Saturday, April 18, 2009
कस्तो महानता.. ? नयाँ नेपालका प्रधानमन्त्रीको गणतान्त्रिक भाषण...
हाम्रो देशमा सबैथोक नयाँ भएको छ । नहोस पनि किन ! देशमा संविधानसभाको चुनाव नयाँ, जम्बो आकारको संविधान सभा नयाँ, राजतन्त्र फेरिएर गणतन्त्रात्मक देश भएको नयाँ, यस्ता यस्तै प्रायः धेरै कुरा नयै नयाँ नै भएर होला जनतादेखि नेता सम्म, पियन देखि हाकिम तथा कृषक, व्यापारी, पत्रकार, लेखक, मजदूर लगायत सबै तह र तप्काका मानिसहरुले नयाँ नेपाल बाहेक अरुकुरा कमै गरेका भेटिन्छन् ।
पुरै देश नै नयाँ भएको बेलामा संघीय लोकतान्त्रिक गणतन्त्र नेपालका प्रथम प्रधानमन्त्री नयाँ नहुने त कुरै भएन । १० वर्षे जनयुद्ध पछि त्रmान्तिको बलमा प्रधानमन्त्री हुनुभएका पुष्पकमल दहाल æप्रचण्ड”को नाम वास्तविकरुपमा कर्म वहाँको कर्म अनुरुपकै रहेको प्रमाणित भएको छ । देशको प्रधानमन्त्री हुनुहुन्छ पुष्पकमल दहाल र वहाँ नै æप्रचण्ड”को नामले एकिकृत नेकपा माओवादीको अध्यक्ष हुनुहुन्छ ।
प्रधानामंत्रीको रुपमा सदन भित्र बोल्दा वा विभिन्न टोलीको डेलिगेसन लिएर जानेसँग कुरागर्दा वहाँ फूल जस्तै कोमल भएर प्रस्तुत हुनुहुन्छ र पार्टीका कार्यकर्ताहरुको बीचमा æप्रचण्ड” जस्तै विवेकहीन, हठी जस्तो कुरा गर्नुहुन्छ । अचम्मको कुरा त के छ भने जुनसुकै बेला नेपाली जनताको हवाला दिंदै आफ्नो दुइटै चरित्रमा वहाँ धेरै हदसम्म सफल हुनु भएको छ । मिठो कुरागर्दै कहिल्यै पुरा नहुने आफ्नो आश्वासनले देशी देखि विदेशी सम्मकालाई थामथुम पार्न एकातिर सफल हुनुभएकोछ भने अर्कोतिर कुराकुरामा विद्रोह गर्ने धम्की दिएर सत्तामा टिकिराख्न सफल भई नै रहनु भएको छ ।
सम्भवतः अब वहाँले आफ्नो यी चलाखीपूर्ण चालहरु आम जनता र विदेशी हीतमीतहरुले थाहा पाइसक्यो भनेर राम्ररी बुझिसक्नु भएछ, त्यसैले होला अब बोल्नै नहुने छाडा शब्दको प्रयोगगर्न थाल्नु भएछ । एउटा प्रधानमन्त्रीले सार्वजनिक ठाउँमा जथाभावी बोल्न मिल्छ कि मिल्दैन ? हाम्रो देशमा गणतन्त्र संस्थागत भइनसकेर होला नेपाली जनताहरुले गणतन्त्रमा यस्तै हुँदाहुन भनेर नै सोंचेका छन कि ? तर, आफ्नो मूलुक भर्खर गणतन्त्रको बाटोमा वामेसर्न खोजेपनि धेरै नेपालीहरुले ठूल्ठूला गणतान्त्रिक देशको नियम कानून र व्यवहारका वारेमा धेरथोर जानेका छन् । अरु गणतान्त्रिक मूलुकका प्रधानमन्त्री तथा मन्त्रीहरु त त्यति छाडा हुँदैनन् क्यारे ! अनि हाम्रो प्रधानमन्त्री र मन्त्रीहरु फेरि किन छाडा भए ? मूर्ख नै हो भनौ भने प्रधानमन्त्रीले स्नातक सम्मको अध्ययन गर्नु भएको छ ।
विवेकहीन पनि कसरी मान्ने ? कहिलेकाहीं मीठो र गहकिलो कुरा पनि गर्छन नै । आम नेपाली जनता अहिले अलमलमा परेका छन् । हुनत हाम्रा प्रधानमन्त्री र मन्त्रीहरु अरुदेशको नक्कल होइन, नेपालमा बेग्लै किसिमको आफ्नो माटो सुहाँउदो व्यवस्था हुनुपर्ने धारण पनि बेला बेलामा नराखेका होइनन् । हो, यो पछिल्लो व्यवस्थाको बारेमा नेपाली जनता अनभिज्ञ भने पक्कै छन् । कतै त्यस्तै व्यवस्था अन्तर्गत नै यो जेपायो त्यो बोल्ने, आफ्नो मर्यादाको वास्ता नै नराखी बोल्ने कुराहरु त हुँदैनन् ? नेपाली जनताले सोंच्न थालेका छन् ।
एकीकृत नेकपा माओवादी र उनका सहयोगीहरुले यस्तै प्रकारको व्यवस्था ल्याउन चाहेका हुन त ? के नेपालमा ल्याउन खोेजिएको नयाँ व्यवस्थामा प्रधानमन्त्री तथा मन्त्रीहरुले ठग र बहुलासरह नै बोल्ने हो त ? या मनपरि गर्नेलाई बाध्य भएर सबैले समर्थन नै गर्नुपर्ने जस्ता बाध्यता हुने हो । के यी यावत प्रश्नहरु हाम्रा नयाँ नेपालका गणतान्त्रिक प्रधानमन्त्री तथा मन्त्रीहरुले आफ्नो बोली र व्यवहारले देखाइरहेका छैनन् त ? संघीय लोकतान्त्रिक गणतनत्र संत्रmमणकालिन अवस्थामा रहेको बेलामा आफ्नो जिम्मेवारी गम्भिरताका साथ प्रधानमन्त्री र मन्त्रीहरु तथा सहयोगी, विपक्षी या तथस्टरुपमा बसेका दलहरुले बहन गरेनन् भने नयाँ नेपालमा हुने नयाँ व्यवस्था वास्तवमा विश्वसामु नमूना नै बन्ने छ, सकारात्मक होइन कि नकारात्मकरुपमा । हामी र हाम्रो देश असफल र छाडाको पार्यायवाची नबनौं । नेपाल र नेपालीहरुको शान र मान बढाउन नयाँ नेपालका गणतान्त्रिक प्रधानमन्त्रीज्यूले नयाँ ढँगले शुरुवात गर्ने हो कि ? आफ्ना विकृतिहरु हटाएर !
अन्तराष्ट्रिय मैथिली सम्मेलन : कचोट लागल

मनोज झा मुक्ति
१९म् अन्तराष्ट्रिय मैथिली सम्मेलन वितलाहा चैतमासक २९ आ ३० गते नेपालक राजधानी काठमाण्डूमें सम्पन्न भेल । मूदा जाई तरहक उत्साह मोनमें छल, बहुत कचोट लागल सम्मेलनकेँ उद्घाटन आ समापन देखिकऽ ।
सम्मेलनक जिम्मा पओने वरिष्ट पत्रकार एवं राजनीतिकर्मी रामरिझन यादवक कार्यक्षेत्र काठमाण्डूसँ बाहर भेलाक कारणे आयोजन कठीन होएब निश्चिते छल । अखनधरि देखल जाएबला मैथिली कार्यत्रmम आयोजनाक खराब पक्ष सबसँ अछुत इ सम्मेलन नहि रहऽ सकल । कोनहुँ समिति बनएबाकालमे, समितिमे रहिकऽ जाइ तरहे बहुतोलोक सुति रहैत छथि सैह विडम्बना अहु सम्मेलनमें देखलगेल । अपन—अपन काज गछियोकऽ नई करबाक प्रवृति अखन अपना समाङ्गसँ नई हटल से प्रमाणित केलक अछि ई सम्मेलन ।
सम्मेलनमे नेपाल आ भारत दूनु देशक मिथिलाञ्चलसँ ३०० सहभागी होएबाक बात छल । सहभागिसब ऐलथि, मूदा निक जकाँ व्यवस्थापन नहि भऽ सकल । सम्मेलनमें मैथिली आ मिथिलाप्रति अनुरागी कम आ कोनो पार्टीक कार्यकर्ता सभक बेसी जमघट बुझाइत छल ।
२९ गते ९ बजे बसन्तपुरसँ धोती—कुर्ता आ पाग पहिरिकऽ झाँकी निकालबाक कार्यत्रmम छल, मूदा ११ बजेधरि एक डेढसय लोकक उपस्थिति मात्रे छल । मैथिली आ मिथिलासँ सम्वद्ध सँघ—संस्थासब काठमाण्डू उपत्यकामें ३ लाखसँ बेसी मैथिल रहल ठोकुवा दाबी कयल जाएत अछि । अपनाके मैथिलीक योद्धा कहऽबला किछु गोटे त उपराग देबऽमे सेहो पाछा नई परलथि "जे हमरा खबरि किया नई भेल" ? देखिकऽ अजगुत लागल आ दुःख सेहो जे जौ हम अपना आपके मैथिलीके योद्धा कहैत छी त कि व्यत्तिmगतरुपसँ खवरि केनाई जरुरिए छियै ? कोनो माध्यमसँ जानकारी होएब पर्याप्तता नहि छई ?
हँ, कहुनाकऽ विलम्बेसँ सही बसन्तपुरसँ जाउलाखेलधरि धोती—कुर्ता त कमसम, मूदा पागक प्रदर्शन करैत जुलुश पहुँचल । जुलुश प्रदर्शन वास्तविकरुपमे एहि सम्मेलनक सबसँ नीक पक्ष रहल । एकरा नेपालमें मिथिला आ मैथिलक स्थानके प्रमाणित करबामे ठोस कदमके रुपमें अवश्य लेल जा सकैय ।
सम्मेलनके उद्घाटन कयलथि नेपालक प्रधान मन्त्री प्रचण्ड । ओ अपना भाषणसँ सहभागि सभक मोन जितलथि ताइमें कोनहुँ शंका नई । काठमाण्डू उपत्यकामे कवि कोकिल विद्यापतिक शालिक रखबाक बात सहभागि सबहक दवावपर त कहलथि मूदा राखि देताह ताइके बादेमे पतियाओल जाऽसकैय । तहिना सम्मेलनमे उपस्थित अतिथि फोरमक नेता जय प्रकाश प्रसाद गुप्ता त अन्तराष्ट्रिय विमानस्थलक नाम विद्यापति विमान स्थल होएबाक कहिकऽ प्रचण्डसँ भाषणमें एक कदम आगा रहल प्रमाणित कयलथि । ओ कहलथि जे "जौ काठमाण्डूक विमान स्थलक नाम विद्यापति विमान स्थल नई होएत त निजगढमे विद्यापति अन्तराष्ट्रिय विमान स्थल बेगर हमसब मानऽबला नई छी" । जे हुए बहुत निक गप्प जौं हुनक बात मात्र नेताक भाषण जौं नई होए ।
सम्मेलनमें नेपालक हिन्दी आन्दोलनके अगुवा आ अन्तराष्ट्रिय मैथिली परिषद् नेपालक अध्यक्ष राजेश्वर नेपाली अपनाके आसन ग्रहण नई कराओलगेल कहिकऽ सम्मेलन बहिष्कार करबाक घोषण त कएलथि मूदा किछुएकालकबाद ओ मञ्चपर आसीन भेल नजरि औलथि । पहिलदिनक कार्यत्रmम साँस्कृतिक कार्यत्रmम करैत सम्पन्न भेल ।
दोसर दिन अर्थात चैत ३० गते ९ बजेसँ विचार गोष्ठीक कार्यत्रmम छल, मूदा कार्यत्रmमक संयोजक बहुभाषाविद् गंगा प्रसाद अकेला अपने १० बजे एलाह । विचार गोष्ठीमे दूगोट कार्यपत्र प्रस्तुतक कार्यत्रmम छल, ताइमे नेपालदिससँ राम रिझन यादव आ भारतदिससँ डा धनाकर ठाकुरक कार्यपत्र रहनि । कोनो सम्मेलनमे विचार गोष्ठीक सत्रके बहुत पैघ महत्व देल जाइत छैक, मूदा एहि सम्मेलनमे विचार गोष्ठीक सत्र सबसँ महत्वहीन बुझि पडल । विचार गोष्ठीमे गन्थन क कऽ कोनो निष्कर्ष निकालि ताइपर कार्य आगु बढएबाक कोनो सम्मेलनके मुख्य उद्देश्य रहल करैत अछि । मूदा एतऽ अपन अपन कार्यपत्र प्रस्तुत कयलाकबाद प्रस्तोतासब आ अधिकाँश मञ्चपर आसिन व्यक्तिसब मञ्च छोडिकऽ निपत्ता भऽ गेलाह । ओना टिप्पणी करबाकलेल कुल २६ गोटे मञ्चपर गेलाह, मूदा कार्यपत्रपर बहुत कम आ प्रायःलोक अपने राग अलापि कऽ विचार गोष्ठीके अपन व्यक्तिगत विचारक मञ्च बनावऽमे सेहो पाछा नई परलाह । सम्मेलन कोन निष्कर्षपर पहुँचल कोनो सहभागिके मालुम नई भऽसकल ।
सम्मेलनमे विचार गोष्ठीक सत्रकबाद कवि गोष्ठीक आयोजना भेल छल । ताही बीचमे सम्मेलनक संयोजक रहल राम रिझन यादव अन्तराष्ट्रिय मैथिली परिषद् नेपालक समितिके नव कार्यकारिणीक घोषणा कएलथि । जाहिमे प्रमुख पदक अलावा जे जे मञ्चपर आबि बजने छलथि ओ सबगोटे कार्य समितिक सदस्य भेल घोषणा कएलथि । घोषणा कएल पश्चात किछु युवा एहन गलत प्रत्रिmयाके विरोध करैत हो—हल्ला करबाक शुरु कएलथि । ओना सम्भवतः ई पहिल एहन कार्यसमितिक निर्माण होएत जाहिमें मञ्चपर जे जे जाकऽ बजलाह ओ सबगोटे सदस्य बनाओलगेल होई ।
तहिना कवि गोष्ठीक सत्रमे सेहो तहिना देखलगेल । कवि गोष्ठीमें सोंचसँ बेसी कवि लोकनिकेँ कविता वाचनकलेल आओल मूदा समयक आभावके कारणे सभ कविके मौका नई देबऽ सकलाक कारणे किछु कविके मोनमे दुःख होएब अतिश्योत्तिm नहिं । काठमाण्डूमे सेहो एतेकरास मैथिली कविता आएब बहुत उत्साहक पक्ष कहल जाऽसकैया मैथिलीक लेल । सम्मेलनमें किछु गोटे सम्मेलनकेँ वास्ते अपन काठमाण्डू यात्राके व्यक्तिगत काजमें सेहो प्रयोग करैत देखलगेल । सम्मेलन छोडिकऽ काठमाण्डू घुमबाक वास्ते आएल जकाँ देखनिहार सहभागि सबहक सेहो कमी नई छल ।
समग्रमे मैथिलक वर्चश्वताके काठमाण्डूमे स्थापित करबाक पक्षमे सफल रहल १९म् अन्तराष्ट्रिय मैथिली सम्मेलन, उद्देश्य आ निष्कर्ष बिहीन बुझाएल ।
jmukti@gmail.com
काठमांडू नेपाल
दू गोट हाइकू
१. अैंठन छोडू २. निन्नसँ उठू
जौर बेंओत करु मिथिला कतऽ छल
घर खसत । पुछत लोक ।
मनोज झा मुक्ति
Friday, April 17, 2009
२१म् शताब्दीक मैथिल
हँ कऽ देव
आहाँके जे चाही से दऽ देव ।
नईं छोडू अप्पन आश
करु हमरा पूर्ण विश्वास
चिन्हि लिय हमरा, हम शुद्ध मैथिल छी,
प्राणे जँ लऽ लेब, तखनो ई कहैत रहब
हँ कऽ देव, आहाँके जे चाही से दऽ देव ।
यौ हम २१म् शताब्दीक मैथिल छी ।
हमरा नीक जकाँ बुमmल अछि, जे
माय—बाबु हमरा, हमरालेल नईं जन्मौलक
हम त जनमि गेलहुँ ।
ओतऽ, हमरे बुद्धिए छल विलक्ष्ण जे
हम कहुना कऽ पढि लेलहुँ ।
मूदा, ई हम्मर अप्पन गप्प अछि ।
बिनु जनेनही आहाँके जेब खाली हम कलेब
हँ कऽ देव, आहाँके जे चाही से दऽ देव ।
हमही छी नेता जौं मिथिलाके बात करब
काज करु आहाँ, हम योजना बनवऽमे रहब
नेता ओ समाजसेवी छी तेँ कोनाकऽ देब हम चन्दा
पाई, परिश्रम छोडिकऽ जे चाही दऽदेव
हँ कऽ देव, आहाँके जे चाही से दऽ देव ।
हम ओ मैथिल थोरबे छी जे सागपात खाइत रहब
आधुनिक युग छई तेँ, भोर साँमm मधुशाला जाइत रहब
खेतमें काज हम कोना करब, लिल—टिनोपाल चढौने छी
माथ मुडाकऽ दोसरके खेलहुँ, ओकरे पान दबौने छी
काज कियो करे, जस हमही लऽलेब
हँ कऽ देव, कआहाँके जे चाही से दऽ देव ।
मनोज झा मुक्ति
