ।

     हमसब सबके भ्रष्टाचारी त कहैत छियैक, मुदा अपन टेटर नहिं देखैत छी । सरकार अपन गाम अपने बनाबु कहिकऽ प्रत्येक गाममे १५ सँ ३० लाखधरि रुपैया प्रतिवर्ष देल करैत अछि । गामक विकास कतेक भेल छैक, विशेषकऽ मधेशमे से ककरोसँ छुपल नहिं अछि । सभ पार्टीक प्रतिनिधिसब अपन बपौटी(पैतृक) सम्पति बुझि खुलेआम लुटैत अछि आ हम आँहाँ मौन भऽ सबकिछु देखैत रहैछी । जौं कियो व्यक्ति ओइ काजक विरोध करैत छैक त हमहि आँहा केओ पार्टीक नामपर, केओ जातिक नामपर ओहन भ्रष्टाचारीके दूधक धोएल बनाऽदैत छियैक । ओहन भ्रष्टाचारीकलेल पार्टीयोसब अपन प्रतिष्ठाधरि दाओपर लगा दैत अछि ओकरा बँचवऽमें । एकरा अरिक्त जे किछु कोनो गामठाममे जौं छोटछीन विकासक काज होइत अछि त ओकरा विनाश करबामें हमसब बहादुरी बुझैत छी । अपना घरक अगााक सडकपर राखलगेल ग्राभेलक पाथर अपना घरमे घुसियाबऽमे त हमरा सबके जोरा सम्भवतः कतौ नहिं भेटत । 

     एतेक धरि कि सरकार विद्यालयसबके व्यवस्थित करबाकलेल अपनेगामक स्थानिय व्यक्तिक अनुसारे चलेवाकलेल विद्यालय व्यवस्थापन समीतिके निर्माण योजना लाबि प्रायः सभ विद्यालयके समुदायमे हस्तान्तरण केलक, मुदा विद्यालय व्यवस्थापन समिति अखन मात्र   पाई कमेबाक एकटा स्थलक रुपमें परिणत भऽगेल अछि । चाहे विद्यालयमे शिक्षकक रखबामे होय या शिक्षककेँ सरुवामें हुए, विशेष कऽ मधेशक प्रत्येक विद्यालय व्यवस्थापन समीतिसभ एहि तरहक व्यापारमें लागिगेल अछि । विद्यालयक पढाई केहन छैक, शिक्षक विद्यालयमें अवैत अछि कि नहिं, विधार्थी अवैत अछि कि नहिं ताहिसँ व्यवस्थापन समीतिके कोनो मतलव नई रहल देखल जाऽरहल अछि ।

     एहि तरहें देशक विकास कोना होएत ? जाधरि हमसब अपने नहिं सुधरब त आन के सुधारत ? जौं हमसभ एकटा सत्य बाटपर चलनिहार, देशभक्त आ जनताक समस्याके अपन बुझऽबला नेताक बदलामे तामझामबला पँजेरो पर एनिहार नेताके निरुत्साही नहिं करब त दिनानुदिन भ्रष्टाचारक दलदलमें हमसब धँसैत जाएब । सत्यक पक्षधरके मनोबल बढेनाई जरुरी आ सभक कर्तव्य भऽगेल अछि । आन कियो किया हमरा आँहाँक सम्बन्धमे सोंचि देत ? ताएँ आनके दोष देबासँ पहिने एकवेर हमसभ अपने टेटर देखब कि ?

  


Sunday, September 27, 2020

जातिवादमे जकडाइत प्रदेश नं.२ : अनिष्टक संकेत


 

–मनोज झा मुक्ति

ओना नेपाल आ ताहुमे मधेशमे जातिपातिक राजनीति आइए आविकऽ शुरु नै भेलैय । अपनासबहकलेल ई कोनो नवका गप्प नई रहिगेल छै । एकसँएक अपनाके बुद्धिजीवी कहनिहार लोक जातिपातिक राजनीतिसँ अछुत नई रहिगेल अछि । किछु वर्ष पहिनेसँ नेपालेमे आ विषेश कऽ मधेशमे जातिपाति एकटा संस्कृतिकेँरुपमे बढैत जाऽरहल अछि ।

टोल सुधार समितिक चुनावसँ लऽकऽ माननीय आ माननीय सबमेसँ मन्त्रीधरिक चुनावमे जातीयता प्रतिष्ठाकरुपमे स्थान वनवैतगेल अछि । आर त आर चोरी,छिनरपन,अपहरण,गुण्डागर्दी लगायत निकृष्टसँ निकृष्ट काजमे जातीयताके ओतवे प्रवल समर्थनक मानिसिकता जाहि तरहें समाजक हरेक वर्ग,समुदायमे देखल जाऽरहल अछि, बहुत चिन्तनीय बात अछि ।

ओना मनुष्यक पहिचानमे जातीयता एकटा बहुत पैघ अवयव छै । सबगोटेके अपना अपना जातिपर गर्व करवाक चाही, मुदा कि अन्धभक्त भेनाई कतेक सही या वेजाय ? एहिपर चर्चा–परिचर्चा के शुरु करत आ कहियासँ ?

प्रदेश नं.२ मे किछुएदिन पहिने एकटा मन्त्रीद्वारा एकटा मन्त्रालयके सचिवके मारिपीटके घटना समाजिक संजालमे खुब चर्चा कमेलक । ओ काज निकृष्ट या उत्कृष्ट रहय तकर सामाजिक न्यायसँ बेसी एकसँएक विद्वानक पंक्तिमे अपनाके ठाढ कएनिहारसब सेहो अपनाके ब्राम्हण आ यादवके कित्तामे बँटवारा कएल देखलगेल । मन्त्री आ सचिवके मारिपीट त मात्र एकटा छोट उदाहरण अछि, एकटा छोटकोनो गल्ती या कमजोरी ककरो भेटवाक मात्र चाही  जातीवादके नंगा समर्थन या विरोध विशेषकऽ सामाजिक संजालमे शुरु भऽजाइत अछि ।

विचित्र त तखन बुझाइत अछि कि नीक काज कएनिहार कोनो जातिकलोकके जते सराहना नई होइत अछि, ताहिसँ बेसी खराब काज कएनिहार कोनो जातिक समर्थन या विरोधमे जातिक लडाकासब देखाइदेवऽलगैत अछि । अनेरे कुकर्मोके जाहि तरहें जातीवादके नामपर प्रश्रय जे भेटिरहल अछि ओ समाज,प्रदेश आ देशकलेल कोनो विषसँ कम नई अछि ।

समाज आ देशके सुधरवाक, परिवर्तन करवाक दिनराति चौक–चौराहासँ लऽकऽ सडक,सदन आ मिडियामे बजनिहार कथित बुद्धिजीवी, सामाजिक कार्यकर्ता आ राजनीतिकर्मीसब जातियताक रंगदेवऽमे सबसँ आगु देखल जाऽरहल अछि । कि एहने परिवर्तनक पक्षधर हमसब छी ?

जतऽ जातिपातिक विष नई पनपल रहैछ, ओतऽ राजनैतिक दलसब जातिपातिक विषक वृक्ष दिनानुदिन रोपिते जाऽरहल अछि । मात्र आ मात्र जातिक भोंट लऽ,सत्ता प्राप्तीकवाद हमसब केहन रस्तापर देशके आगु बढवऽ चाहि रहल छी ? एकर जवाव ककरासँ पुछल जाए ?

जातिपातिक नामपर जाहि तरहें चोरके साधुक मुखिया बनाओल जएवाक काज भऽरहल अछि, केहन विधि आ व्यवस्थाके निर्माण कएल जाऽरहल अछि ? कि इएह आ एहने परिवर्तन हमसब समाजमे चाहि रहल छी जे सबजाति अपन अपन जाति जाहिगाम,टोल या मुहल्लामे अछि ओत्तहि जाऽकऽ वास करओ ? समाजक परिचय जे विविधिता रहल अछि, ओ समाप्त कएल जाए ? जँ, नहिं त मात्र भाषणमे विरोधक स्थान लैत आएल जातीवाद कहियासँ व्यवहारिकरुपमे समाजमे अपन स्थान बनाओत ? जतेक समय बितिरहल अछि, एकर प्रकोप ओतवे समाजमे देखाइ दऽरहल अछि । किया त एकर नाकारात्मक पक्षके पृष्टपोषकक संख्या दिनानुदिन बढिए रहल अछि । बौद्धिक आ सचेत वर्ग जातियताक नामपर पद आ प्रतिष्ठा आर्जन करवाक प्रतिस्पर्धामे लागल अछि आ राजनैतिक दल भोंटक लोभमे जातीवादके मलजल देवऽमे प्रतिस्पर्धी बनल अछि ।

आखिर कहियाधरि ई आगि समाजके मूल्य आ मान्यताके झरकवैत रहत आ समाजिकताके रक्ताम्य बनवैत रहत । आ विशेषकऽ प्रदेश नं.२मे जे जातियताके खेती जाहि तरहें वढैत जाऽरहल अछि, समाज, प्रदेश आ देशके महाभारी द्वन्द्वमे फँसवैत जाऽरहल अछि । जँ आइए आ एखनेसँ समाजक सऽभ वर्ग सचेत नईं होइजाएव त अपना घरक दुहारिपर कालके प्रतिक्षा करैत रहु, कखनो अपना चपेटमे लऽसकैत अछि ।

नीक आ बेजाय कएनिहार हरेक जातिमे होइत छैक । चोर,छिनार,डाकू आ हत्यारा एवम् भ्रष्टाचारीके कोनो जाति नहिं होइत छैक, ओ कोनो जातिक हुए ओकरा समाजसँ दुत्कारे भेटवाक जे हमरासबहक सामाजिक परम्परा रहल, तकरा पुनःसमाजिक प्रचलनमे लाएव आवश्यक अछि । जानकी सबके सदबुद्धि देथुन । समयमे सबके चेत खुलय ।


Tuesday, August 17, 2010

कुर्सीक खेलमे ढुलमुलाइत देशक संविधान !


मनोज झा मुक्ति
    देशमे चारिम वेर वएह दूटा पहलमान प्रधान मन्त्रीक लडाईएकलेल अखाड़ामे आई ठाढ़ हएत । प्रधानमन्त्री पदकलेल एक्कहिटा व्यक्ति तीनबेर हारिकऽ चारिम वेर प्रतिपस्र्धा कएनिहारमे संसारमे संभवतः पहिल व्यक्ति होएताह पुष्पकमल दलाह‘प्रचण्ड’जी आ रामचन्द्र पौडेलजी । आ ओहुना एहन अदभूत साहस एवं हिम्मत नेपालेक नेतामे देखाइ देत ।
    ए.माओवादी आ नेपाली काँग्रेस फाँड़ बान्हिकऽ भिडल अछि अपना÷अपना नेताके प्रधानमन्त्री बनएवाकलेल । चुनावी प्रतिस्पर्धासँ बहार भऽ सबके चीत्त कऽ अपने प्रधानमन्त्री बनवाक दाओमे बैसल एमाले, कहियो एम्हर आ कहियो ओम्हर ढुलमुलाइत आन÷आन पार्टीसब सबकेसब अपने दाओमें अछि । तहिना संयुक्त लोकतान्त्रिक मधेशी मोर्चा सेहो अपने दाओमें गबदी मारने बैसल अछि ।
    एहिसँ पहिने तीनुबेर भेल चुनावमे मधेशी मोर्चा तथस्टरुपमे सदनमे प्रस्तुत भेल । तहिना एमाले आ किछु आर पार्टीसब सेहो अपन तथस्टता देखौलक । मुदा सबसँ बेसी चर्चामे अछि मधेशी मोर्चा । अखनधरि प्रधानमन्त्री नईं बनऽमे सबसँ वेसी केओ दोषी मानल जाऽरहल अछि त ओ अछि–मधेशी मोर्चा । मोर्चापर नाना प्रकारक आक्षेप लागि रहल अछि । केओ कहैत अछि जे देशके मोर्चा अनिर्णयके बन्दी बना देने अछि , त केओ कहैत अछि जे मोर्चा ककरो इशारापर ई खेल खेलि रहल अछि । तहिना....आन बहुत तरहक आरोपसँ सूचनाक बजार गर्म अछि ।
    मधेश आन्दोलनक वादसँ नेपालक इतिहास जौं देखी त नेपालक सरकार बहुतोवेर मधेशकसँग मौखिक आ लिखित सहमति जनौने अछि, मुदा कार्यान्वयन कतेक भेल से सबहक सोझामें अछि । ओना एहिमे मधेशक दलसब सेहो दोषी छथि जे कुर्सीक लोभमे मधेश मुद्दाके कात कऽ दैत रहैत छथि । नेपालक सरकार मोर्चेसँगे नहि–आदिवासी जनजाती, दलित, महिला, कर्णाली, अपाँग ...आर बहुतोक सँग मौखिक या लिखीत सम्झौता कऽ चुकल अछि आ विसरिगेल अछि ।
    जौं अखन नेपाली काँग्रेसक बात सुनव त, काँग्रेसक कहब अछि जे २२ दलक मोर्चा एकताबद्ध रहवाक चाही, जेना काँग्रेस एमालेके प्रधानमन्त्री बनवऽमे सहयोग केने छल तहिना एमालेके सेहो सहयोग करबाक चाही । देशमे लोकतान्त्रिक सरकारक निर्माणक बात कसिकऽ काँग्रेसद्वारा उठाओल जाऽरहल अछि ।
    एमालेक अध्यक्ष झलनाथ खनाल अपने दाओमे व्यस्त छथि । कोनो तरहे प्रधानमन्त्रीक कुर्सीपर बैसिकऽ अपन जीवन सफल बनएवाक प्रयासमें ओ देशमे राष्ट्रिय सहमतिके सरकारक गप्प करैतछथि । ‘मान न मान, मैं तेरा मेहमान’ बला कहवीके जीवन्तता दैत सब दलकेँ ओ राष्ट्रिय सहमतिके सरकार बनयवाक सलाह दैत छथि ।
    एम्हर गल्तिसँ प्रधानमन्त्रीसँ राजिनामा देआगेल ए.माओवादी अध्यक्ष प्रचण्ड अपने नेतृत्वमे राष्ट्रिय सहमतिक सरकार निर्माणकलेल आ नईं त बहुमतीयोरुपमे प्रधानमन्त्री बनवाकलेल दिन–राति एक कऽदेने छथि । अपना अतिरिक्त हूनका अपना पार्टीक कोनो नेतापर भरोसा नहि छनि । प्रधानमन्त्री बनवाकलेल ओ किछु करबाकलेल तैयार नजरि अवैत छथि ।
    तहिना, चारिटा मधेशवादी दल मिलिकऽ बनल संयुक्त लोकतान्त्रिक मधेशी मोर्चा सेहो एहि खेलमे अपनासँगे कएलगेल सम्झौतापर फेरसँ प्रतिवद्धता करएवाक जागाड़में लागल अछि । ओना राष्ट्रिय सहमतिक सरकारपर अपन दावा सेहो मोनेमोन मोर्चा कएने बातक हवा सेहो बुद्धिजीविक बजारमें चलैत अछि ।
    जहन सब पार्टी अपना–अपना दाओमे लागल अछि, तहन कोनो एक्कहिटा पार्टी या व्यक्तिके सम्पूर्ण दोष देव कतेक उचीत अछि ?
    कहल जाइत छैक,‘राजनीतिक, प्रेम आ द्वन्द्व अर्थात लडाईमे सबकिछु जाएछ छै’ । अपन समर्थन करबाकलेल– पहिने ककरो प्रेमसँ, तकरावाद लोभसँ, तकरावाद धम्कीसँ आ तत्पश्चात लाञ्छना लगाविकऽ अपना दिस लाएव बला सब चलि अखनधरि मधेशी मोर्चालग विफल भऽरल देखि नेपालक पैघ पार्टीसबके तिलमिलाएब स्वभाविक छैक ।
    अपना आपके मधेशक हितैषी कहऽवला एवं सबदिन मधेश मतपर सरकारक गाडीके ड्रइवर बनल नेपाली काँग्रेस जहन मधेश प्रदेश आ नेपाली सेनामे मधेशीके सामूहिक प्रवेशके मुद्दा सामने एलै त किए पाछा हटलैक ? अहिना, अपना कार्यकर्ताके सुनियोजितरुपसँ प्रयोग ककऽ मधेश आन्दोलनक विरोध करौनिहार एवं अपनाके मधेशीके असली हितैषी कहऽबला एमाले किया मधेशी मोर्चाक माँगपर मौन वैसि अपने दाओमे बैसल अछि ? तहिना, मधेश मुद्दामें अखनधरि अपना आपके सबसँ आगा रहल नारा दैत ए. नेकपा माओवादी किए सेनामे सामुहिक प्रवेश आ स्वायत्त मधेश प्रदेशक माँगपर पुनर्विचारके बात करऽ लागल ?
    जहन काँग्रेस, एमाले, ए.माओवादी अपनाके मधशी जनताके सबसँ पैघ हितैषी कहवामे गर्व करैत अछि, सब पार्टीमें मधेशी मूलक नेताकेराखि अपन मधेश भक्ति दर्शयवाक जहन ढोंग नहि त, मधेशक जायज माँगपर किए पुनर्विचारक गप्प ? कि जौं नेपाली सेनामें मधशीक सामूहिक प्रवेश होएतैक तहन मात्र तमलोपा, फोरम, फोरम लोकतान्त्रिक आ सद्भावने पार्टीक कार्यकर्ता नेपाली सेनामे जयतै ? आकि सब मधेशीक बच्चाकलेल रस्ता खुजतै ? जौं मधेशी मोर्चाक माँग गलत छई, तहन अपना–अपना पार्टीमें मधेशीक पद आरक्षित करवाक नाटक किएक ?
    एम्हर मधेशी मोर्चा सेहो कखनो एक रहैत अछि त कहियो घटक दलक कोनो नेताक व्यक्तिगत या पार्टीगत स्वार्थमें परिकऽ निष्कृय भऽ जाइत अछि । कहियो मोर्चाक कोनो घटक एसगरे ककरो सरकारमे जाकऽ मन्त्रीमण्डलके कुर्सीपर विराजमान भऽ जाइत अछि त कहियो कोनो दोसर घटक । आशाकरी जे एहिबेरुका पुनर्जिवीत मधेशी मोर्चा कोनो एकटा घटक दलक स्वार्थक शिकार नहि बनय ।
    देश, अखन नव संविधान लिखवाक क्रममे अछि आ सब दल अपने–अपने बाजा बजावऽमे मस्त । जौं वास्तविक अर्थमे दलक नेतासब नेपाली जनताकलेल÷नेपाल देशकलेल राजनीति करैत छथि त नेपालक हरेक कोनामे रहल जनताक भावनाके बुझहिटा पडतैनि । हरेक नेपालीक समस्याके अपन समस्या मानहिंटा पड़तैनि । तहने देश विकास एवं समृद्धि सड़कपर यात्रा कऽ सकैय । सबसँ पहिने जरुरी अछि देशमे आम जनताक भावनाके समेटिकऽ बनल नव संविधानक निर्माण आ तकरालेल जरुरी अछि देशमे राष्ट्रिय सहमतिक सरकार, मुदा प्रधानमन्त्रीक कुर्सीक खेलमे निर्माणधिन संविधानक बात अखन गौण अछि । देश आ जनताकलेल राजनीति कहियासँ शुरु होएत....भगवाने जानथि ।

Monday, August 9, 2010

महोत्तरीक यूवाके देशव्यापी अभियान


                        मनोज झा मुक्ति
    ‘अपना गामठामक विकास करबाकलेल सरकारी पाई, एन.जि.ओ. या आ.एन.जि.ओ.क आवश्यकता नहिं अछि, आवश्यकता अछि त सकारात्मक दृष्टिकोणकेँ आ अपना माटिप्रतिक आस्था एवं आत्मबलकेँ’ यैह नारा लऽ कऽ महोत्तरी जिलाक यूवा शंखनाद कएने अछि– देशके सुन्दर बनएवाक अभियानकेँ ।
    जौँ पाइयक बलपर विकास भऽ सकैत त नेपालक सभ गाम स्वर्ग भऽ गेल रहैत । नेपालक कोनहुँ स्थान विकाससँ बञ्चित  नईं रहैत । सरकार नेपालक प्रत्येक गामें प्रतिवर्ष २० सँ ३० लाख अनुदान दैत अछि, जिला विकास समितिक मादे अरबोक बजेट रहैत अछि विकासकलेल से अलग सँ । एकरा अतिरिक्त सभासद सबके क्षेत्र विकासलेल बजेट भेटैत अछि तकर बाते छोडु । तहिना समाज आ देशक विकास हेतु एन.जि.ओ. आ आ.एन.जि.ओ. मार्फत नेपालमे प्रति वर्ष खरबो रुपैया अवैत अछि ताइसँ कतऽके विकास होइत अछि, भगवाने जानथु ।
    चाहे गामक कोनो पार्टीक नेता हुए जे गामक विकासकलेल गा.वि.स.के प्रतिनिधि बनल करैत छथि या जिला विकास समितिमे पार्टीक प्रतिनिधि बनैत छथि, जँ ओसब अपना कर्तव्यप्रति कनिक्को सचेत रहितथि त नेपालक गामसब पूर्ण नहि त बहुत विकसीत भऽगेल रहैत । अपना गामकलेल या जिलाक लेल आएल बजेटमेंसँ कमीशन खाकऽ कागजपर विकासक काज गा.वि.स. सचिव आ जि.वि.स.क एल.डि.यो.सँ करौनिहार नेतेसबके एहि तरहक रवैया अछि तहन कोना भऽ सकत नेपालक विकास ? आश्चर्य त तखन लगैत अछि जखन देश विकासक लेल आएल बजेटके खएनिहार नेतासब अपनाके देश आ जनताक हितैषी आ अगुवा कहैत नईं थकैत अछि । ईमान्दारी आ सत्यपर सँ आम जनताके विश्वास उठाबऽमे नायकक भूमिकामे रहल अधिकांश कमिशनखोर नेताक कारण किछु ईमान्दार एवं नैतिकवान राजनीतिकर्मीसब अनेरे बदनाम भेल करैत अछि । ताँए जरुरी अछि आम जनतामे आत्म विश्वास जगएवाक आ सत्यपर भरोषा बढएवाक । आ एकर शुरुवात कऽ रहल अछि, महोत्तरी जिलाक किछु यूवासब ।
महोत्तरीमें अभियानमे लागल यूवाक कहब छन्हि– ‘अपना गामठामक विकास करबाकलेल सरकारी पाई, एन.जि.ओ. या आ.एन.जि.ओ.क आवश्यकता नहिं अछि, आवश्यकता अछि त सकारात्मक दृष्टिकोणकेँ आ अपना माटिप्रतिक आस्था एवं आत्मबलकेँ’ । ओसब अभियानक शुरुवात कऽ रहल छथि–वृक्षारोपणक काजसँ । जखन हुनकासबसँ जिज्ञासा राखल गेल, कि वृक्षेरोपण किया ? त हुनक कहब छन्हि–‘ गामघर या जिलामे जत्र–तत्र व्याप्त भ्रष्टाचारके एक्कहिवेर कम नहि कएल जा सकैय । कोनो गाममे जौँ कोनो विकास निर्माणक काज होइत अछि त स्थानिय नेता, कार्यकर्ता या यूवा ओहि काजमे निक जकाँ अभिरुचि लैत अछि । मुदा दुर्भाग्यक बात हूनका सबमेंसँ ९८ प्रतिशत लोकक अभिरुचिक अभिप्राय रहैत छन्हि–कमिशन लेवाक, काज चाहे कागजेपर किए नई भऽ जाय । ताँए, पहिने काज कएल जाए तकरा बाद कर्मचारी, जनता आ नेताके सचेत करबाक काज शुरु हुए ।’
अपना अभियानक शुरुवात ओसब नेपालक गाम–ठाममें वृक्षारोपण क कऽ करऽ चाहैत छथि । हुनकसबहक कहब छन्हि–‘काज ककरो देखयवाकलेल नहिं होएवाक चाही, अपना आपसँ इमान्दारिता करैत काज करैत जाउ, लोक चाहे जे कहय । जँ नीक काज करबई त दुश्मनो के ई कहैएटा पडतैक जे–‘....ओना त छौंडा बदमाश अछि, मुदा काज नीक कऽ रहल अछि ।’ एहि उद्देश्य ल कऽ हमसब जतबे सकब, सबहक सहयोगसँ नेपालक कोना–कोनामें वृक्षारोपण करब आ कराएब । ओसब अपना वृक्षारोपणक अभियानमें आम देशवासी सँ एहि तरहक अनुरोध कएल करैत छथि–‘ हमरा सबहक वृक्षारोपणक अभियानमें  जँ आँहाँ सहयोग करऽ चाहैत छी त, एकटा बाँस दऽ दिय नहिं त एकटा कोनो फूलक या फलक गाछ दऽ दिय । जँ से नहि त एकदिन आबिकए पानि पटा दिय, नहिं त सप्ताहमे आधा घण्टा आबिकऽ वृक्षारोपण स्थलमें बैसि जाऊ । जँ आँहाँलग समयक आभाव अछि, आँहाँ कर्मचारी छी त अपना गाम गेल वेरमे अपना खेतमे या दरबज्जापर एहि अभियानक नामपर एकटा अपना नीक लागऽबला वृक्ष लगालिय, आ नहिं त जँ आहाँके ई अभियान नीक लगैय त कम स कम हमरा अभियानी मीत्रके हौसला बढादिय । हमर स्वार्थ याह अछि जे केओ कतौ गाछ–वृक्ष लगाओत या लगौने हायत त ओकर आक्सिजन हमहुँ लेब आ सबकियो लेत, बटोहीके रौदमे छाहरि भेटतैक एवं बहुतो गरीबकेँ घरक आँचकलेल ओकर पात काज औतैक । ताएँ सब गाम–शहरकेँ फूल आ वृक्षसँ सजाबी, जतऽ किछुदेर कियो वैसिकऽ स्वच्छ हावा लऽ सकय ।’
तहिना ओ सब कहैत छथि जे जतेक नेताके देखू सब देशे विकासके बात करत । आर्मी, पुलिस, कर्मचारी देशक या कहु माटिक सपथ खाइत रहत । पत्रकार या बुद्धिजीवि दिन–राति देशक उन्नतिक गप्प करैत नईं थाकत । जे अपनाके जनता कहैत छथि ओ सब दिन–राति नेतासबके गारि पढैत नहिं थकैत छथि जे नेतासब देशके बेच देलक । एकर मतलब जे गारि पढनिहारक भीतर सेहो देश या कहु माटिप्रतिक सिनेह छन्हि ताईमें दू मत नहि । एहि बातक विश्लेषण करैत अभियानी यूवा सब  सम्पूर्ण नेपाली सँ एहि तरहें अभियानमे जुटवाक आग्रह करवाक सोंच बनैने छथि–‘सबकियो अपन काज करैत अपना माटिकलेल किछु कऽ सकैत छी । जौँ आहाँ किसान छी, सबदिन अपना खेतमे काज करु आ ४÷५ दिनमें एक घण्टाकलेल कोनो दोसर चौरी÷बाधमे टहलि जाऊ आ ककरो खेतक लगाओल बालीमे कोनो प्रकारक रोग या गड़बड़ी देखाइत अछि त सम्बन्धित किसानकेँ सलाह दऽ दियौक । जौँ आँहाँ शिक्षित छी आ अपना कोनो काजमे लागल छी या कर्मचारी छी त अपना ड्यूटीक अतिरिक्त प्रतिदिन÷दूदिनक एक घण्टा नियमित रुपसँ ओतुक्का बच्चाके पढ़ा देल करियौ । एहिं तरहें अपन काजके हर्जा नहिं करैत, अपन नियमित जेब खर्चमे कटौति ककऽ अपना धर्तीकलेल बहुत किछु कऽ सकैत छी । जँ हमसब एहि तरहक काज करबैक त विकासक नामपर पाइ हजम करऽबला सबके आँखिमे अवश्य लाज लगतैक आ एकदिन हमरो धर्ती हँसबेटा करतैक ।’
 महोत्तरीक यूवाक अभियानक आहाँके नीक लगैय, जौं अहुँ एहि अभियानक सहयात्री बनऽ चाहैतछी त जुटि जाऊ आइए सँ आ अहुँ शंकनाद कऽ दिय अपना गामे वृक्षारोपणक अभियानकेँ । 

मधेशवादी मोर्चा आ देशक राजनीति



–मनोज झा मुक्ति
देश अखन सरकार बिहीन अवस्थामें अड़कल अछि । प्रधानमन्त्रीकलेल अपन–अपन दावेदारी प्रस्तुत कएने नेपाली काँग्रेसक संसदीय दलक नेता रामचन्द्र पौडेल आ एकिकृत नेकपा माओवादीक अध्यक्ष पुष्प कमल दाहाल ‘प्रचण्ड’ दू वेर हारि चुकल छथि । नैतिकता बिहीन राजनीति होवऽबला एहि देशमे दूनु हरलहवा नेता फेरसँ तेसरोबेर चुनावी अखाडामे उतरवाकलेल तैयार अछि ।
अखनधरि २२ दलक सहयोगसँ सरकार चलवैत आएल नेकपा एमाले अपना पार्टीएमे मानसिक मल्लयुद्धमे व्यस्त अछि आ ककरो समर्थन देवऽसँ वेसी अपने सरकारक नेतृत्व करबाक फिराकमे रहल अछि । त आन–आन छोट दलसब फेरसँ वेचाराक भूमिकामे नजर आबि रहल अछि । दोसरदिस २४० वर्षसँ शोषणक शिकार होइत आएल, देशक आधा जनसंख्या रहल मधेशी जनताद्वारा चुनाकऽ आएल मधेशवादी दल अखुनका सरकार बनयवाक खेलसँ पहिने अपने–अपने गीत आ अपने–अपने राग गवैत छल, मुदा अखन आविकऽ बुझाइय मधेशवादी दलसभके सदबुद्धि आबिगेल अछि आ सबहकलेल मधेशमुद्दा वास्तविकरुपमे पहिल प्राथमिकतामे पड़ल देखारहल अछि ।
मधेशवादी दल सबहक मधेशमुद्दापर एक होएव आम मधेशी समुदायमे फेरसँ आशाक किरणक संचार अछि । संविधानसभा चुनावक वादसँ बनल सरकारसबमे जएवाक मधेशवादी दलसबहक रवैयासँ आम मधेशी जनताक भावना एहि दलसबसँ लगभग–लगभग मृत्य जकाँ भऽगेल छल । मधेशवादी दल सबहक एकता एकप्रकारक आशाक लहर मधेशी समुदायमे लाएल अछि त दोसरदिस आम मधेशी जनता एहि एकताके मधेशमुद्दा वास्ते मजबूत बनैत देखऽ चाहिरहल अछि आ मधेशवादी दलसबहक विगतसँ सशंकित सेहो अछि ।
मधेशवादी दलसब अखन एकिकृत माओवादी आ नेपाली काँग्रेसक आगा समर्थन करवाक आधार–पत्र प्रस्तुत कएने अछि । मधेशवादी दलसबहक आधारपत्र विशुद्ध रुपसँ आम मधेशीक अन्तरात्माक भावना अछि । मधेशवादी मोर्चाक आधार–पत्रके विश्लेषण करबामें नेपाली संचार माध्यमसब फेरसँ अपन नैतिकता देखाबि रहल अछि जे ‘नेपालक संचार माध्यम आ संचारकर्मीक मनसाय अखनधरि कुत्सिते अछि, अर्थात नेपाली संचार आ संचारकर्मी अखनो पत्रकारिताक मूलमर्म नहिं सिखने अछि ।’ नेपाली संचारकर्मीसब मधेशवादी मोर्चाक आधारपत्रके शर्त, ब्ल्याकमेलिंग त आरो कि कि संज्ञासँ सुशोभित कऽ रहल अछि । पत्रकारिताक मर्यादा नईं बुझल जकाँ जथाभावीरुपसँ समाचार प्रकाशन÷प्रशारण ककऽ विकासशील नेपाली पत्रकारिताक खुलेआम धज्जी उडाओल जाऽरहल अछि । समाचार लिखवासँ पहिने पूर्ण जानकार होयब आवश्यक मानल जाइछ पत्रकारितामें, मुदा समाचारमें विरोधाभासपूर्ण शब्दक प्रयोग मधेशी मोर्चाप्रति करब कतेक उचीत अछि ?
सरकार बनयबाकलेल मधेशी मोर्चाद्वारा राखल गेल आधार–पत्रमें कोनो नयाँ विषयक समावेश नहिं कएलगेल अछि । सब पुरने विषय÷मुद्दा अछि जे संविधान सभाक चुनावसँ पहिने फागुन १६ गते वालुवाटारमे तात्कालीन प्रधानमन्त्री स्व.गिरीजा प्रसाद कोइराला, तात्कालिन एमाले प्रमुख एवं अखुनका कामचलाउ प्रधानमन्त्री माधवकुमार नेपाल आ तात्कालिन माओवादी रहल अखुनका एकिकृत नेकपा माओवादीक अध्यक्ष पुष्प कमल दाहाल ‘प्रचण्ड’ आ संयुक्त लोकतान्त्रिक मधेशी मोर्चा बीचक भेल हस्ताक्षरीत सहमतिक विषयसब मात्र अछि जे एतेक दिनधरि पुरा नई कएलगेल । हँ, एकटा माँग मात्र नयाँ अछि साझेदारी वनबला, जे देशमे सामुदायिक वनके नामपर भऽरहल जंगल विनाश रोकवाकलेल अछि । कि नेपालक संचारमाध्यमसबके ओ फागुन १६क सम्झौता विसरागेल छैक ? जँ नहिं विसराएल छैक त हस्ताक्षरीत सहमतिके कार्यान्वयन करबालेल लिखऽमे नेपालक पत्रकारसबके मसी किया सुखा गेलैक ? मधेशी मोर्चाक आधारपत्रके अनर्गलरुपसँ प्रचार करबमे पत्रकारक सोंचमे बीझ किया लागि गेल छैक ? मुदा नेपालमें एहन बात सामान्य अछि । एतऽ पत्रकारिता कम आ विरोधाभाष विश्लेषण बेसी भेल करैत अछि । ओना पत्रकारिताक ज्ञान नहिं होएब सेहो एकर कारण अछि ।
आरो जे जेना हुए, मधेशी मोर्चा सेहो एतऽ गल्ती करऽ जारहल अछि । एक्कहिटा विषयपर कएवेर लिखित प्रतिवद्धता ? ककरा–ककरासँग प्रतिवद्धता ? जखनकि सबके बुझल अछि जे नेपालक नेता प्रधानमन्त्री या मन्त्री बनवाकलेल कोनो प्रतिवद्धता कऽ सकैया । प्रतिवद्धता या हस्ताक्षर ककऽ विसरि जाएब नेपाली राजनीतिकेँ पुरान आ चलन–चल्तीके दर्शन बनिगेल अछि । मधेशी मोर्चाके कोनो दलसँ या नेतासँ लिखित प्रतिवद्धतासँ वेसी ओकर कार्यान्वयनक प्रतिवद्धता लेवाक जरुरी अछि । मधेश सबदिनसँ अधिकारसँ बन्चित होइत आएल अछि । कहियो संविधानसभा चुनावक संभव करऽलेल सम्झौता करबालेल मधेशके बाध्य करलगेल त अखन नव सरकारक निर्माणकलेल ककरो समर्थन करबाक दवाव मधेशपर अछि । मुदा, सबदिन देश आ आन नेता एवं पार्टीकलेल सबकिछु करैत आएल मधेशके अपनालेल आब सबकिछु बिसरिकऽ सोंचहिटा पड़तैक ।
२४० वर्षसँ मधेशी, आदिवासी, दलित आ जनजातीसब ठकाइत आएल इतिहास अछि । देशमेभेल कोनो प्रजातन्त्रक आन्दोलनमें मधेशक जनता सबसँ पहिने बिगुल फुकने इतिहास अछि । मधेशमुक्तिकलेल मधेशी जनता कहियो राणाक विरोधमें त्रिभूवनके क्रियाशील करऽमे अपन जानक वाजी लगौलक त कहियो वि.पी. कोइरालाक आव्हानमे भेल प्रजातन्त्रक आन्दोलनमे अपन शहादत देलक । चाहे २०४६सालक आन्दोलन हुए या २०६२÷६३क जन आन्दोलन, सब लडाईमे मधेश खुला हृदयसँ अपन सर्वस्व लुटवैतगेल । मुदा बदलामे मधेशके भेटल अपमान आ अपहेलना । नेपाली राजनीतिके इतिहासमे मधेशीक हक,अधिकारके सबदिनसँ दबाओल गेल भेटैत अछि । एतेक दिनसँ मनमे दवाओल पीड़ा आखिर कण्ठसँ उपरभेल आ फलस्वरुप मधेश आन्दोलनमे बहुतो मधेशी सपुत अपन शहादत देलक । मधेश आन्दोलन–२क वाद लोकतान्त्रिक मधेशी मोर्चासँगे तात्कालिन प्रधानमन्त्री आ देशक पैघ दलक नेता सब लिखित सम्झौता कैलक आ देशमे संविधानसभाक चुनाव संभव भेल ।  संविधानसभाक चुनावमे मधेशी जनता विभिन्न मधेशवादी दल एवं गैर मधेशवादीदलमे अपन प्रतिनिधिके चुनिकऽ पठौलक । गैर मधेशवादीदल  मधेशक नामोधरि उच्चारण नहिं केलक त मधेशवादीदलसब सेहो अपना मुद्दासँ भटकैतगेल आ कुर्सीक खेलमें लागल रहल जकाँ प्रतीत होइतगेल, ओना बीच–बीचमें मोर्चाकसँग कएल सहमतिक वात उठबऽ नईं बिसरैत छल । अखन आबिकऽ सब मधेशवादीदलकेँ अपन मधेशी जनताकसँग कएल वादा बुझाइय याद आएल आ नयाँ सरकारक निर्माणमे अपन निर्णायक भूमिकाकेँ आम जनताक पक्षमे प्रयोग करबाक काजमे लागल अछि । कनो पार्टीके सरकार बनबऽमे सहयोग करबासँ बेसी राष्ट्रीय सहमतिक सरकारक निर्माणके बात जे मोर्चा उठौने अछि तकरा दृढता पूर्वक निर्वाह करब सँनकाज मोर्चाकलेल सँजिवनी भऽ सकत । तहिना जँ बहुमतिय सरकार देशमे बनैत अछि त मोर्चामें सहभागी मधेशीदल सबके सरकारमें मन्त्री बनवासँ परहेज करहिटा पडतैन । किया त मन्त्री बनलाकवाद अपन मुद्दा कतेक याद रहि जाइत छैक से मोर्चामे रहल सब दलके नीकजकाँ अनुभव छन्हि, सबकियो सरकारी घोडापर फेराफेरी सवारी कसि चुकल छथि ।
देखवाक ई अछि जे वास्तवमे मधेशवादीदलसब मोर्चा बनाविकऽ मधेशक माँगके पुरा कराओत, नयाँ संविधानक निर्माण कराओत या मात्र एकरा कुर्सीक भागवण्डामें सीमीत ककऽ राखिदेत ! आशाकरी मधेशी मोर्चाद्वारा मधेशी जनताक मोनमे जगाओल आशके मोर्चा विश्वासमें परिणत ककऽ छोडय ।