Thursday, April 29, 2010

कहियाधरि भजैत रहता विद्यापति ?




मनोज झा मुक्ति
कहल जाइत अछि, एकवेर विश्व साहित्य सम्मलेन भेल छल, जाहिमें ससाँरक सब देशक भाषी विद्वान सबहक रचना मंगाओल गेल छल ।मूदा सम्मलेनमें महाकवि विद्यापतिक रचनासभ जाधरि पहुँचल तावत हिन्दी साहित्यक साहित्यकार,कालीदासकेँे साहित्य समा्रटक रुपमें घोषणा कऽदेल गेल छल तदोपरान्तो विद्यापतिक रचनाके देखलगेल निर्णयकर्ता सभकेँ हूनक रचना असमंजसमें धऽदेलकनि विद्यापतिक रचना देखलाकबाद हूनका सभके बुमmेलन्हि जे असलीमे साहित्य सम्राट विद्यापति होयबाक चाही, मूदा साहित्य सम्राट कालीदासके घोषित कऽदेलगेल छल साहित्य समा्रटक पदवी कालीदाससँ छिनल नर्इं जाऽसकैत छल नर्इं दू दू गोटाके साहित्य समा्रट बनाओल जाऽसकैत छल ताँए दुआरे साहित्य सम्राट कालीदास कालीदास सम्राट पदवीसँ महाकवि विद्यापतिके विभूषित कएल गेलन्हि

विद्यापति..
महाकवि विद्यापतिक जन्मके सम्बन्धम विद्वान सबहक बीचमे मतान्तर होइतो स्पष्ट अछि जे दीर्घजीबी छलाह बहुतो विद्वानक मत अनुसारे विद्यापतिक जन्म ईस्वी सम्वत १३६० मृत्यु १४५० मानलगेल अछि महाकविक जन्म हाल भारतक बिहार राज्य अन्तर्गत रहल मधुबनी जिलाक बिस्फी गाममे भेल छलनि विद्यापतिक जीवनक अधिकाँश समय साहित्य साधनामे बितलन्हि महाकवि अपन दीर्घकालीन जीवनमे अनेक प्रकारक सुखदुःख, राजनैतिक विश्रृँखलता, धार्मिक साँस्कृतिक परिवर्तन देखलन्हि, तकर अनुभव कैलन्हि हूनक अनुभूति काव्यमे व्यक्त कऽ ओकरा अत्यन्त चमत्कृत कऽ देलथि

विद्यापतिक रचना..
विद्यापति बहुतो दिनधरि राज पण्डित रहलाक कारणे कविकेँ राजा राजाक धार्मिक कर्तव्य अधिकार सँ सम्बन्धित अनेकानेक ग्रन्थक रचना कएलन्हि अभिनव जयदेव विद्यापति सँस्कृतक सेहो प्रकाण्ड विद्धान रहथि महाकवि सँस्कृत भाषामे बउवा बुच्चीक नीतिक शिक्षा देवाक वास्ते
उपदेशपूर्ण कथापुरुष परीक्षालिखलन्हि तहिना दानवीर, युद्धवीर सत्यवीरक कथा लिखलाह एतेक लोकप्रिय भेल जेकर अनुवाद अंग्रेजी,
मैथिली, बंगला हिन्दी भाषामें कायलगेल महाकवि भूपरिक्रमालिखिकऽ अपन भूगोलक ज्ञानके परिचय देलाह चिट्ठी पत्रीक नमूनाके रुपमें महाकविलिखनावली रचना केलाह तहिना शिव स्तुतिमे..“शैव
सर्वस्व सार”, गंगाक स्तुतीमे..“गंगा वाक्यावली”,दूर्गाक स्तुतीमें..“दूर्गा भक्त तरंगिणी”, विभिन्न दानक प्रक्रिया हेतु..दानवाक्यावली”, गया श्राद्ध सम्बन्धि पद्धति..“गया पत्तलक”, वर्षभरिमें एक परिवारिक गृहस्थक कर्तव्यबोध हेतु..“वर्षकृत्यआदि महत्वपूर्ण ग्रन्थ सबहक रचना कयलन्हि
महाकवि संस्कृतक अलावा अपभ्रंश भाषा अर्थात अवहठ्ठमे सेहो रचना कयलन्हि, जाहिमे प्रमुखरुपसँ कीर्तिलता कीर्तिपताका उल्लेखनीय
अछि कीर्तिलता तात्कालिन मिथिलाक राजनीतिक, आर्थिक,सामाजिक साँस्कृतिक चित्रक अलबम अछि तहिना कीर्तिपताका राजा शिव सिंहक
रणकौशलक वर्णन अछि महाकवि अनेको ग्रन्थक रचना कयलन्हि, मूदा हूनका विश्व साहित्यक मंचपर सर्वोच्च स्थान दियौलकनि..“विद्यापति पदावलीजे मैंथिली भाषामें रचित हूनक ग्रन्थ अछि विद्यापति पदावली मूक्तकके रुपमें लिखलगेल हूनक गीतसबहक सँग्रह अछि महाकविक पदसभमें राधाकृष्ण, गंगा, दूर्गा, शिव आदि विषयक पद छन्हि ओना किछु विद्धान हूनका श्रँृगार रसक कवि मात्र कहैत छन्हि मूदा साहित्यक हरेक विधा हरेक पक्षमें महाकविक लेखनी चलल छन्हि
हम जुवती पति गेलाह विदेश
लगनहि बसए पड़ोसिया लेस ।।
सासु दोसरि किछुओ नहि जान
आँखि रतौंधि सुनए नहि कान ।।
जागह पथिक जाह जनु भोर
राति अन्हार गाम बड़ चोर ।।
विद्यापति कवि एह रह गाव
उकुतिहु अवला भाव जगाव ।।
या
सैसब जौवन दुहु मिलि गेल
स्रवनक पथ दुहु लोचन लेल ।।
वचनक चातुरि लहु लहु हास
धरनिमे चान कएल परगास ।।
मुकुर लेइ कत करए सिंगार
सखि से पुछय कत सुरति विहार ।।
एहि तरहक रचनाक कारणे महाकविमें श्रृँगार रसक वैशिष्टता भेटैत छन्हि तहिना निम्न पद सभसँ लगैत अछि जे भक्ति रसमें सेहो महाकविक
कोनो तुलना नहिं
भलहर,भलहरि, भल तुअ काला
खन पितवसन, खनहि बघ छाला ।।
एक शरीर लेल दुइ बास
खन बैकुण्ठ खनहिं कैलाश ।।
या
कज्जल रुप तुअ काली कहिअ,
उज्जल रुप तुअ वाणी
रविमण्डल परचण्डा कहिअ,
गंगा कहिअ पानी
ब्रम्हा घर ब्रम्हाणी कहिअ,
हर घर कहिअ गौरी
नारायण घर कमला कहिअ,
केजान उतपति तोरी
महाकवि विद्यापति व्यवहारक गीतमें जन्म, मुण्डन, उपनयन, विवाह, द्धिरागमन आदि अवसरपर गाओल जाएबला गीतक रचना कयलन्हि जे
अखनो मिथिलाक गामगाममें गुञ्जित रहैत अछि सृष्टि जहियाधरि रहत
गुञ्जयमान होइत रहत एहिके अलावा महाकवि ऐतिहासिक कविता, शिव सिंहक युद्ध वर्णन, प्रकृति वर्णन, प्रहेलिका, स्वप्न वर्णन महाप्रयाण वर्णन रचना कऽ अपने बहुज्ञ होयबाक बात प्रमाणित कएने छथि राजा शिव सिंहक पतनकबाद हूनका रानी लखिमा देवीके लऽकऽ महाकवि नेपाल स्थित बनौली गाममें बारह वर्ष वितौलन्हि बनौली बासक समयमे सेहो महाकवि बहुतो ग्रन्थके रचना कयलन्हि देसिल वयना सबजन मीठ्ठा
भावसँ मैथिली भाषाकें उँचाईपर पहुँचेनिहार विद्यापतिकँे साहित्यमें एतेक
गहिंराइ अछि जे विश्व साहित्यमे चर्चीत, “विलियम बडर््सवर्थ”, “पि.भि.सेल्लीलगायतके विद्वानसब विद्यापतिक अनुकरण कयने अछि
बंगला भाषी, थारु भाषीसब सेहो कहैत अछि जे विद्यापति हमर भाषाक
महाकवि छथि मूदा थारु बंगला भाषीके बात छोडू मैथिलीक नामपर खुजल अनेको सँस्थासब अछि, मैथिलीक कारणे बहुतोके दालिरोटी
चलैत अछि, मूदा विद्यापति किनको याद नई छन्हि, यादो छन्हि भजेवाकलेल मात्र कि हमसब वास्तवमे महाकविके बिसरि रहल छी ?
जनिक नाम बिनु मैथिली साहित्यके अपूर्ण कहल जाइत अछि मैथिली भाषाके जनजनधरि पहुँचएबाक काज कयनिहार कवि कोकिल, महाकवि विद्यापतिके हमरासब विसरि रहल प्रतित भऽरहल अछि सँघीय लोकतान्त्रिक गणतन्त्रमे अपन अपन भाषा भेषके संरक्षण एवं सम्बद्र्धनकलेल सबसँ पैघ मौका देलगेल अछि मूदा, सँघीय लाकतान्त्रिक
गणतन्त्रक विद्यापति स्मृति दिवसमें मैथिलसबमें देखल जाऽरहल
सुस्तता एकटा प्रश्न बनैत अछि.“महाकवि विद्यापतिके बिसरि नर्इं रहल छी ?” ससाँरक समक्ष मिथिला मैथिलीक परचम फहरेने महाकवि विद्यापतिक स्मृति पर्वमें सगरो देखलगेल नैराश्यताकि प्रकट करैत अछि ?”
विद्यापति देखिरहल छथि, जे हमरा नामपर कमाई कऽरहल हमर अनुयायी सब हमरा स्मृति दिवसके कोना विसरि रहल अछि सरकार विद्यापतिक नामपर काज करबाकलेल किछु बजेट सेहो दऽरहल अछि, मुदा अपनाके मैथिलीके अनुयायी कहैत किछुलोक पाईयकलेल फेरसँ विद्यापतिके भजेबाक काजके तिव्रता देने अछि विद्यापति स्मृति दिवसक नामपर अहुवेर किछु ठाम कार्यक्रम भेल, मुदा ओकर तात्पर्य एतवा बुझाइत छल जे कोन संस्था विद्यापतिक नाम भजेवाकलेल आधिकारिक हएत धन्यवाद देवाक चाही बल्खुके ओही बालबालिका सबके जे विद्यापति स्मृति दिवसके बीसों वर्ष मनाऽरहल अछि काठमाण्डूमें मैथिलक नाक रखने अछि, अहुवेर ओकरा निरन्तरता देलक
अपन लेखनीसँ अभिनव जयदेव महाकविकेँ श्रद्धाञ्जली भगवती हमरा सबके ज्ञान देथु

होरी बहार

बुरा नई मानो होली छ.....
रंग आ उल्लसक पर्व होरी÷फगुआ–२०६६क अवसरमे ‘होली बहार’ समिति द्वारा मात्र मनोरञ्जनकलेल तैयार कएलगेल ई चटनी प्रस्तुत अछि । किनको ठेस पहुँचाएब एकर उद्देश्य नहिं ।
राष्ट्रसँ उपर रहल गैर सरकारी(कमाउ) संस्था
१. नेपाली काँग्रेस – कमाए धोतीवला खाए टोपीवला
२. नेकपा एमाले – चोर बाजय जोर सँ
३. ए. नेकपा माओवादी – फाइनल खेलमें सुसाइट गोल
४.मजफो नेपाल(यादव) – गेल महिष(भैंसी) पानीमें
५. मजफो लोकतान्त्रिक(एन्टी यादव समूह) – लुटि लाऊ, कुटि खाऊ
६. तमलोपा(ब्राम्हणवादीके ठप्पा के कारण गैर ब्राम्हणके हालीमोहाली) – झिझिरकोना खेलमे डूबल
७. सद्भावना पार्टी(वन मैन आँडरमे चलैत) – ....के लिए आपूर्ति मन्त्रालय ही चाहिए, प्रधानमन्त्री चाहे जो बने ।
८.नेसपा(गिरी) – मधेशके नामपर राजनीति पर मधेश विरोधी गतिविधि
९.नेकपा माओवादी – देखना बाकी है, वाजुमे दम है या सिर्फ बोलीए में ?
१०. नेसपा(मण्डल) – भाँगगेल पेटमे, लोटा गुरकल खेतमे.....
११. नेसपा(तिवारी) – देखते रहिए, सारके एक्के पटका मारेगें......
१२.नेसपा(गुप्ता) – ई कोइ चोरका पार्टी नही है ।(...तो क्या डाकुओं का ?)
१३.नेपाली जनता दल – ना मेरा कोइ मञ्जिल ना मेरा कोई ठिगाना....
१४. दलित जनजाती पार्टी – हेर्नु भो, कसरी.....

पार्टी सबहक नेता जे जनताकलेल नेटा(पोंटा) बनल अछि । जनताक नाम लऽ कऽ जनताके ठकनिहार सब....पुरुष
१.गिरीजा प्र. कोइराला – पोलिटिकल पार्टीमा न्वाइज हुनु हुँदैन । सबैले मैले भनेको कुरा मान्नै पर्छ, मेरो बाउ,दाजुहरुले आर्जेको हो यो ।
२. विमलेन्द्र निधि – कस्ले भन्छ म मधेशी हो ? (सेहे त, आहाँ मधेशीके लेल त सामन्ते छियै कि ?)
३.उमाकान्त चौधरी – कोन थारु कहैत छौ जे मधेशी नई छी ?(किया त आहाँ त मधेशीए कोटापर छी ने ?)
४.माधव नेपाल – गदहा जनम छुटि गयो ।
५. झलनाथ खनाल – मेरो पनि गदहा जनम छोडाउनु पर्यो ।
६.रामचन्द्र झा – सारके हाथ पैर तोडि देवैन....
७.उपेन्द्र यादव – खदन चिरैया जकाँ अपन चालि विसैरगेल नेता ।(जिस थालीमे खाया, उसीको फोडा)
८.जे.पी. गुप्ता – समइ का इन्तजार है, अदि उपेन्दर जी जादा उडे तो....
९. विजय गच्छेदार – जाँनी हम कुर्सीको ढुँढते रहते हैं । दिया त दिया नहि तो अपने ले लिया ।
१०. शरतसिंह भण्डारी – हैन, म कसरी मधेशी भइन ?(वही तो..सबदिनसे आपके पूर्वज ने मधेशीको ठगा, आपतो वस उसीको निरन्तरता दे रहे हैं)
११.महन्त ठाकुर – किसीको जो ए लगता होगा जे हम बलिगोबना नेता हैं सो हम नहीं हैं से जानि लिजिए ।( के कहैया बलिगोवना ? अपने त महा...छी)
१२.महेन्द्र यादव – कुछ दिन और ठहरिए, सब फोरवर्डवा सबको देखादेंगें । थोडा पैसा तो कमालें तव...(मुस मोटहन त लोढा होइहन...)
१३. हृदेश त्रिपाठी – आदत से मजबुर (चुदुर बुदुरके महारथि)
१४.रामचन्द्र कुशवाहा–हम अधक्ष बननेवाले थे इसिलिए निकाला गया हमें ।(..बाप चमार, बेटा दिल्लिप कुमार)
१५.सर्वेन्द्र नाथ शुक्ल – इतिहास गवाह है और रहेगा....
१६. राजेन्द्र महतो – मै कर्म करता हुँ, फलका आशा नहि करता ।(आपको करनेका जरुरते नहिं है, फल लेनेवाले लिए तो आपके मिसेज और भतिजा त हइये है)
१७. अनिल कुमार झा – हम पदके लिए मरने वालो मेसे नही हैं ।(....वस पैसा मिलता रहे)
१८.लक्ष्मणलाल कर्ण – कहुना झण्डा भेटलै ने, वस हमर तपस्या पूर्ण भेल ।
१९.सरिता गिरी – कुछ भि करो, कैसै भि मुझे पद÷पैसा दिलवादो ।
२०.विकास तिवारी – गजेन्द्र नरायण सिंहके असली वारिश हम हैं ।(...से त है, इतना दिन तक आप कार्यालय सचिव रहें तो नहि ?)

२१. हरि चरण साह – विसनथवाके सभासद बनाके बहुत घाटा लगा ।( बेटीएके बनाके कोन पयदा हुआ है ?)
२२. रामचन्द्र राय – चौबे चला छब्बे बनने दुब्बे बनकर लौटे ।
२३. अमरेश ना. झा – काबिल माँखय तीन ठाम–पैर, हाथ आ नाक ।
२४.मातृका प्र. यादव– भगवान जातिवादसँ हिनका बँचबथुन ।
२५. किशोरी महतो – हाम्रो पाटीले राष्ट्र र राष्ट्रियताको रक्षा गर्छ ।( आज सम्म राष्ट्रियताको दर÷भाऊ कति रहेको छ ?)
२६. गणेश नेपाली – मेरा मम्पटिशन गिरीजा बाबु से है । वो अच्छा पीता(सुजाताका) साबित होते है, यामैं( बजरंग का) ?
२७. जितेन्द्र देव – दुविधामें दोनो गए, माया मिला न राम ।
२८. राम कुमार शर्मा – बेगर बैट्रीके ‘भोम्हा’ कतेक दिन बाजत ?
२९. बसन्ती झा – ....हे....हे...चौका...(लागल कि भेल ?)
बजारमे जकर चर्चा अछि.....
१. नेपाल मैथिल समाज, काठमाण्डू – कत..अछि ? ई नाम त सुनल सुनल बुझाइय ।
२. पिछडा वर्ग महासँघ – धूर..बुडि..नामे गलत छौह ।( पिछडा जातजाति महासँघ राखह ।)

साहित्यक आकाशमें विचरण करैत जकाँ प्रतीत भ रहल वरिष्ठसँ गरिष्ठ साहित्यकार लोकनि...
१. राम भरोस कापडी – राजतन्त्र हुए या प्रजातन्त्र, लोकतन्त्र या गणतन्त्र, प्रतिभाके केओ नहिं रोकय सकैय ।(प्रतिभाक विकास त कियो हिनका सँ सिखय...)
२. डा.पशुपतिनाथ झा – ...त्यो ‘परिबन्ध’ भन्ने कथा मठ्नु भा छ । हो, मसँग तेही भइराखेको छ ।....हम ओइ सार सबके किन्नहु नहि छोडबई ।
३. डा. राजेन्द्र विमल – हो, आब हम बुढ भ गेलौं ।( सर एना जुनि बजियौ, भैडम अखनो आहाँके जवाने बुझैत छथि )
४. राजेश्वर नेपाली – वरिष्ठ प्रेस स्वतन्त्रता सेनानी, हिन्दी भाषाके अभियानी, मैथिलीके अग्रणी ।( अपने आप सिफारिसपर सम्मान प्राप्त कयनिहार महारथि, अपनेके नमन अछि ।)
५. डा. गंगा अकेला – एक कितावक किछु अंश हमरा डाक्टर बनादेलक(होमियोपैथ) । लोकसब डा. माने डाकु थोरबे बुझैत छैक ?)
६.धर्मेन्द्र झा – मधेशीक गौरव ( कागकलेल वेल पाकल जकाँ)
७.धीरेन्द्र प्रेमर्षी – जौं भाषाक विकास चाहैत छि त व्यवसायिकता लाब परत ।( कतऽ..अपनेक घरमें ?)
८. मनोज झा मुक्ति – अँधेरी रातोंमे सुनसान राहो पे......(ई लडका कुछ न कुछ करेगा....?)
अन्तिममे देशक महा महिम सबके सास्टाँग दण्डवत
डा.रामवरण यादव – ...देश र जनतालाई गिरीजा बाबु र नेपाली काँग्रेसले धेरै गरेको छ ।(तपाई लाई चाहिं कति नि...महामहिम जी ?)
परमानन्द झा – कि केहन लागल हमर काज करबाक तरिका ?( कोनो आश्चर्य नहिं, मधेशीक परिभाषा नीक जकाँ भेटल अपनेक चालिमें)

संविधान, सरकार, आन्दोलन आ जनता....

–मनोज झा मुक्ति
संविधान ककरालेल ? सरकार ककरालेल ? आ, आन्दोलन ककरालेल ? एहि प्रश्नक उत्तर जतवे सहज अछि ततवे जटील सेहो अछि । सामान्यतया जौं एकर उत्तर ककरोसँ पुछल जाए त उत्तर भेटत –जनताकलेल ।
संविधान निर्माणकलेल विभिन्न पार्टी आ तकर सभासदसँ पुछल जाय, “आहाँ सभासद किए भेलहुँ ? या आहाँ संविधानसभामें किए गेल छी ?” त तपाक दऽ रेडिमेड उत्तर भेटत –“जनताक अधिकार सुनिश्चित करबाक वास्ते÷नयाँ संविधान निर्माणकलेल ।”
सरकारमे रहल राजनीतिक दलसबसँ जौं प्रश्न पुछव,“आहाँ सरकारमें किए बैसल छी ?” त भूमिका बन्हैत कहता, “जनताक अधिकारके रक्षा एवं जनताके शान्ति, सुरक्षाकलेल ।”
कोनो पार्टी जे आन्दोलनमे रहैत अछि, ओकरा नेतासँ पुछल जाइछ, “आन्दोलन किएक ?” जवाव भेटत–“जनताक अधिकारक ग्यारेन्टी, जनताक शासन व्यवस्थाकलेल ।”
जहन सबकियो जनतेकलेल बेहाल अछि त जनताक ई दूर्दशा किया ? “जखन एकहुटा सहयोगी या शुभचिन्तक ककरो भेट जाइछ, त ओ सऽभ तरहें आगा बढ़ि जाइत अछि ।” ई प्रायः प्रमाणित बात अछि । मुदा, जहन संविधानसभामें रहल सभासद, सरकारमें सहभागि नेतासब, सड़कपर आन्दोलन कऽरहल पार्टीसब, सबकियो साभ काज जनतेकलेल करैत छथि त जनताक स्थिति सुधरबाक बदला दिनानुदिन दयनीय किए भा रहल अछि ? या त जनतासँ हिनका सबके तालमेल नई मिलैत अछि या मात्र सबहक नाटक अछि, जे सबकियो साभ काज जनतेक जामपर करैत अछि ?
अखनधरिक सबहक बोल ीआ काजके देखैत संविधानसभाक सभासद, सरकारमे रहल राजनीतिक दलसब आ समय–समयमें आन्दोलन कयनिहार सबके जौं ठग, जाली आ फेरेबीके उपनाम देल जाय त कोनहुँ अतिशियोक्ति नहिं होयबाक चाही । जनताक नामपर सरकारी भत्ता खएनिहार सभासदसब, जनताक नामपर सरकारी पाईपर मौजमस्ती उड़ारहल मन्त्रीसब आ जनताक नामपर जनतेके दुःख देनिहार आन्दोलन कयनिहारसब, कि कयिो जनतासँ पुछवाक औचित्यता बुझलक अछि जे जनताक ईच्छा कि छैक ? या अपनाके देशक बाहक कहबैकासब कोन काज एहन कयलक अछि, जे जनताक हीतकलेल होई ?
जौं ई प्रश्न सबसँ पुछल जाए, “आहाँसब जनताकलेल अखनधरि कि केलहुँ ?” त ओसब अपन काजसब गन्ती कराबा लगताह । किछु अपना या अपना पार्टीद्वारा कएल काज कहता त किछु काजक सम्बन्धमें कहताह, “हम(हमर पार्टी) काज करयबाकलेल तत्पर छलहुँ त विरोधी पार्टीसब मौका नई देलक या विरोध का देलक । जे किछु काज ओ कहैत छथि ‘हम कएने छी’, ओहुमें कोनो ने कोनो रुपे हूनकर स्वार्थक पूर्ति अवश्य भेल रहैत छन्हि ।
प्रश्न उठैत अछि जे, “जहन सब कियो साभ काज जनतेकलेल करैत अछि त जनता अपने कि कारहल अछि ?”
जौं जनताक बात करी, त सबकियो अपनेलेल अफसियाँत भेटत । केओ नेता आ पार्टीके गारि पढैत भेटताह, त कियो मात्र अहि जोगाड़में जे कोन नेताक पाछु लगलासँ व्यक्तिगत फएदा होयत, पद या पाई भेटत, ताही फिराकमे बेहाल भेटत । जहन चुनावक समय आओत त जनता अपन चालि(शक्ति)क प्रयोग बहुत नीक जकाँ करैत अछि । ओ ककरो अपन भोंट(मत) एहि वास्ते नहिं दैत अछि जे ‘ई जीतिका जेताह त देशक विकास या जनताक भलाईयक काज करताह ।’ प्रायः जनता तखन ई सोंचिका मतदान करैत अछि जे “हमर जातिक नेता कोन अछि ? हमरा बेटा÷बेटीक नोकरी के लगादेत ?, हमरा पदपर के पहुँचाओत ? दारु–पानीक व्यवस्था के करत ? अधिकांश जनता ई नहि देखैत अछि जे ‘के ईमान्दारीसँ काज करत ।’ जनताक प्रवृति त एहने देखल गेल अछि, “जौं एकटा ईमान्दार आ राष्ट्रवादी नेता पैदल कोनो गामें जाइत अछि त हुनकर बात कियो नहिं सुनैत अछि, आ जौं एकटा भ्रष्टाचारी नेता ५÷७ टा पँजेरो गाड़ी ला का गामें अवैत अछि त सबकियो माइए–पुते दौड़ैत अछि ।” कोनो पार्टीक नारा–जुलुश होइत अछि त किछु पएवाक लोभसँ हमसब ओहिमें शामील भा जाइत छी ।जहन हमरे सबहक(जनतेक) ई प्रवृति अछि त नीक नेता आ विकसित देशक कल्पना हमसब कोन आधारपर का सकैत छी ?
हमसब कहियो ई सोंचलहुँ अछि ? जे एहि तरहक ठक, जाली आ फरेबीके हमसब किया जीताका पठवैत छी ? कि ओही कालमे हमसब अपन देश आ अपना आपके बिसरि जाइत छी ? कशबी छैक,“रोपे पेंड़ बबुरका तो आम कहाँसे पाई” जहन नेता जीतिका जाइत अछि त हमसब अपना स्वार्थकलेल जेनतेन प्रकारे(प्रेमसँ,धम्किसँ या पैसासँ) हुनकासबके अपनालेल प्रयोग करैत छी । हमसब जौं अपना छातीपर हाथ राखिका ई सोंची, “नेताके विगारामे÷देशकलेल काज नई करादेवामे हमर दोष कतेक अछि ?” तहन बझाजाएत जे के कतेक दोष्ी छी । नेताके अपना या देशक काजसँ बेसी हमसब नोकरा सरुवा÷बढुआ एवं राजनैतिक नियुक्तिकलेल दबाव देबा लगैत छी ।
जौं वास्तविक रुपमें देशके बनयवाक अछि, नयाँ संविधानके निर्माण करबाक अछि त सभासदसब, सरकारवादी दलक नेतासब, आन्दोलनकारीसब आ जनतासबके व्यक्तिगत÷जातिगत÷पार्टीगत स्वार्थसँ उपर उठहिटा पड़त । “कम्मल ओढ़िका घि पीवाक आदति” छोड़ा परत । एक–दोसराकलेल अपना मोनमें सम्मानक भावना लाबहिटा पड़त । अप्पन खराब काजके “आलोचना” आ दोसराक नीक काजके “सराहना” करबाक आदति लगावा पड़त । आ सबसँ पैघ बात सबकियो के झूठक खेतीके बन्द करा पड़त । नईं त अखने कि ? ई संविधान कहियो नई बनत, देशक अवस्था दिनानुदिन पाछा घुसकैत जाएत आ हमरा सबहक झूठक खेतीमें देशक संगे नेतासब, जनतासंगे झिझिरकोना खेलाइत रहत.......

सरकार संविधान आ मधेशवादी दल

मनोज झा मुक्ति
संविधान सभासँ नवका संविधान बनबाक लक्षणसभ देखवाक काज शुरु भऽगेल अछि । सभ समितिसब अपन अपन मस्यौदा संविधान सभामे बुझादेलक जे देरियोसँ सही साकारात्मक कदम अछि । मुदा सबसँ पैघ प्रश्न अछि जे संविधान त बनत, मुदा केहन बनत ? ताईपर सबहक नजरि टिकल अछि । किछु गोटे त संविधान कोन तरहक होएत ताइपर ठोकुआ करऽमे सेहो पाछा नई छथि ।
संविधान सभा चुनावमे सब दलसब जनताक भोंट अपना दिस आकर्षित करबाकलेल कोनो कसर बाँकि नई छोड़लक । जनताके जतेकधरि अपना दिस आकर्षित कएलक ताहि अनुरुप सीटो भेटलैक । संविधानमे जनताक हक अधिकार सुरक्षित करबाक नामपर भोंट लऽ कऽ आएल पार्टीक नेतासब नेपाली जनताके फेरसँ ठगवामे सफल रहल से अखन ओसभ प्रमाणित कऽरहल छथि ।
विषेश कऽ मधेशीक नामपर, मिथिला, भोजपुरा आ अवधक नामपर जनतासँ मत पाविकऽ संविधान सभामे पहुँचल नेता सब पैघ ठगक रुपमे राजनीतिक रंगमंचपर नृत्य करैत नजरि अवैत अछि । सबसँ पैघ मधेशवादी दलके रुपमे निर्वाचित भऽकऽ आएल मधेशी जनाधिकार फोरम नेपाल कुर्सीक चक्करमें अविते लागि गेल आ कुर्सीएकलेल पार्टी फुटि सेहोगेल । जहिया फोरम सरकारमे छल तहिया सरकारेमे रहिकऽ संघर्ष करबाक बात कहैत छल । सरकारमें रहियो कऽ एक्कौहु टा मधेश आ मधेशीकलेल काज नई कराबऽ सकल । जे मन्त्रालय अपनो भेटल रहैक ताहुमे सरकारक प्रमुख रहल एनेकपा माओवादी अपने पार्टीक भर्ती केन्द्रक रुपमे प्रयोग फोरमके केलक । ओना एक या दू टा राजनैतिक नियुक्ति अपना अपनैतके कराबऽमे फोरम सफले रहल, मुदा मधेश मुद्दा कुर्सीक तरमे जँतागेल । ताहि सरकारमे सदभावना पार्टी सेहो सहभागी रहल जे अपनाके मधेशक सबसँ पुरान पार्टी कहबामे सबसँ आगु रहैत अछि । सदभावना सेहो फोरमक छोट भ्राताक भूमिका नीक जकाँ निर्वाह कएलक । जखन फोरम आ सदभावना सरकारमें छल, तमलोपा लगायतक दल मधेशीक अधिकारलेल आन्दोलनक धौंस दैत आविरहल छल । ओना आन्दोलनक प्रयास सेहो कयलक ।
एकिकृत नेकपा माओवादीक सरकार हटलाकबाद एमालेक अगुआईमे बनल सरकारमे ‘नयाँ शीशीमे पुरना शराब’ जकाँ फोरमक सदैव मन्त्री बननिहारक समूह अपन पार्टी फोरिकऽ, तमलोपा आ सदैव सत्ताक प्रेमीक रुपमे जानल जाइत सदभावना सरकारमे शामील भेल ई कहैत जे मधेशीक अधिकार सुरक्षित करब । मुदा, अईबेरक सरकारमे त मधेशी जनताके पहिलुको बेरस पैघ झटका लागि रहल अछि । मधेशीक नामपर मधेशीके लुटबाक काजमे दिनानुदिन बढोत्तरीए भऽ रहल अछि । अई सरकारमे सहभागि मधेशवादी दलसब एमाले आ काँग्रेसक आगा दयनिय अवस्थामे नजरि आबि रहल अछि ।
एमाले या काँग्रेस अपना मन्त्रालय सबहक नियुक्ति सबमेंसँ एक्कौटा मधेशवादी दलके छुअ नई दऽ रहल अछि त मधेशवादी दल सबके भेटल मन्त्रालयमे एमाले आ काँग्रेस जबरदस्ती दादागिरी कऽ कऽ सीट लैत अछि । जौं ई कही जे ‘मधेशवादी दलके एहि सरकारमे नोकरक स्थान अछि’ त अन्यथा नई होयत । अखन सरकारमें सहभागि मधेशवादी दलसब सत्ता आ कुर्सीक खेलसँ बाहर नहि आबि सकल अछि त संविधानके बात सबहकलेल बन्द किताबक पन्ना जकाँ भऽगेल अछि । सरकारमे सहभागि मधेशवादी दल भितरमे सरकारी पाइ खएबामे मस्त अछि त सरकारसँ बाहर रहल मधेशी जनाधिकार फोरम नेपाल फेरसँ मधेशीक हक आ अधिकारकलेल कहैत आन्दोलन के घोषण कएलक अछि ।
तहिना सरकारसँ बाहर रहल नेपाल सदभावना पार्टीक सरिता गिरीके नजरिमें ‘मधेश आन्दोलन’ भेले नई छैक । ताएँ त ओ ‘मधेश आन्दोलन’ शब्द संविधानमे रहबाक चाही तकर विपक्षमें गेलीह आ हुनका सँग देलकनि नेपाली जनता दलक गायत्री साह ।
संविधान निर्माणके अन्तिम चरणमे सेहो मधेशवादी दलसब सत्ताकलेल ककरो सहयोग आ ककरो असयोगक खेलमे व्यस्त छथि । केओ ककरो पछुआ बनल अछि त केओ ककरो । एहन स्थितिमे कि आब फेरसँ मधेशी जनता हिनका सबके सोझा होयतनि.....?

पम्पलेट

जलेश्वर चलें । जलेश्वर चलें ।। जलेश्वर चलें ।।।
‘छुट गए तो लुट गए’
कबतक गुलाम रहोगे ?
आप और आपके बेटों भतीजो ने मिलकर मधेश आन्दोलन किया, कई मधेशके बेटा अपना शहादत दिया । मधेशके लोग आशावादी थें कि शायद अब अधिकार मिलेगी । हमे भी अपने देशमे बराबरीका दर्जा मिलेगी, देशके सभी अंगमे हमारी भी समानरुपसे प्रतिनिधित्व होगी । क्या हमें सबकुछ मिला ? या कितना मिला ?
दोस्तों, मधेश आन्दोलन और वीर मधेशी शहीदोके बलीदानके बदले कुछ उपलब्धियां जरुर हुई जो अपनेके मधेशीका हमदर्द बतानेवाले मधेशवादी दलके कुछ नेता और बडे–बडे पार्टीके मधेशी नेता ने झपट लिया । हमने जिसे अपना हमदर्द समझा वही हमारा व्यापार करने लगा । मधेशके नामपर मधेशी नेता तो हमें लुटही रहा है, अब पहाडी नेता भी हमदर्दका खोल ओढ़े हमे बर्बाद करने पर तुला है । और यह सरकार ऐसे–ऐसे अपराधी, लुटेरोंको साथ देनेके लिए मधेशमें विषेश सुरक्षा नीति नामसे मधेशकेलिए जनविरोधी कार्यक्रम लाया है ।
विषेश सुरक्षा नीति कोई बुरा कार्यक्रम नहीं है, लेकिन सदियोंसे मधेश को अपना जमिन्दारी और मधेशी जनताको अपना गुलाम समझते आरहे उच्च पहाडिया अहंकारवाद वाले शासक मनस्थितिके लोगों ने अपना सोचे समझे चालके रुपमें मधेशमे इसे लागु किया है । और उनके मनसुबेको साकार बनानेमे हमारे हिं कुछ मधेशी भाई उनलोगोंका चमचा बने हुए हैं ।
दोस्तो, ईन प्रश्नपर जरा गौर किजिए.....
ड्ड क्या सुरक्षा नीतिमे जवरदस्ती किसीके घरमे घुसकर पीटना लिखा गया है ?
ड्ड क्या अन्यायका विरोध करने वालोंको जेलमे रखने के लिए यह नीति है ?
ड्ड क्या सुरक्षा नीतिके तहत अपने लिए बोलनेवाले अपराधी होते है ?
ड्ड क्या सिर्फ मधेशमे हिं स्थिति असमान्य हैं, जन जीवन त्रसित है पहाड़मे नही है जो मधेशको संवेदनशील कहते हुए सुरक्षा नीतिके तहत मधेशको फिरसे दबाया जा रहा है ?
नही तो क्यूँ हम चुपचाप हैं ? आपको यदि लगता है यह ठीक है तो कोइबात नही । यदि आपमे थोड़ा भी मानवता और समझ है, आप अपने आपको मनुष्य समझते है तो कदापी यह सुरक्षा नीति आपको अच्छा नहि लगेगा ।
आदरणिय मित्रों, अब वारी आगई है आपको अपने और अपने भावी सन्ततीके वारेमे सोचनेका । आइए हमारे उपर वक्रदृष्टि रखकर मधेशमे सुरक्षा नीति लागु करने वालो और उसको समर्थन करने वालोकों सबमिलकर चेतावनी दें ।
भाइयों एवं बहनों अगहन १२ गते जलेश्वर चले और मधेशको बचाएँ ।

छठि महान लोकतान्त्रिक पावनि

सँसारक प्रत्येक ठाम मनाओ जाएबला हरेक पावनि तिहारक अपन अपन महत्व रहैत अछि । मूदा सब तरहें छठि पावनि विशिष्ट रहल अछि । जहिया लोकतन्त्र,प्रजातन्त्र या गणतन्त्र शब्द सँ केओ परिचित नई रहल हेताह, ताही समयसँ लोकतन्त्र, प्रजातन्त्र या गणतन्त्रक प्रयोगात्मक रुप सँसारके देखवैत आएल अछि छठि पावनि । किया त मानव सभ्यताक विकाश जहिया सँ शुरु भेल तहिये सँ छठि पावनिके शुभारम्भ भेल बात प्रमाणित भऽ गेल अछि ।
छठि पावनिमे कायल जायबला हरेक विधानके देखल जाय त ताहिमे लोकतन्त्र, प्रजातन्त्र या गणतन्त्रक सफल प्रयोग भेटत ।जकरा समाज या समाजक लोक एक प्रकारे छोडि दैत अछि या कहु कोनो काजक नई मानैत अछि, तकरा सेहो एहि छठि पूजामे उच्च सम्मान देल जाइत अछि ।
कोन तरहें छठिक हरेक विधि विधान, सँस्कार सँस्कृतिमे लोकतन्त्रक प्रयोग, कोनाकऽ ?
©सूर्यक आराधना....
सूर्य प्रत्यक्ष फल देवऽबला देवताक रुपमें सगरो पूजित छथि । एहि सँसारमे रहल प्रत्येक सजिवके सूर्य भगवान जीवन दैत छथिन्ह । ताहि कारण सँ सँसारमे सबठाम सूर्यके पूजा कायल जाइत अछि ।
एकटा प्रसिद्ध कहबि छइ– “उगैत सुरुजके सब प्रणम करैत छैक” या “सब हेओ उगिते सुरुजके प्रणम करैत अछि ।” मूदा छठिमे डुबैत या अस्त होइत सुरुजके सेहो ओतबे निष्ठासँ पूजल जाइत अछि । एहिसँ ई स्पष्ट होइत अछि जे प्रजातन्त्र, लोकतन्त्र या गणतन्त्रमे सबहक सँग समान व्यवहार होयबाक चाही से बात छठि पावनि उगैत आ डुबैत सूर्यके पूजाक माध्यम सँ प्रमाणित करैत अछि ।
©छठि पावनिक प्रसादमे लोकतान्त्रिक मmलक....
छठि पावनिमें दिनकर दिनानाथ या छठि मैयाके अर्पण कायल जाएबला प्रसादमें सेहो लोकतान्त्रिक प्रयोग भेटत ।
गम्हरी धानक प्रयोग एक प्रकारे समाजसँ उठिगेल अछि । समान्य दिनमे जिविकोपार्जनक क्रममें गम्हरी धानक प्रयोग केओ नई करैत अछि, मूदा छठि पावनिमे सबसँ जौं पैघ सम्मान भेटल अछि त गम्हरीके । तहिना प्रायः उपलब्ध रहल सब फलफूलके सम्मानके सँग भगवानके अर्पण कायल जाइत अछि ।
गाम समाजमे अछोप मानल जायबला “डोम” जातिके बुनल बियनि, सुपती, सुप आ छिट्टीके बिनु छठि पावनि समभव नई भऽ सकैया । लोकतन्त्रक सफल प्रयोगक उदाहरण एहि सँ पैघ कतऽ भेटत ?
©जलाशय किनार( छठिक घाट) में लोकतान्त्रिक करण....
छठि पावनि, बिनु जलाशयके सम्भव नई होइत अछि । गामक सब जाति एवं वर्णक लोक एकैठाम जम्मा भऽ क ई पावनि सम्पन्न करैत छथि ।(जतऽ इनारमें एकटा सवर्ण पानि भरैत कालमे एकटा अछोप ठाढ भ गेल त पानि अशुद्ध भेल मानल जाइत अछि) ओतऽ समाजक सब जाति एक्कहिठाम रहैत छथि, एक्कहिटा जलाशयमे ठाढ भऽ सब कियो छठि मइयाके पूजा करैत छठि । जाहि तरहें लोकतन्त्रक परिभाषामें जाति–पातिक भेदभाव नई होएबाक चाही से कहल अछि तकर सफल प्रयोग छठि पावनिमे देखल जाइत अछि ।
©नटुआ नाच...
समाजक लोकसब विभिन्न मनोकामना पूर्ण होयबाक लेल आँचरपर नटुआ नचयबाक कबुला कयने रहैत छथि । जाहि अनुसार मनोकामना पूर्ण भेलाकबाद छठिक घाटपर कबुला अनुसार अपना–अपना आँचरपर नटुआ नचबैत छथि ।नटुआ बनल व्यकित समाजमें अछोप मानल जाएबला जातिक होइतो अपनाके सवर्ण कहयनिहार महिलासब उत्साहित भऽ अपना आँचरपर नटुआके नचबैत छथि । एत जाति–पातिक भेदभावक कनिको स्थान नई देल जाइत अछि ।
©अर्घपर दूधक ढार...
छठि पावनिमे कायलगेल कबुला अनुरुप जलाशयके किनारमे बनाओलगेल घाटपर राखलगेल अर्घपर गायक दूधके ढार देल जाइत अछि । इनार या कलपरसँ माटिक बासनमे लऽ जाइत पानि जौं कोनो अछोप स्पर्श कऽ दैत अछि त ओहि बासनके सेहो फेकि देल जाइत अछि अपना समाजमें । मूदा छठिक घाटपर राखलगेल अर्घपर एकटा चमार, डोम या कोनहुँ अछोप मानल जायबला जाति जौं दूधक ढार दैत अछि तऽ ककरो कोनहँु आपत्ति नई होइत छैक आ ताई प्रसादके श्रद्धापूर्वक सबकेओ ग्रहण करैत छथि । कि लोकतन्त्रक सफल प्रयोग नई अछि ई ?
समाजक सब व्यक्ति एक्कहिठाम जम्मा होएब, सबहक मत अनुसारे एक्कहिटा काज होयब, जत केओ उँच–नीच नई, केओ छोट–पैघ नई से प्रत्येक वर्षमें हमरा सबके याद करबैत अछि छठि पावनि । स्वस्थ्य जीवन यापन करबाकलेल अपन शरीरक, अपन घर–दुवारिक आ प्रयोग कायल जाएबला हरेक वस्तु शुद्ध आ सफा रहबाकचाही से स्मरण करबैत अछि छठि पावनि हमरा सबके । मूदा दुखद पक्ष ई अछि जे एतेक सफल लोकतन्त्र, प्रजातन्त्र या गणतन्त्रक प्रयोग हमसब प्रत्येक वर्ष त मनबैत छी, सबठाम लोकतन्त्र, प्रजातन्त्र आ गणतन्त्रक भाषण दैत छी, मूदा जीवनक यात्रामे व्यवहारमें लागु नई करैत छी ।
जौं वास्तविक रुपमें हमसब लोकतन्त्र, प्रजातन्त्र या गणतन्त्रक अनुयायी छी त प्रत्येक वर्षक एकदिन ( छठिक दिन) मात्रे नई कि जीवनक हरेक क्षणमे एकरा लागू करी । सबदिन छठिए दिनके व्यवहार अनुसरण करी त लोकतन्त्र, प्रजातन्त्र या गणतन्त्रक पाठ मधेशवासी सम्पूर्ण सँसारके सिखाओत ।

२. छठिक गीत


काँचही बाँसके मन्दिरबा
कञ्चन लागल केबाड
ताही पैसी सुतलनि सुरुज देव
माय बेनिया डोलाय

उठबय गेलखिन्ह चन्द्रमा बहिनो
उठू भैया भएगेल भोर
हमे कोना उठियौ हे चन्द्रमा बहिनो
आजु जाँचुक बेर

सत्तीके सत्त हम जाँचब
आजु धिरे धिरे आएब
पापीके सत्र भँगठायब
आजु जाँचक बेर
काँचही बाँसके मन्दिरबा
कञ्चन लागल केबाड
ताही पैसी सुतलनि सुरुज देव
माय बेनिया डोलाय

उठबय गेलखिन्ह चन्द्रमा बहिनो
उठू भैया भएगेल भोर
हमे कोना उठियौ हे चन्द्रमा बहिनो
आजु जाँचुक बेर

सत्तीके सत्त हम जाँचब
आजु धिरे धिरे आएब
पापीके सत्र भँगठायब
आजु जाँचक बेर
३. छठि व्रतक कथा
एक समयमे नैमिषारण्यमे सर्वशास्त्रज्ञ शौनक मुनि सूतजी सँ जिज्ञासा कयलनि¬ एहि पृथ्वीपर जे लोक सब तरहक रोग सँ ग्रस्त अछि, ककरो सन्ताने नहि होइत छैक, त ककरो पुत्र अल्पायुमे मरि जाइत छैक तकरा लोकनिक दुःखक नाश कोना हेतैक ? सूतजी ताहि पर कहब प्रारम्भ कयलनि । ठीक इएह बात सत्यव्रती भीष्म पुलस्त्य मुनि सँ पूछने छलखिन से हमरा बुमmल अछि । ई कथा कहनाहर आ सुननाहर दुनूक पापक विनाश होइत छैक । प्राचीन कालमे एकटा बलवान आ इष्र्यालु दुष्ठ क्षत्रिय राजा छलाह । हुनका पूर्व जन्मक पापे कुष्ठ भऽ गेलनि । हुनका यक्ष्मा रोग सेहो धऽ लेलकनि । ओ एहन जिन्दगी सँ मरण नीक बुमिm गेलाह । ठीक ओही समयमे एकटा शास्त्रज्ञ, धर्मात्मा, तेजस्वी ब्राम्ह्ण ओहिठाम पहुँचलाह । राजा हुनका देखि अत्यन्त प्रसन्न भेलाह । हुनक पूर्ण स्वागत सत्कार कएलनि आ विनम्रसँ प्रश्न कयलनि जे हम कुष्ठ आ यक्ष्मा रोग सँ पीडीत छी । कियो पुत्र विहीन छथि । कोनो व्क्तिक सन्तान नहि जीवैत छनि । एहि स्त्रीके पति त्यागि देने छैक । एहि सभ दुःखक कि निदान ? तखन ओ ब्राम्ह्ण विचारलनि जे सुर्यदेव लोकक सब तरहक पापके नाश कऽ ओरोग्य प्रदान करैत छथि । तैं ओ राजा के कहलदिन जे आहाँलोकनि सुर्यक व्रत करैत जाउ अवश्य कल्याण होएत । तखन ओ ब्राम्ह्ण हुनकालोकनिके पञ्चमीक खरनासँ लऽ सप्तमीक प्रात कालक अर्घ( छठि व्रतक पूर्ण विधान ) बुमmौलनि । ओ सब ओही तरहे केलनि तँ सभक क्लेश दूर भऽ गेलनि । तकर बाद एकटा जे एकटा नीक वंशक ब्राम्ह्ण दरिद्र, मूर्ख अविवाहित छलाह ओ एके वर्ष ई व्रत कएलनि तँ ओ अत्यन्त यशस्व ीओ सुखी भऽ गेलाह । ओ राजा सेहो जखन पाँच वर्ष व्रत कएलनि तखन हुनको मन्त्री सब अपनामे विचारि राजा लग आबि हुनका अपन सभक अगुआ बना कऽ सेना लऽ विद्रोहीके मारि भगौलनि आ राजा पूर्वे जकाँ निष्कंटक राज्य करए लगलाह ।
अतः जे केओ ई ब्रत कएलनि सब मनवांछित फल प्राप्त कएलनि । जे केओ ई व्रत कऽ कथा सुनि शक्ति अनुसारे कथावाचककेँ दक्षिणा देती तिनका सब तरहक क्लेश दूर भऽ जेतनि ।
कथा सुनलाक बाद पूजित देवताके प्रणम कऽ विसर्जन कऽ ब्राम्ह्णकेँ दक्षिणा आ प्रसाद दऽ व्रती पारण करथि ।


४. छठि व्रत करबाक विधान
छठि व्रत सप्तमी युक्त षष्ठीमे कायल जाइत आछि । सुर्यक पहिल अर्घ ओहि दिन देल जाइत अछि जाहि दिन उदयकालमे कनिओ काल षष्ठी पडैत छैक । तहिना उदय कालमे कनिओ काल सप्तमी रहला पर दोसर अर्घ देल जाइत अछि । छठि पावनिमे सुर्य भगवानक पूजा कायल जएबाक कारणे साँमmमे षष्ठीमे पहिल अर्घ आ प्रत काल सप्तमीमे दोसर अर्घ देल जाइत अछि । जे वस्तु साँमmमें अर्पित काएल जाइत अछि सएह भिनसरमे सेहो । आरोग्य लाभ एहि व्रतक मुख्य उद्देश्य अछि ।
छठि व्रत कयनिहर सब चौठके नहा कऽ अर्वा¬अर्वाइन खाइत छथि , पंचमी दिन दिनभरि उपवास राखि सायंकाल नव चूूल्हि पर नव कोहामे अरबा चाउरमे गूड दऽ पायस बनबैत छथि तकरा डालीक अनुसार अथवा एके ठाम उत्सर्ग कऽ अपनो खाइत छथि आ प्रसादो बँटैत छथि । षष्ठी दिन व्रत कएनिहार सब साँमmुक पहर नित्यक्रिया सँ निवृत्त अर्घ देबाक रहैत ततेक डाली, सूप वा ढाकनमे अर्घ सामग्री जेना¬ ठकुआ, भुसवा,केरा, फ, फूल, पान, सुपारी, धूप, दीप, अँकुरी जुटालैत छथि ।
पवनैतिन सब एहि मन्त्र सँ संकल्प लैत छथि¬ “नमेऽद्य कार्तिक मासीय शुक्ल पक्ष्ीय पाष्ठम्यां तिथौ ( अपन गोत्रक नाम लऽ क) जनम¬जन्मान्तरार्जित ज्ञाताज्ञात कायिक वाचिक मानसिक सकल पाप कामावाप्ति¬काम अद्य प्रातश्च सूूर्यायार्घमहं दास्ये ।” तखन अक्षत लऽ¬“ नमो भगवन सूर्य इहागच्छ इहतिष्ठतः ,कहि सराइमे अक्षत राखि जल लऽ¬ “एतानि पाद्यार्घाचमनीय स्नानीय पूूनराचमनीय नमो भगवते श्री सूर्यनारायणय नमः कहि जल चढा फूलमे लाल चानन लगा, लाल फूल, दूबि, अक्षत पकवान सहित जल लऽ सूर्य के देखैत नमोस्तु सुर्याय नमः ।” कहि सब डाली उत्सर्ग कऽ घर चल अवैत छथि आ पुनः सब सामान उत्सर्ग कऽ कथा सुनैत छथि ।




६. सूर्यदेवता के अनेक नाम
सूर्य, दिनमान, अंजिष्ट, अंघकारी, अंबर मणि, अंबरस्ष, दिनमाली, दिनेश, दिवाकर दिवा, अंशुघर, अंशुमाली, अकूरवार, अग, अदिती, देवमणि, धुपति, युमणि, घाम, नग, नभोमणि, सुत, अन्नपति, अरणि, अरविंद बंधु, अरुण, पद्मकारी, पद्मपाणि, पद्मबंधु, पद्रमिनी, कांत, अरुण, सारथि, अर्यमा, अहमणि, आकाश, पावक, पुष्कर, पूषा, प्रकाशात्मा, प्रजापति, पथिक आदितय, उष्णरश्मि, ओषधि, गर्भ, प्रधोत, प्रभाकर ,भानु, भास्कर मणि, कपिंजल ,कमलबंधु, कमलिनि कांत, कमलिनी कुल वल्लभ, करमाली कर्मसाक्षी, कवि, कालचक्र, किरण पणि, खग ,खतिलक, खधोत, खेचर , गगण विहारी, गगन मणि, गोपति, ग्रहपति, चंडरश्मिी, चित्रभानु, जनचक्षु, जिवितेश, ज्योतिक्ष्मान, ज्वालमाली, तपनांशु, तरणि, तीक्ष्णंशु, त्रिलोकेश्वर, दिनकर, दिनकांत, दिनपति, दिनमणि, मरीचिमाली, मरीची, मार्तड, मित्र, मिहिर, मेह, मैत्रेय, यज्ञेश, यमुना जनक, रवि, रित, लोक, बंधु, वरुण, विभाकर, विभावसु ,वेदोय, सप्ताश्व, सविता, सवितृ, सहस्त्रांशु, सांवत्सर रथ, सुर, सुरोत्तम, सुरज, सूरि, सूर्यनारायण, सोमबंधु, स्वणरिता, हंस, हरिवाहन, हिरण्यरेतिा, हेलिर ।

मनोज झा मुक्ति

मधेशमे विशेषरुपसँ पत्रकारिताक प्रशिक्षणक व्यवस्था होएबाक चाही


सुनिल रञ्जन सिंह, वरिष्ट उपाध्यक्ष(मधेशी पत्रकार समाज नेपाल)
आसिन २३,२४ आ २५ गतेक काठमाण्डूमे सम्पन्न मधेशी पत्रकार समाजक पहिल महाधिवेशन मोहन कुमार सिंहक अध्यक्षतामें नयाँ कार्यसमितिक चुनाव सर्व सम्मतिसँ कएलक अछि । नव कार्य समितिक वरिष्ट उपाध्यक्ष रहल सुनिल रञ्जन सिंह सँग काएलगेल बातचीतक किछु अंश प्रस्तुत अछि ।
प्र. सबसँ पहिने फेर दोसरवेर वरिष्ट उपाध्यक्षमें चुनल गेलहुँ ताइकेलेल बधाई अछि ।
उ. धन्यवाद । ई सब सम्पूर्ण साथीके हमरा उपर विश्वासक फल छियै । एहिसँ आओर हमरा उपर जिम्मेवारी बढ़ल महशुश भऽ रहल अछि ।
प्र. समग्रमें सम्मेलन केहन रहलैक ?
उ. ठीके ठाक रहलैक, किछु विवादक अलावा ।
प्र. कोन तरहक विवाद ?
उ. ओहन पैघ विवाद त नहिंए, हँ आर्थिक कारोवार आ नव कार्य समितिमें एक÷दूगोट पुराने चेहराके ल कऽ जिल्लाक साथीसबके अध्यक्षजीसँ मतभिन्नता रहलनि । जिल्ला आ केन्द्रक बहुत साथीसब अखुनका महा सचिव अनन्त मेहताके राखऽ नईं चाहैत रहथिन मुदा अध्यक्षजीक हठसँ पुनः हुनका राखल गलनि सैह दुःखद पक्ष एहि महाधिवशनके बनल, आर सब नीके रहलैक ।
प्र. आँहा सब कोन तरहक पत्रकारक विकास चाहैत छियैक ?
उ. सबसँ पहिने त मधेशी पत्रकार सब अपनेमें नीक चरित्रक होएबाक चाही । पत्रकारक नामपर कमिशन खोर आ घुसियाहा सबपर अंकुश लगवाक चाही । नेपालक हरेक सञ्चार गृहमें मधेशी पत्रकार सबहक स्थान सेहो सुनिश्चित होएबाक चाही । मधेशी पत्रकार सबहक समस्याके राज्यद्वारा सम्बोधन होएबाक चाही । मधेशीए भेलाक कारण कोनो पत्रकार अवसर या सुविधासँ वञ्चित नईं होएबाक चाही । मधेशमे विशेषरुपसँ पत्रकारिताक प्रशिक्षणक व्यवस्था राज्य आ सम्बन्धित निकायद्वारा कएल जेवाक चाही । एहि सबपर हमर सबहक ध्यान केन्द्रित रहल अछि ।
प्र. कि बुझाइय, राज्य आ सम्बन्धित निकाय आँहा सबहक माँगके सम्बोधन करत ?
उ. हमरा सबहक माँगके सम्बोधन करहिटा पड़तैक । कि मधेशी पत्रकार नेपाली नागरिक नईं छियैक ? जखन वएह सुविधा एकटा पहाड़ी पत्रकारके भेटि सकैय तहन मधेशी पत्रकारके किएक नहिं ? जौं हमरा सबहक माँगके वेवास्ता कएलगेल त ओसब संघर्षक सामनालेल तैयार रहओ।
मनोज झा मुक्ति